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सावधान! भारी पड़ सकता है Google पर किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर ढूंढना, फर्जी नंबर डालकर हो रही लाखों की धोखाधड़ी

गूगल और व्हाट्सअप के सहारे अपने परिवार से मिल सकीं 93 वर्षीय उम्रदराज महिला.

गूगल और व्हाट्सअप के सहारे अपने परिवार से मिल सकीं 93 वर्षीय उम्रदराज महिला.

लॉकडाउन के दौरान ज्‍यादातर लोग ऑनलाइन स्‍टोर्स या सर्विस प्रोवाइडर्स की मदद ले रहे हैं. उनके कस्‍टमर केयर नंबरों (CCN) को हासिल करने के लिए गूगल सर्च (Google Search) का सहारा लिया जा रहा है. साइबर अपराधी यहीं लोगों से धोखाधड़ी (Fraud) कर लाखों की चपत लगा रहे हैं. आइए जानते हैं कि कैसे वे फ्रॉड को अंजाम देते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है.

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    नई दिल्‍ली. लॉकडाउन के दौरान ज्‍यादातर लोग ऑनलाइन स्‍टोर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स की काफी मदद ले रहे हैं. ज्‍यादातर लोग अपने आसपास के सर्विस प्रोवाइडर्स, स्‍टोर्स या कंपनियों के कस्‍टमर केयर नंबर (Customer Care Number) तलाशने के लिए गूगल सर्च (Google Search) का सहारा लेते हैं. गूगल सर्च की मदद से लोगों को तेजी से जानकारी मिल जाती है. हम में से ज्‍यादातर लोग इस तरीके से हासिल की गई जानकारी पर आंखें मूंदकर भरोसा कर लेते हैं, जबकि इसे लेकर सावधान होने की सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है. दरअसल, साइबर अपराधी (Cyber Criminals) इस समय लोगों के गूगल सर्च पर इसी भरोसे का फायदा उठाकर लाखों की धोखाधड़ी (Fraud) कर रहे हैं. आसान शब्‍दों में समझें तो गूगल सर्च से मिले नंबर पर भरोसा करना आपको भारी पड़ सकता है.

    ऐसे खाली कर दिया जाता है यूजर का बैंक अकाउंट
    साइबर अपराधी गूगल पर फर्जी कस्‍टमर केयर नंबरों (Fake CCN) की पूरी लिस्‍ट डाल देते हैं. इसके बाद जब आप उन नंबरों पर फोन करते हैं तो वे खुद को उस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर बात करते हैं. फिर वे आपको एक ऑनलाइन फॉर्म (Online Form) का लिंक भेजकर उसे भरने को कहते हैं. इसमें पेमेंट के तरीके की पूरी जानकारी भी मांगी जाती है. इसके बाद 1 से लेकर 10 रुपये तक के टोकन ट्रांजेक्‍शन को कहा जाता है. ये राशि इतनी कम होती है कि ज्‍यादातर लोग परवाह नहीं करते और इसी दौरान साइबर अपराधियों को आपके बैंक अकाउंट का एक्‍सेस मिल जाता है. इसके बाद वे आपके अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर देते हैं.

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    कुछ साल से बढ़े हैं ऑनालाइन धोखाधड़ी के मामले
    नवी मुंबई की प्रियंका खताल को साइबर अपराधियों ने 1 लाख रुपये ज्‍यादा की चपत लगाई. साइबर अपराधियों ने उनसे एक कूरियर सर्विस के प्रतिनिधि बनकर धोखाधड़ी की और उनका बैंक अकाउंट खाली कर दिया. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बेंगलुरु की एक आईटी प्रोफेशनल को भी ऐसी ही धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया था. उन्‍होंने एक कूरियर भेजने के लिए गूगल सर्च पर मिले फेडएक्‍स के कस्‍टमर केयर पर फोन किया था. उन्‍हें 64,000 रुपये की चपत लगाई गई थी. ये ऑनलाइन धोखाधड़ी की चंद कहानियां हैं. पिछले कुछ साल से ऐसे मामलों में काफी तेजी आई है.

    ये सावधानियां बचा सकती हैं आपकी मेहनत की कमाई
    अब सवाल ये है कि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा कैसे जाए? सबसे पहला काम तो यही किया जा सकता है कि अगर आप किसी सर्विस प्रोवाइडर का नंबर गूगल सर्च पर तलाश रहे हैं तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट से लें. इंफ्रासॉफ्टटेक के एमडी व सीईओ राजेश मीरजांकर का कहना है कि आप कंपनी के ऑफिशियल ई-मेल आईडी पर मेल भी कर सकते हैं. इसके अलावा अपने बैंक कार्ड या अकाउंट की जानकारी किसी को ना दें. अगर कोई व्‍यक्ति आपसे ओटीपी नंबर मांग रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाएं. अपना सीवीवी या यूपीआई पिन किसी के साथ शेयर ना करें.

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