SC के दखल के बाद RBI ने लोन पर दी बड़ी राहत, लॉकडाउन के दौरान काटा गया यह पैसा आएगा वापस

भारतीय रिजर्व बैंक
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आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि जिन लोगों ने करोना और लॉकडाउन के दौरान बैंक लोन में मोराटोरियम का इस्तेमाल किया था, उन्हें सिर्फ सामान्य ब्याज देना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 1, 2020, 11:24 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना और लॉकडाउन के वक्त में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोन में बड़ी राहत दी है. आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि जिन लोगों ने करोना और लॉकडाउन के दौरान बैंक लोन में मोराटोरियम का इस्तेमाल किया था, उन्हें सिर्फ सामान्य ब्याज देना होगा. जिन लोगों का ज़्यादा पैसा काटा गया है उनको वापस किया जायेगा. इससे पहले बैंक मोराटोरियम का इस्तेमाल करने वाले अपने ग्राहकों से चक्रवाती ब्याज ले रहे थे. लेकिन गजेन्द्र शर्मा की याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया था. इसके बाद अब चक्रवाती ब्याज नहीं सिर्फ सामान्य ब्याज से लोन का पैसा लिया जायेगा.

लॉकडाउन के इस वक्त की ईएमई में मिलेगी यह छूट
लोन मोराटोरियम की अवधि एक मार्च से 31 अगस्त, 2020 तक लागू होगी. केंद्र सरकार ने लोन धारकों को राहत देते हुए कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोन की ईएमआई जमा करने से छूट दी थी. लोन की ईएमआई न जमा करने की अवधि छह महीने है. लेकिन 31 अगस्त के बाद से सिंपल इंटरेस्ट के साथ ईएमआई लॉकडाउन से पहले की तरह जमा करना होगा. मोराटोरियम हाउसिंग, एजुकेशन, क्रेडिट कार्ड और एमएसएमई जैसे लोन पर दिया गया है.

लॉकडाउन में लोन न चुका पाना नाकामी नहीं मजबूरी थी
याचिकर्ता गजेन्द्र शर्मा का कहना है, “लॉकडाउन के दौरान हम अपने लोन की किश्त नहीं दे पा रहे थे. लेकिन यह हमारी नाकामी नहीं थी, यह तो लॉकडाउन के दौरान दुकान-कारोबार बंद होने की वजह से मजबूरी थी. जब धंधा ही नहीं है तो किश्त जमा करने के लिए पैसे कहां से लाएं. अब जब हमारी नाकामी नहीं है तो खामियाजा हम क्यों भुगतें. वहीं दूसरी बात यह कि लोन मोराटोरियम के बारे में बहुत सारे लोगों को जानकारी ही नहीं है.



जब जानकारी नहीं है तो वो इसके इस्तेमाल के लिए आवेदन कैसे देते. और लॉकडाउन के दौरान सड़क पर निकलने की मनाही थी, पुलिस सख्ती कर रही थी तो ऐसे में अपने घरों से निकलकर बैंक को लोन मोराटोरियम का आवेदन देने कैसे जाते. असल में यह मामला राइट टू लिव का है. इसी को आधार बनाकर हमने याचिका दाखिल की है. हम नेक काम करने जा रहे हैं और करोड़ों लोगों की दुआएं हमारे साथ हैं. हमे उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला हमारे हक में आएगा.”
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