Agri Reforms: देश में खुला प्राइवेट मंडियों का रास्ता, क्या फायदे में रहेंगे किसान?

Agri Reforms: देश में खुला प्राइवेट मंडियों का रास्ता, क्या फायदे में रहेंगे किसान?
निजी मंडियों और ऑनलाइन प्लेटफार्म पर क्या किसानों का सही दाम मिलेगा (प्रतीकात्मक फोटो)

निजी क्षेत्र के लिए एमएसपी को बनाया जाए किसानों की उपज खरीदने का मूल आधार, इससे कम पर न कर पाए कोई खरीद, वरना होगा किसानों का शोषण: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली. कृषि सुधारों (Agri Reforms) के एलान के बाद देश में निजी मंडियों के खुलने का भी रास्ता साफ हो गया है. लॉकडाउन में कृषि इकलौता सेक्टर है जिसमें ग्रोथ (Agriculture Growth) का अनुमान है. इसलिए निजी क्षेत्र का कृषि में निवेश करने का अनुमान है. सरकार ने उन्हें कानूनी तौर पर इजाजत तो दे ही दी है. लेकिन क्या इस व्यवस्था में किसानों को फायदा मिलेगा. क्या उन्हें उचित दाम मिलेगा. सरकार तो कह रही है कि सरकारी मंडी (Mandi) से बाहर भी किसान को अच्छा दाम मिलेगा लेकिन इसका आधार एमएसपी को नहीं बनाया गया है.

कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा कहते हैं कि सरकार ने कृषि सुधारों के नाम पर राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-Nam)  बनाया है. अच्छी बात है. लेकिन इसमें हो क्या रहा है. इसी प्लेटफार्म पर किसानों (Farmers) ने 59 पैसे और 1 रुपये किलो में भी प्याज बेचा है. फिर ऐसे सुधार का क्या मतलब है. सरकार को ट्रेडर्स के लिए नहीं किसानों के लिए काम करना होगा. यदि सरकार किसानों का हित चाहती है तो हर कृषि उत्पाद पर एक एश्योर्ड प्राइस तय होनी चाहिए.

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शर्मा कहते हैं कि किसी भी ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म या निजी मंडी में एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP-Minimum Support Prices) को मॉडल प्राइस बनाना होगा. वरना किसान नुकसान में रहेंगे. अगर सरकार ये कहती है कि सरकारी मंडी से बाहर की खरीद पर भी अच्छा दाम मिलेगा तो फिर वो एमएसपी को आधार बनाने से क्यों बच रही है. शर्मा कहते हैं कि नई व्यवस्था व्यापारियों और कारपोरेट के फायदे के लिए बनाई जा रही है न कि किसानों के फायदे के लिए.
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क्या निजी क्षेत्र के आने से किसानों को फायदा होगा


निजी क्षेत्र कृषि कारोबार में आए, तकनीक आए, लेकिन सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि वो किसानों का शोषण न करे. एमएसपी से कम दाम कहीं कोई न दे. सरकार यह तय कर दे. तभी किसानों का हित सुरक्षित होगा.

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हालांकि, डबलिंग फार्मर्स इनकम (DFI) कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक दलवई का कहना है कि किसान को जहां भी उनकी फसल का सही रेट मिलेगा वहां पर उसे बेचेगा. उसे मंडी से अच्छा रेट बाहर मिलेगा तो वो बाहर बेचेगा और मंडी में अच्छा रेट मिलेगा तो मंडी में बेचेगा.
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