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श्रीलंका की राह पर चीन! ग्रोथ रुकी, भारी बिजली संकट और दिवालिया होते बैंक दे रहे खतरे के संकेत

चीन (China) से जो संकेत मिल रहे हैं वो बताते हैं कि चीन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

चीन (China) से जो संकेत मिल रहे हैं वो बताते हैं कि चीन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

चीन (China) से जो संकेत मिल रहे हैं वो बताते हैं कि चीन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. जून लगातार 10वां महीना है, जब चीन ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

चीन ने पिछले दो दशकों में आश्‍यचर्यजनक रूप से ग्रोथ हासिल की है.
चीन की अर्थव्‍यवस्‍था कर्ज आधारित है, जो अब ठहरने लगी है.
रियल एस्‍टेट सहित कई सेक्‍टरों में मांग में भारी कमी आने से कंपनियों को कर्ज नहीं मिल रहा है.

भुवन भास्‍कर

पिछले दो दशकों में चीन के विकास (China Growth) ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. सकल घरेलू उत्पाद (China GDP) में साल दर साल दोहरे अंक में वृद्धि किसी भी देश के लिए सपना था, जिसे चीन ने संभव कर दिखाया. लेकिन अब वर्ष 2022 की शुरुआत से ही चीनी अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है. चीनी अर्थव्‍यवस्‍था (Chinese Economy) के बारे में जो खबरें आ रही हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीनी अर्थव्‍यवस्‍था में लगे घाव काफी बड़े हैं और ये और बड़े हो रहे हैं.

चीन से जो संकेत मिल रहे हैं वो बताते हैं कि चीन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. जून लगातार 10वां महीना है, जब चीन में प्रॉपर्टी की कीमतें गिरी हैं. चीन कोयले की कमी से बुरी तरह जूझ रहा है और इससे देश में बिजली की भारी कमी हो गई है. यही नहीं, देश की बैंकिंग व्‍यवस्‍था भी लड़खड़ाने लगी है. बहुत से छोटे बैंक डिफॉल्‍टर हो गए हैं. चीन की जीडीपी में ग्रोथ भी ठहर गई है.

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रियल एस्‍टेट संकट
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में गड़बड़ी की शुरुआत पिछले साल हुई थी, जब सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों की कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए तीन नियम बनाए गए, जिन्हें ‘थ्री रेड लाइंस’ के नाम से जाना जाता है. चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड इन नियमों के टेस्ट में फेल हो गई. नतीजा यह हुआ कि एवरग्रैंड को और कर्ज जुटाने में मुश्किल होने लगी. एवरग्रैंड के 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट हैं, जो चीन के 280 शहरों में फैले हुए हैं. कंपनी की कुल संपत्ति 2 ट्रिलियन युआन है, जो चीन की कुल जीडीपी का 2% है. एवरग्रैंड के ग्राहकों की संख्या इस समय 15 लाख है, जिनका पैसा फंस गया है. करीब 50 शहरों की 100 से ज्यादा परियोजनाओं के ग्राहकों ने भुगतान बंद कर दिया है और अपना पैसा मांग रहे हैं. कंपनी पर 300 अरब डॉलर से ज्यादा की देनदारी है और उसने कई बॉन्ड का भुगतान करने में पहले ही डिफॉल्ट शुरू कर दिया है.

Evergrande डूबी तो रियल एस्‍टेट सेक्‍टर गिरेगा औंधे मुंह
रियल एस्टेट सेक्टर की हिस्सेदारी चीन के जीडीपी में 12% है. इसलिए एवरग्रैंड यदि दिवालिया हुई तो उसका असर पूरे चीन की अर्थव्यवस्था पर होगा. इससे सीमेंट, स्टील, सैनेटरी वेयर और कई दूसरे उद्योगों से मांग कम हो जाएगी. फिलहाल स्थिति यह है कि लगातार 12वें महीने में घरों की बिक्री घटी है, जो 1990 के बाद से निजी प्रॉपर्टी मार्केट में यह सबसे लंबी मंदी है.

गंभीर बिजली संकट
चीन कोयले की कमी से बुरी तरह जूझ रहा है और इसका नतीजा यह हुआ है कि चीन के औद्योगिक इलाकों में घंटों बिजली जा रही है. बिजली जाने से चीन का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है. चीन अपनी मैन्युफैक्चरिंग के लिए कच्चा माल दुनिया के कई देशों से लेता है और यदि चीनी उद्योगों ने उत्पादन में कटौती की तो इससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित होगी.

बदहाल बैंकिंग व्‍यवस्‍था
इस साल अप्रैल में चीन के हेनान प्रांत के कई छोटे बैंक असफल हो गए, जिनकी परिसंपत्ति (सबकी) 6 अरब डॉलर (40 अरब युआन) और लगभग 4 लाख ग्राहक थे. चीनी नियामक के नियम के मुताबिक, किसी भी बैंक में जमा रकम पर वहां के ग्राहकों को 5 लाख युआन की सॉवरेन गारंटी होती है. लेकिन रकम लौटाने की जगह चीनी अधिकारियों ने इन ग्राहकों को चुप कराने के लिए हर संभव कोशिश की है. हेनान की राजधानी में प्रदर्शन रहे लोगों पर हमला तक किया गया.

कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, कमजोर नियमन और खराब जोखिम प्रबंधन चीन के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में काम करने वाले छोटे और मझोले आकार के लगभग 4,000 और बैंकों में मौजूद हैं, जिनकी सम्मिलित परिसंपत्ति 14 लाख करोड़ डॉलर है. यदि ये बैंक दिवालिया होना शुरू हुए तो चीन में एक भयावह आर्थिक अराजकता फैल जाएगी. चीन में 2009 के बाद से कर्ज के आधार पर ग्रोथ की रणनीति पर अमल हो रहा है.  इस कारण आज चीनी बैंकिंग तंत्र 264% के कर्ज-जीडीपी अनुपात पर बैठा है.

विकास थमा, तो सब कुछ रूका
दरअसल कर्ज आधारित किसी भी ग्रोथ में ग्रोथ ही सबसे बड़ी चीज होती है. जब तक ग्रोथ चलती रहती है, तब तक कर्ज का चक्र बना रहता है. पिछले दो वर्षों में कोविड ने चीन की अर्थव्यवस्था के मूल स्‍तम्‍भों को हिला दिया. इस साल दूसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 0.4% पर आ गई है जबकि पहली तिमाही की तुलना में देखें तो यह 2.6% संकुचित हुई है. चीन की स्थानीय सरकारों की आमदनी में इस साल 6 लाख करोड़ युआन की कमी आने का अनुमान है. चीन ने अपने महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के लिए अरबों डॉलर का कर्ज ऐसे एशियाई और अफ्रीकी देशों को दिया है, जो आर्थिक तौर पर कमजोर हैं. उनके लिए उस कर्ज का ब्याज चुकाना मुश्किल हो सकता है, जैसा कि हमने श्रीलंका के मामले में देखा है.

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इसलिए हो सकता है कि इन कर्जों का एक बड़ा हिस्सा चीनी बैंकों को को राइट ऑफ करना पड़े. ये सारी परिस्थितियां यही संकेत कर रही हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था में जो कठिनाई दिख रही है, वह दीर्घकालिक और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं. चीन का वैश्विक अर्थव्यवस्था में जो स्थान है, उसमें यदि चीन लड़खड़ाया तो छोटी अवधि में दर्द सबको झेलना होगा. लेकिन लंबी अवधि में यह न सिर्फ आर्थिक तौर पर, बल्कि भू-राजनैतिक तौर पर भी भारत समेत पूरी दुनिया के लिए राहत का कारण बन सकता है.

(लेखक कृषि और राजनीतिक मामलों के जानकार हैं)

Tags: China, China news in Hindi, Economy, Sri lanka

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