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शहद में मिलावट: CSE अपनी रिपोर्ट पर कायम, प्रमुख कंपनियां बचाव में उतरी

शहद में मिलावट के मामले ने तूल पकड़ा.

शहद में मिलावट के मामले ने तूल पकड़ा.

शहद (honey) के प्रमुख ब्रांडों में मिलावट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस पूरे मामले पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की टीम अपनी जांच रिपोर्ट पर कायम है. वहीं शहद का उत्पादन करने वाली प्रमुख कंपनियां बचाव की मुद्रा में आ गई है.

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    नई दिल्ली. देश की प्रमुख कंपनियों के शहद ब्रांडों में मिलावट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस पूरे मामले पर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की टीम अपनी जांच रिपोर्ट पर कायम है. वहीं शहद का उत्पादन करने वाली प्रमुख कंपनियां बचाव की मुद्रा में आ गई है. ऐसे में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सीएसई से जांच का विवरण मांगा है. जिसमें शीर्ष 10 शहद ब्रांडों में मिलावट का दावा किया गया है. 

    कैसे हुआ शहद में मिलावट का खुलासा- सीएसई के खाद्य शोधार्थियों ने भारतीय बाजार में बिकने वाले 13 शीर्ष और छोटे ब्रांड वाले प्रोसेस्ड शहद को चुना. इन ब्रांड के नमूनों को सबसे पहले गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) में स्थित सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (CALF) में जांचा गया. इसमें लगभग सभी शीर्ष ब्रांड (एपिस हिमालय छोड़कर) शुद्धता के परीक्षण में पास हो गए, जबकि कुछ छोटे ब्रांड इस परीक्षण में फेल हुए, उनमें सी 3 और सी 4 शुगर पाया गया, यह शुगर चावल और गन्ने के हैं, लेकिन जब इन्हीं ब्रांड को न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण पर परखा गया तो लगभग सभी ब्रांड के नमूने फेल पाए गए.

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    आपको बता दें एनएमआर परीक्षण वैश्विक स्तर पर मॉडिफाई शुगर सिरप को जांचने के लिए प्रयोग किया जाता है. 13 ब्रांड परीक्षणों में सिर्फ 3 ही एनएमआर परीक्षण में पास हो पाए. इन्हें जर्मनी की विशेष प्रयोगशाला में जांचा गया था.

     CSE अपनी रिपोर्ट पर कायम- शहद कंपनियों के दावों के बीच CSE अपनी जांच रिपोर्ट पर कायम है. वहीं एफएसएसएआई ने नमूनों और सीएसई से किए गए परीक्षणों के विवरण देने के लिए अनुरोध किया है.  जिस पर FSSAI के अधिकारियों ने कहा कि एक बार विवरण उपलब्ध हो जाने के बाद, अपनाई गई जांच पद्धति (प्रोटोकॉल) के बारे में एफएसएसएआई द्वारा उनका विश्लेषण किया जाएगा और भविष्य के लिए परीक्षण पद्धति में आवश्यक किसी भी सुधार का सुझाव दिया जाएगा.

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    देश की प्रमुख शहद कंपनियों ने किया बचाव- उधर देश की प्रमुख शहद कंपनियां इस पूरे मामले पर अपना बचाव करती नजर आ रही है. डाबर और पतंजलि का कहना है कि वे जो शहद बेचती हैं, उसमें सभी घरेलू टेस्टिंग मानकों का पूरा पालन किया जाता है. इस बीच सीएसई ने कहा कि वह अपनी जांच रिपोर्ट पर कायम है. संस्था ने एक बयान में कहा कि इन कंपनियों का दावा सच्चाई से परे है और शब्दों की जादूगरी है.

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