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पटरी पर लौटती इंडियन इकोनॉमी के लिए झटका! तीन महीने के निचले स्‍तर पर पहुंचा मैन्‍युफैक्‍चरिंग PMI

नवंबर 2020 के दौरान मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में एक्टिविटीज फिर थम गई हैं.
नवंबर 2020 के दौरान मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में एक्टिविटीज फिर थम गई हैं.

कोरोना वायरस के कारण डांवाडोल हुई इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. हालांकि, नवंबर 2020 में दूसरी लहर के कारण कोविड-19 (Covid-19) को लेकर बनी अनिश्चितता से कारोबारियों का भरोसा घटा है. इससे मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर (Manufacturing Sector) पर बुरा असर पड़ा है. गिरावट के बाद भी सेक्‍टर को मजबूत माना जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 8:42 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण देश के मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर (Manufacturing Sector) की वृद्धि की रफ्तार फिर थम गई है. दरअसल, कोविड-19 को लेकर फिर बनी अनिश्चितता के कारण फैक्‍ट्री ऑर्डर्स, एक्‍सपोर्ट और खरीदारी में कमी से देश की मैन्‍यूफैक्‍चरिंग एक्टिविटीज (Manufacturing Activities) नवंबर 2020 में तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. हालांकि, इससे पहले इंडियन इकोनॉमी (Indian Economy) धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी थी, लेकिन नवंबर में इसमें तेजी से कमी दर्ज की गई है. इससे इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) नवंबर 2020 में 56.3 पहुंच गया, जो अक्टूबर में 58.9 पर था.

गिरावट के बाद भी मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में मजबूती
पीएमआई में गिरावट के बाद भी नवंबर 2020 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत माना जा रहा है. दरअसल, पीएमआई डाटा के 50 से अधिक होने पर माना जाता है कि बाजार में विस्तार हो रहा है. इससे कम पीएमआई का मतलब बाजार के सिमटने से लगाया जाता है यानी बाजार में आर्थिक गतिविधियों (Economic Activities) के घटने के तौर पर देखा जाता है. आईएचएस मार्केट की एसोसिएट डायरेक्‍टर (इकोनॉमिक्स) पॉलियाना डि लीमा ने कहा कि नवंबर में गिरावट के बाद भी सेक्‍टर में हालात को काबू में माना जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटीज में विस्तार की दर में कमी आना झटका नहीं है. यह आंकड़ा अक्टूबर के करीब एक दशक के उच्चस्तर के बाद कुछ नीचे आया है. कोविड-19 के मामले बढ़ने से यह सुधार प्रभावित हो सकता है.

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'लॉकडाउन की आशंका के कारण गिरा पीएमआई'


लिमा के मुताबिक, इंडियन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रिकवरी का माहौल बना हुआ है. अक्‍टूबर में नए ऑर्डर और उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. उन्होंने नवंबर के पीएमआई डाटा में कमी का कारण कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण लॉकडाउन (Lockdown) की आशंका से बाजार में पैदा हुई घबराहट को माना है. बता दें कि आईएचएस के सर्वे के मुताबिक, नवंबर 2020 में नए ऑर्डर की वृद्धि की रफ्तार (New Orders Growth) तीन माह में सबसे निचले स्‍तर पर रही है. सर्वे में पाया गया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बावजूद घरेलू मांग (Domestic Demand) बनी रही, जिससे बिक्री में बढ़ोतरी हुई. लीमा ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण कारोबारी भरोसे में कमी आई है.

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रोजगार के लिहाजा से भी अच्‍छा नहीं रहा नवंबर
आईएचएस के सर्वे के मुताबिक, आने वाले समय में उत्‍पादन में वृद्धि का अनुमान है, लेकिन कोरोना महामारी, सार्वजनिक नीतियों और रुपये में गिरावट के कारण कारोबारी भरोसे पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. रोजगार के मामले में नवंबर भी खास अच्‍छा नहीं बीता है. अक्टूबर की तरह नवंबर में भी छंटनी का सिलसिला जारी रहा है. पिछले महीने रोजगार में लगातार गिरावट रही, क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े दिशानिर्देशों का असर कंपनियों के काम पर भी पड़ा. लीमा ने कहा कि रोजगार में गिरावट का बड़ा कारण सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करने के लिए कम कर्मचारियों को रखना रहा. इसीलिए कंपनियों ने कम कर्मचारियों को रोजगार पर रखा. कीमतों के मामले में इनपुट कॉस्ट और आउटपुट चार्जेज तेजी से बढ़े हैं, जो औसत से अधिक रहे.

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देश की अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी से हो रहा है सुधार
पीएमआई में गिरावट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद के मुताबिक तेज रिकवरी (Economic Recovery) रही. जुलाई-सितंबर 2020 तिमाही में सकल घरेलू उत्‍पाद (GDP) में गिरावट घटकर 7.5 फीसदी रह गई है. बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की दर से गिरावट दर्ज की गई थी. तब कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने आर्थिक गतिविधियों पर बुरी तरह असर डाला था.
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