अडानी ग्रुप के हाथों में मुंबई एयरपोर्ट की कमान, खरीद सकता है 50% से अधिक हिस्सेदारी

अडानी ग्रुप के हाथों में मुंबई एयरपोर्ट की कमान, खरीद सकता है 50% से अधिक हिस्सेदारी
मुंबई एयरपोर्ट में अडानी ग्रुप खरीदेगा हिस्सेदारी

अडानी ग्रुप MIAL में GVK की 50.5 फीसदी और एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका (ACSA) और बिडवेस्ट ग्रुप (Bidvest group) जैसे अन्य अल्पांश शेयरधारकों की 23.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकती है.

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नई दिल्ली. अडानी ग्रुप (Adani Group) मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) में GVK ग्रुप की मुंबई हिस्सेदारी खरीदेगा. हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है. अरबपति गौतम अडानी की कंपनी MIAL में GVK की 50.5 फीसदी और एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका (ACSA) और बिडवेस्ट ग्रुप (Bidvest group) जैसे अन्य अल्पांश शेयरधारकों की 23.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकती है. पीटीआई के अनुसार, दोनों व्यापारिक समूहों के बीच प्रारंभिक बातचीत शुरू हो गई है और सौदे के बारे में प्रारंभिक घोषणा आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद है.

अडानी ग्रुप ने मार्च 2019 में दक्षिण अफ्रीकी कंपनी बिडवेस्ट (Bidvest) की 13.5 फीसदी हिस्सेदारी 1,248 करोड़ रुपये में खरीदने पर सहमति जतायी थी. इससे हवाई अड्डे को चलाने में अपनी रुचि का संकेत मिला. इस डील को GVK ने अपने पहले इनकार का अधिकार यानी हिस्सेदारी खरीद पर पहले अधिकार के प्रावधान का उपयोग करते हुए मना कर दिया था.

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अक्टूबर में, GVK ने अपनी 7 फीसदी हिस्सेदारी GVK एयरपोर्ट होल्डिंग्स में 14 7,614 करोड़ में अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, कनाडा के पब्लिक सेक्टर पेंशन इनवेस्टमेंट्स और राज्य के स्वामित्व वाली नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को बेचने पर सहमति व्यक्त की.
GVK से उम्मीद है कि वह इस बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग अपनी होल्डिंग कंपनियों के लोन दायित्वों को पूरा करने के लिए करेगा और अदानी समूह से MIAL के लिए अधिग्रहण की लड़ाई लड़ेगा. हालांकि, समझौते को अभी भी निष्पादित किया जाना है.

बंदरगाह क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अडानी ग्रुप हवाईअड्डों पर दांव लगा रहा है. समूह को हाल ही में छह हवाईअड्डों के परिचालन का ठेका मिला है. इसमें लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम और मैंगलोर शामिल हैं.समूह की नजर अब देश के दूसरे सबसे व्यस्त हवाईअड्डे पर है. MIAL में एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका की 10 प्रतिशत और शेष 26 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है.
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