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पहली बार प्राइवेट कंपनियां बनाएंगी PSLV, कॉन्ट्रैक्ट पाने की रेस में अडानी ग्रुप और L&T हैं शामिल

यह पहली बार हो रहा है जब किसी उपग्रह के लॉन्च व्हीकल को बनाने के लिए इसरो (ISRO) के बाहर किसी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है. इस कॉन्ट्रैक्ट को पाने की रेस में अडानी ग्रुप और लार्सन एंड टर्बो (L&T)भी शामिल है.

यह पहली बार हो रहा है जब किसी उपग्रह के लॉन्च व्हीकल को बनाने के लिए इसरो (ISRO) के बाहर किसी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है. इस कॉन्ट्रैक्ट को पाने की रेस में अडानी ग्रुप और लार्सन एंड टर्बो (L&T)भी शामिल है.

यह पहली बार हो रहा है जब किसी उपग्रह के लॉन्च व्हीकल को बनाने के लिए इसरो (ISRO) के बाहर किसी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है. इस कॉन्ट्रैक्ट को पाने की रेस में अडानी ग्रुप और लार्सन एंड टर्बो (L&T)भी शामिल है.

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    नई दिल्ली. भारत पहली बार इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO)से बाहर किसी प्राइवेट कंपनियों द्वारा स्पेस लॉन्च व्हीकल का निर्माण देखेगा. दरअसल, पोलर सैलेटलाइट लाॅन्च व्हीकल (PSLV)को निजी कंपनियां भी बना सकेंगी. ऐसा इसलिए क्योंकि किसी उपग्रह के लॉन्च व्हीकल को बनाने के लिए इसरो (ISRO) के बाहर किसी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है. इस कॉन्ट्रैक्ट को पाने की रेस में अडानी ग्रुप और लार्सन एंड टर्बो (L&T)भी शामिल है. इसके अलावा भी कुछ संस्थाएं इस डील को पाने के लिए लाइन में हैं.
    TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह डील पांच लाॅन्च छहीकल्स बनाने के लिए होगा. इसके लिए तीन संस्थाओं ने 30 जुलाई को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा जारी एक आरएफपी के जवाब में अपनी बोलियां जमा कीं.

    NSIL ने पांच PSLV ईओआई की घोषणा की
    बता दें कि NSIL को शुरू में इसरो का वाणिज्यिक पैर माना जाता था, हालांकि बाद में इसे लॉन्च वाहनों के उत्पादन, उपग्रहों के मालिक व अन्य के साथ अनिवार्य किया गया था. NSIL ने पांच PSLV के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) की घोषणा की थी, इस कई संस्थाओं ने दिलचस्पी दिखाईं. इनमें 3 संस्थाओं ने कुछ हफ्ते पहले ही बोलियां जमा की हैं.

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    BHEL भी है लाइन में..
    बता दें कि इस काॅन्ट्रैक्ट को पाने की लाइन में भेल (BHEL) भी है. तीन संस्थाओं में एक एचएएल और एलएंडटी का कंसोर्शियम है. दूसरा अडानी-अल्फा डिजाइन, BEL और BEML शामिल हैं. जबकि भेल ने एकल फर्म के रूप में बोली लगाई है. अंतरिक्ष विभाग के अनुसार, यह बोलियां मेक-इन-इंडिया पहल को बढ़ावा देगा. साथ ही यह इसरो की क्षमता को बढ़ाएगा. इसकी मदद से इसरो हर साल अधिक उपग्रह लॉन्च कर सकेगा.

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    NSIL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन डी ने कहा ‘तकनीकी-वाणिज्यिक मूल्यांकन चल रहा है, जिसके बाद बोलियां खोली जाएंगी. यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी होने की उम्मीद है. उइससे ज्यादा इस पर फिलहाल कुछ नहीं कह सकते हैं.’ TOI ने एक सूत्र ने हवाले से बताया है कि यह काॅन्ट्रैक्ट इस साल के अंत तक दिया जा सकता है. चुनी गई मैन्युफैक्चरर एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता होगी.

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