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एअर इंडिया को लेकर हाई लेवल मीटिंग आज, बिक्री पर हो सकता है फैसला

जीओएम ग्रुप का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं.
जीओएम ग्रुप का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं.

CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जीओएम की बैठक में एअर इंडिया को लेकर आए ईओआई यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्टबिक्री को मंजूरी मिल सकती है. अगर आसान शब्दों में कहें एअर इंडिया को खरीदने के लिए आई बोली पर फैसला हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 7, 2020, 1:08 PM IST
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नई दिल्ली. भारी कर्ज़  के तले दबी सरकारी एविएशन कंपनी एअर इंडिया (Air India) की बिक्री को लेकर बने जीओएम यानी ग्रुप ऑफ मिनिस्ट्रिर्स मंगलवार को इस पर फैसला ले सकता है. CNBC TV18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जीओएम की बैठक में एअर इंडिया को लेकर आए ईओआई यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्टबिक्री को मंजूरी मिल सकती है. अगर आसान शब्दों में कहें एअर इंडिया को खरीदने के लिए आई बोली पर फैसला हो सकता है.

आपको बता दें कि इसके पहले सरकार ने 2018 में एअर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली आमंत्रित की थी. लेकिन तब यह प्रक्रिया विफल रही क्योंकि कोई खरीदार ही सामने नहीं आया.

अब निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन (DIPAM) विभाग ने एअर इंडिया की बिक्री का नया प्रस्ताव तैयार किया है. इसमें कच्चे तेल की कीमत, करेंसी में उतार-चढ़ाव जैसे कई मसलों को ध्यान में रखा गया है.



अमित शाह कर रहे हैं जीओएम की अध्यक्षता-जीओएम ग्रुप का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं. एअर इंडिया की बिक्री के तौर-तरीकों के बारे में प्रीलिमिनरी इन्फॉर्मेशन मेमोरंडम (PIM) में हुई चर्चा के आधार पर मंगलवार की बैठक में बात की जाएगी.
इस समूह में शाह के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं रेलवे मंत्री पीयूष गोयल और नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं. इंडिया स्पेसिफिक अल्टरनेटिव मेकेनिज्म (AISAM) नाम के इस समूह का गठन जून 2017 में किया गया था.



आपको बता दें कि पिछले साल जुलाई में इस समूह से परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बाहर हो गए थे और उनकी जगह अमित शाह को शामिल कर समूह की कमान दी गई थी. इस समिति को यह तय करना है कि एअर इंडिया की बिक्री का तरीका क्या हो.

एअर इंडिया पर करीब 58 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है. एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है.

इन हालातों में एयर इंडिया तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया नहीं दे पा रही है. हाल ही में तेल कंपनियों ने ईंधन सप्लाई रोकने की भी धमकी दी थी.

लेकिन फिर सरकार के हस्तक्षेप से ईंधन की सप्लाई को दोबारा शुरू कर दिया गया था. केंद्र सरकार, एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है.

तीन सालों के दौरान एयर इंडिया का घाटा सबसे शीर्ष पर रहा. कंपनी की नेटवर्थ माइनस में 24,893 करोड़ रुपये रही, वहीं नुकसान 53,914 करोड़ रुपये का रहा.
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