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अडानी समूह डीएचएफएल के अधिग्रहण के लिए बढ़ाएगा बोली! बाकी बोलीदाताओं का जमा जब्‍त करने की मांग की

अडानी समूह ने डीएचएफएल के लिए बोली बढ़ाने के संकेत दिए हैं.
अडानी समूह ने डीएचएफएल के लिए बोली बढ़ाने के संकेत दिए हैं.

अडानी समूह (Adani Group) ने डीएचएफएल (DHFL) की नीलामी करा रहे प्रशासक को भेजे ई-मेल में कहा है कि कुछ बोलीदाता (Bidders) मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं. वे (Lenders) और जमाकर्ताओं (Depositors) के लिए मूल्‍य को अधिकतम किए जाने से रोकना चाहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 4:52 PM IST
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नई दिल्ली. अडानी समूह (Adani Group) ने होम लोन उपलब्‍ध कराने वाली संकटग्रस्त कंपनी डीएचएफएल (DHFL) के अधिग्रहण (Acquisition) लिये 33,000 करोड़ रुपये की पेशकश की थी. अब कंपनी ने इस बोली (Bid) को बढ़ाने के संकेत दिए हैं. साथ ही कंपनी ने उन बोलीदाताओं की जमा राशि (Bidders Deposit) जब्त करने की मांग की है, जो पब्लिक फंड की अधिकतम वसूली पर सवाल खड़ा कर बोली की प्रक्रिया में खलल डालना चाहते हैं. समूह ने (Bankruptcy and Insolvency) प्रक्रिया के तहत डीएचएफएल की नीलामी करा रहे प्रशासक को ई-मेल के जरिये एक पत्र भेजा है. इसमें कहा गया है कि समूह ने तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया है.

प्रशासक को भेजे ई-मेल में अडानी समूह ने लगाए ये आरोप
अडानी समूह ने कहा है कि कंपनी प्रक्रिया का तेजी से अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए बिना शर्त पेशकश करने और सभी संबंधित पक्षों के लिये संभावित मूल्यों को अधिकतम रखना चाहती है. समूह की ओर से भेजे ई-मेल को डीएचएफएल के डाटा रूम में अपलोड किया गया है. इसमें अडानी समूह ने कहा है कि कुछ बोलीदाता मामले को लेकर सनसनी फैलाने के लिए मीडिया का सहारा ले रहे हैं. उनकी नीयत कर्जदाताओं (Lenders) और जमाकर्ताओं (Depositors) के लिये मूल्य को अधिकतम किए जाने से रोकने की है.

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डीएचएफएल के कर्जदाता चाहते हैं बोली बढ़ाएं कंपनियां


डीएचएफएल के लिये अक्टूबर 2020 में अडानी समूह, पीरामल समूह, अमेरिकी एसेट्स मैनेजमेंट कंपनी ओकट्री कैपिटल मैनेजमेंट और एससी लॉवी ने बोलियां पेश की थीं. हालांकि, डीएचएफल के कर्जदाता चाहते हैं कि बोलीदाता अपनी पेशकश बढ़ाएं. कर्जदाताओं की समिति के सूत्र ने बताया कि अडानी समूह ने शुरुआत में सिर्फ डीएचएफएल की थोक व झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण पोर्टफोलियो के लिये बोली पेश की थी. बाद में समूह ने बोली में बदलाव कर पूरे पोर्टफोलियो के लिये पेशकश की थी. यह पेशकश 30 हजार करोड़ रुपये की है. इसके अलावा समूह ने तीन हजार करोड़ रुपये के ब्याज की पेशकश की है.

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अडानी समूह पर समय के बाद बोली का लगा आरोप
अडानी समूह की पेशकश ओकट्री की 28,300 करोड़ रुपये की पेशकश से ज्‍यादा है. ओकट्री ने यह शर्त भी रखी थी कि वह बीमा दावों को लेकर 1,000 करोड़ रुपये रोककर रखेगी. पीरामल समूह ने डीएचएफएल के खुदरा पोर्टफोलियो के लिए 23,500 करोड़ रुपये की पेशकश की है. हॉन्‍गकॉन्‍ग की कंपनी एससी लॉवी ने झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण पोर्टफोलियो के लिए 2,350 करोड़ रुपये की पेशकश की है. अडानी की पेशकश के तुरंत बाद प्रतिस्पर्धी बोलीदाता धांधली की शिकायत करने लगे. इनका तर्क है कि अडानी ने समयसीमा पार होने के बाद बोली पेश की है और वह अपनी मूल योजना का विस्तार नहीं कर सकती है.
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