दुनिया के तीसरे बड़े अमीर के उत्तराधिकारी हो सकते हैं अजित जैन, कभी थे सेल्समैन

वारेन बफे के उत्तराधिकारी की रेस में शामिल लोगों में भारतीय मूल के अजित जैन का नाम भी शामिल है और वह सीईओ पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

वारेन बफे के उत्तराधिकारी की रेस में शामिल लोगों में भारतीय मूल के अजित जैन का नाम भी शामिल है और वह सीईओ पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

वारेन बफे के उत्तराधिकारी की रेस में शामिल लोगों में भारतीय मूल के अजित जैन का नाम भी शामिल है और वह सीईओ पद के लिए प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

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दुनिया के सबसे बेहतर निवेशकों में एक माने जाने वाले वारेन बफे (Warren Buffet) 88 वर्ष के हो चुके हैं. अब उनके द्वारा स्थापित कंपनी बर्कशायर हैथवे में उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं. इस रेस में शामिल लोगों में भारतीय मूल के अजित जैन का नाम भी शामिल है और वह सीईओ पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. अजित जैन लंबे समय से बफे के साथ जुड़े हैं. दिलचस्‍प बात यह है कि अजित जैन कभी सेल्‍समैन की नौकरी करते थे.

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गैबेली एंड कंपनी में एक रिसर्च एनालिस्ट मैक्रे साइक्स का मानना है कि वारेन बफे का विकल्प असंभव है. हालांकि इंवेस्टमेंट फर्म कीफे, ब्रूयेट एंड वुड्स के एमडी मेयर शील्ड्स का मानना है कि वारेन बफे के बिना भी बर्कशायर हैथवे अच्छा प्रदर्शन करती रहेगी. उनका मानना है कि बर्कशायर के अधिकतर कारोबार मजबूत स्थिति में हैं जिसका स्वामित्व से अधिक फर्क नहीं पड़ता है.




कभी सेल्समैन की करते थे नौकरी, अब 14 हजार करोड़ के हैं मालिक- अजित जैन कभी सेल्‍समैन की नौकरी करते थे. लेकिन आज वो 2 अरब डॉलर यानी 14 हजार करोड़ रुपये के मालिक हैं. वहीं फोर्ब्स के मुताबिक वॉरेन बफे वर्तमान में दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्‍स हैं, जिनकी नेटवर्थ 89.8 अरब डॉलर यानी करीब 6.29 लाख करोड़ रुपये है.

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जैन ने आईआईटी खड़गपुर से की पढ़ाई- ओडिशा के कटक में जन्‍मे अजित जैन ने आईआईटी की पढ़ाई की है. उन्‍होंने 1972 में आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की. जैन ने भारत में 1973 से 1976 तक डाटा प्रोसेसिंग ऑपरेशन के लिए इंटरनेशनल बिजनेस मशीन कॉर्पोरेशन (आईबीएम) में बतौर सेल्‍समैन काम किया. उन्‍हें 1976 में अपनी इस नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा. दरअसल, आईबीएम ने इस प्रोजेक्‍ट को भारत में बंद कर दिया था.

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उत्तराधिकारी की दौड़ में दो लोग सबसे आगे- वारेन बफे के उत्तराधिकारी की दौड़ में दो लोग सबसे आगे हैं. एक हैं जार्जरी एबेल और दूसरे अजीत जैन. इन दोनों को पिछले साल ही बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल किया गया था और दोनों बफे के साथ लंबे समय से काम कर रहे हैं. एबेल ने कंपनी में एनर्जी डिवीजन को 1992 में जॉइन किया था और जैन 1986 में इंश्योरेंस डिवीजन में आए थे.

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एबेल की दावेदारी अधिक मजबूत- शील्ड्स का कहना है कि हालांकि बफे ने कभी ऑफिशियली इसकी घोषणा नहीं की है लेकिन उनके उत्तराधिकारी के तौर पर ग्रेग एबेल या अजीत जैन को चुना जा सकता है. इसमें भी एबेल की दावेदारी अधिक मजबूत है क्योंकि उन्हें कंपनी के नॉन-इंश्योरेंस बिजनेस का भी अनुभव है.

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