एअर इंडिया कर्मचारियों की सैलरी में 30% कटौती संभव, बिना पेमेंट छुट्टी पर भेजने की भी योजना

एअर इंडिया

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सरकारी क्षेत्र की विमान कंपनी एअर इंडिया (Air India Employees) अपने कर्मचारियों की सैलरी में 30 फीसदी तक की कटौती कर सकती है. साथ ही कुछ कर्मचारियों को बिना सैलरी के छुट्टी पर भेजे जा सकते हैं. हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ​सरकार एयरलाइंस को आर्थिक मदद देने की स्थिति में नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 20, 2020, 10:21 PM IST
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नई दिल्ली. कर्ज के बोझ में डूबी सरकारी विमान कंपनी एअर इंडिया (Air India) के कर्मचारियों को इस सप्ताह में जून की सैलरी मिल सकती है. लेकिन, एअर इंडिया कर्मचारियों (Air India Employees) के लिए एक बुरी बात यह है कि उनके ग्रेड के हिसाब से 30 फीसदी तक सैलरी कटौती भी संभव है. दरअसल, पहले से ही वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही इस सरकारी विमान कंपनी के लिए कोरोना वायरस महमारी ने और भी बड़ी संकट खड़ी कर दी है. यही कारण है कि कंपनी अब अपने खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों की सैलरी में कटौती कर सकती है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एअर इंडिया सैलरी कटौती के साथ छंटनी भी कर सकती है. एअर इंडिया अपने कुछ कर्मचारियों के पोसट रिटायरमेंट पर विचार कर रही है.

5 साल तक के लिए ​छुट्टी पर भेजे जा सकते हैं कर्मचारी
एअर इंडिया अब कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना बनाई है. ऐसे में संभव है कि कंपनी अपने कुछ कर्मचारियों बिना वेतन के ही लंबी छुट्टी (Leave Without Pay) पर भेज सकती है. कर्मचारियों के लिए यह छुट्टी 6 महीने से लेकर 5 साल तक के लिए हो सकती है. एअर इंडिया अपने कर्मचारियों को कई फैक्टर्स के आधार चुनेगी कि किसे बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जाएगा. इसमें दक्षता, क्षमता, प्रदर्शन की गुणवत्ता, कर्मचारियों की स्वास्थ्य आदि को ध्यान में रखा जाएगा.

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पायलट यूनियन ने किया विरोध


एअर इंडिया की इस योजना के बीच कंपनी के पायलट यूनियन आईसीपीए ने सोमवार को कहा है कि विमान कंपनी द्वारा पायलटों की सैलरी में किसी प्रकार का इकतरफा बदलाव गैरकानूनी होगा. आईसीपीए और इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) ने पिछले सप्ताह प्रबंधन को भेजे एक संयुक्त पत्र में कहा कि कोरोना महामारी के बीच एयर इंडिया ने पायलट के वेतन में 60 फीसदी कटौती का प्रस्ताव रखा है.

जबकि टॉप मैनेजमेंट ने अपने कुल वेतन में 3.5 फीसदी कटौती का प्रस्ताव किया है. बता दें कि एयर इंडिया पर लगभग 70,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और सरकार ने इसे इस साल जनवरी में इसके निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की है.

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क्या है हरदीप सिंह पुरी का कहना?
इस बीच एविएशन मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने एअर इंडिया के इस योजना को सही करार देते हुए कहा कि सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास कोई विकल्प होता तो लागत में इतनी कटौती की कोई जरूरत नहीं होती. सरकार इस स्थिति में नहीं है कि वो विमान कंपनियों की कोई आर्थिक मदद कर सके. उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल से पहले जितनी घरेलू उड़ानों का संचालन होता था, उस तुलना में इस साल दिवाली के अंत तक 55 से 60 फीसदी उड़ाने शुरू हो जाएंगी.
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