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अमेरिका पर क्‍यों टिकी हैं बाजार की निगाहें, उसके फैसलों का हम पर क्‍या असर

अमेरिका पर क्‍यों टिकी हैं बाजार की निगाहें, उसके फैसलों का हम पर क्‍या असर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक का फैसला भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर असर डालता है.

अमेरिकी केंद्रीय बैंक का फैसला भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर असर डालता है.

अमेरिका में कंज्‍यूमर प्राइस 7 फीसदी की दर से बढ़ा है, जो 40 साल का रिकॉर्ड है. इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर ब्‍याज दरें बढ़ाकर महंगाई थामने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दूसरी ओर, कर्ज महंगा होने से फिर मंदी गहराने का भी जोखिम है.

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नई दिल्‍ली. अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों पर बृहस्‍पतिवार को भारतीय निवेशक टकटकी लगाए होंगे. पहले ही बड़ी गिरावट से नुकसान झेल रहे शेयर बाजार को इन फैसलों का बेसब्री से इंतजार है.

दरअसल, बढ़ती महंगाई का दबाव घटाने के लिए अमेरिकी फेड रिजर्व ब्‍याज दरों में इजाफा कर सकता है. साथ ही चालू वित्‍तवर्ष की समाप्ति के साथ बॉन्‍ड की खरीद पर भी रोक लगा सकता है. अगर ये फैसला होता है तो इसका भारत सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों पर असर दिखेगा. अगर अमेरिका ने बॉन्‍ड खरीद रोकने का फैसला किया तो वहां के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आ सकती है. 2018 में इसी तरह के फैसलों के बाद डाउ जोंस तीन महीने में 20 फीसदी नीचे आ गया था. चूंकि, अमेरिकी स्‍टॉक मार्केट का असर दुनियाभर में दिखता है लिहाजा भारतीय निवेशकों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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ब्‍याज दरें बढ़ाई तो क्‍या होगा
जैसा कि अनुमान है फेड रिजर्व मार्च तक ब्‍याज दरों में 0.25 फीसदी से 0.50 फीसदी तक इजाफा कर सकता है, जो अभी जीरो के आसपास है. इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन, क्रेडिट कार्ड सहित कॉरपोरेट लोन तक महंगा हो जाएगा और कंपनियों की कमाई घट जाएगी. लोगों के खर्च करने की क्षमता में भी कमी आएगी और मंदी फिर जोर पकड़ सकती है. चूंकि, अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है तो इसका असर भारत पर भी बखूबी दिखेगा.

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अमेरिकी बाजार पहले ही सावधान
फेड रिजर्व के संकेतों के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों में निवेशक पहले ही सावधानी बरत रहे हैं. सोमवार को शुरुआती कारोबार में डाउ जोंस करीब 1,000 अंक नीचे आ गया था. इसके अलावा एसएंडपी भी मंगलवार को 1.2 फीसदी टूट गया. जनवरी में ही एसएंडपी में 10 फीसदी से ज्‍यादा गिरावट आ चुकी है.

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क्‍या कहते हैं दुनियाभर के अर्थशास्‍त्री
-जेपी मॉर्गन के ग्‍लोबल इकोनॉमिस्टि माइकल हैंसन का कहना है कि अगर फेड ने बॉन्‍ड होल्डिंग घटाने का फैसला किया तो हर महीने करीब 100 बिलियन डॉलर के बॉन्‍ड उसकी बैलेंस शीट से बाहर होंगे.
-टीडी सिक्‍योरिटीज में अमेरिकी ब्‍याज रणनीतिकार गेनाडी गोल्‍डबर्ग ने कहा, बढ़ती महंगाई के दबाव में फेड रिजर्व के प्रमुख पॉवेल को कुछ बड़े फैसले लेने होंगे. यह निश्चित तौर पर कर्ज महंगा कर सकता है.
-ग्‍लोबल एसेट मैनेजर पीजीआईएम के प्रमुख अर्थशास्‍त्री एलन गास्‍क का कहना है कि कंज्‍यूमर प्राइस 7 फीसदी तक बढ़ चुका है, लेकिन ब्‍याज दरें बढ़ाने से फिर मंदी का जोखिम पैदा हो सकता है. यह समय बेहद सावधानी बरतने का है.

Tags: Federal Reserve meeting, Share market

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