RBI की रिपोर्ट में खुलासा, देश पहली बार आर्थिक मंदी के दौर में, दूसरी तिमाही में GDP 8.6 प्रतिशत गिरने का अनुमान

GDP  को लेकर अनुसंधानकर्ताओं के विचार बुधवार को जारी आरबीआई के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित हुए.
GDP को लेकर अनुसंधानकर्ताओं के विचार बुधवार को जारी आरबीआई के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित हुए.

आरबीआई (RBI) की मासिक बुलेटिन रिपोर्ट के अनुसार जीडीपी (GDP) एक साल पहले की तुलना में 8.6 प्रतिशत घटने का अनुमान है. इस तरह लगातार दो तिमाहियों (Two quarters) में जीडीपी घटने के साथ देश पहली बार मंदी (recession) में घिरा है. बता दें वित्तवर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी के आंकड़े माइनस 23.9 रहे थे.

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  • Last Updated: November 12, 2020, 10:33 AM IST
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक अधिकारी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक साल पहले की तुलना में 8.6 प्रतिशत घटने का अनुमान है. इस तरह लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी घटने के साथ देश पहली बार मंदी में घिरा है. आपको बता दें कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के असर से पहली तिमाही में 23.9 प्रतिशत का संकुचन हुआ था. दूसरी तिमाही के जीडीपी के सरकारी आंकड़े अभी नहीं आए है. लेकिन केंद्रीय बैंक के अनुसंधानकर्ताओं ने तात्कालिक पूर्वानुमान विधि का प्रयोग करते हुए अनुमान लगाया है कि सितंबर तिमाही में संकुचन 8.6 प्रतिशत तक रहेगा.



RBI के मासिक बुलेटिन में जारी हुआ आंकड़ा- GDP  को लेकर अनुसंधानकर्ताओं के विचार बुधवार को जारी आरबीआई के मासिक बुलेटिन में प्रकाशित हुए. आरबीआई ने पहले ही अनुमान लगा रखा है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. आरबीआई के अनुसंधानकर्ता पंकज कुमार द्वारा तैयार की गयी अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि 'भारत तकनीकी रूप से 2020-21 की पहली छमाही में अपने इतिहास में पहली बार आर्थिक मंदी में चला गया है. ‘इकोनॉमिक एक्टिविटी इंडेक्स' यानी आर्थिक कामकाज का सूचकांक शीर्षक से लिखे गये लेख में कहा गया है कि लगातार दूसरी तिमाही में आर्थिक संकुचन होने का अनुमान है. हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होने के साथ संकुचन की दर कम हो रही है और स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है.



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कोरोना और लॉकडाउन से जीडीपी हुई प्रभावित- देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देख कर प्रधानमंत्री ने 24 मार्च की रात 12 बजे से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी. जिसके बाद पूरे देश में रेल और सड़क यातायात के साथ कल कारखाने पूरी तरह बंद हो गए थे. जिससे देश में मांग और आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा. ऐसे में देश में पहली बार आर्थिक मंदी का दौर शुरू हो गया और वित्तवर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी के आंकड़े माइनस 23.9 रहे.
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लॉकडाउन के बाद ऑटो सेक्टर में बढ़ी बिक्री- लॉकडाउन से पहले ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर चल रहा था. लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद सितंबर के महीने में ऑटो सेक्टर में तेजी देखने को मिली है. ऑटो इंडस्ट्री के डेटा के अनुसार, इस साल सितंबर में 2019 की इसी अवधि की तुलना में घरेलू बाजार में 26.5 प्रतिशत ज्यादा वाहनों की बिक्री हुई. कुल 2,72,027 यात्री वाहन बेचे गए, जबकि पिछले साल इस अवधि में 2,15,124 बेचे गए थे.



जल्द पटरी पर लौटेगी अर्थव्यवस्था- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों ऑटो सेक्टर में बिक्री में आई तेजी को देखते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही पटरी पर लौटेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, लॉकडाउन के बाद देश के कारखानों में पहले की तरह उत्पादन शुरू हो गया है. जिससे एक बार फिर देश में मांग और आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू हो गई है और अर्थव्यवस्था ने रिकवर होना शुरू कर दिया है.
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