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NSE के बाद BSE ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को डिफॉल्टर घोषित किया, मेंबरशिप से निलंबित किया

ब्रोकरेज फर्म कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग
ब्रोकरेज फर्म कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग

एनएसई (NSE) के बाद बीएसई (BSE) ने भी ब्रोकरेज फर्म कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग (Karvy Stock Broking) को डिफॉल्टर (Defaulter) घोषित कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 12:11 AM IST
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नई दिल्ली. अगर आप शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करते हैं तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है. प्रमुख शेयर एक्सचेंज बीएसई (BSE) ने भी ब्रोकरेज फर्म कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग (Karvy Stock Broking) को डिफॉल्टर (Defaulter) घोषित कर दिया है और इस ब्रोकरेज हाउस को अपनी सदस्यता से निष्कासित कर दिया है. इससे पूर्व समान कार्रवाई नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange) के द्वारा की गई थी.

बीएसई ने मंगलवार को एक परिपत्र में कहा कि इस ब्रोकरेज फर्म के खिलाफ बकाए को लेकर कोई भी निवेशक नोटिस के जारी होने की तारीख से 22 फरवरी 2021 तक की 90 दिन की अवधि के भीतर एक्सचेंज के पास अपने दावे दर्ज करा सकता है.

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बीएसई ने कहा, ''एक्सचेंज ने एक्सचेंज के कॉरपोरेट ट्रेडिंग मेंबर कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड को डिफॉल्टर घोषित किया है. साथ ही इस कारोबारी सदस्य को 24 नवंबर से निष्कासित कर दिया है. एनएसई ने भी इस ब्रोकरेज हाउस को डिफॉल्टर घोषित किया है और 23 नवंबर से इसे अपनी सदस्यता से निष्कासित कर दिया है.''
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कार्वी ने अपने ग्राहकों द्वारा दिए गए 'पावर ऑफ अटॉर्नी' का दुरुपयोग करके अनधिकृत रूप से अपने डिमैट खातों में ग्राहकों की प्रतिभूतियों को स्थानांतरित कर लिया था. भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गत वर्ष नवंबर में कार्वी को नए ग्राहक बनाने से रोक दिया था.

2000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
गौरतलब है कि इस ब्रोकिंग फर्म पर 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप सामने आए हैं. ये देश में अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर डिफॉल्ट है. कार्वी पर क्लाइंट्स के शेयरों का दुरुपयोग करने के आरोप हैं.

क्या करें ग्राहक?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी का ब्रोकिंग खाता कार्वी में है तो उसे तुरंत बदल लेना चाहिए. यानी शेयर दूसरे ब्रोकिंग अकाउंट में शिफ्ट कर लेना ही सही होगा.
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