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देश में दालों के स्‍टॉक की सीमा से कारोबारी खफा, दो सौ के बजाय दो हजार टन की मांग

केंद्र सरकार ने दालों के स्‍टॉक की सीमा तय करते हुए अधिसूचना जारी की है लेकिन कारोबारी इसका विरोध जता रहे हैं.

केंद्र सरकार ने दालों के स्‍टॉक की सीमा तय करते हुए अधिसूचना जारी की है लेकिन कारोबारी इसका विरोध जता रहे हैं.

Pulse Stock Limit in India: दालें मूल रूप से आठ प्रकार की होती हैं और इन 8 प्रकार की दालों को मिलाने या साफ करने के बाद 30 से अधिक प्रकार की दालों में बदला जाता है. यह कल्पना से परे है कि थोक विक्रेता कैसे सिर्फ 100 टन में 30 से अधिक प्रकार की दालों को स्टॉक कर सकते है.

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    नई दिल्‍ली. देश भर के खाद्यान्न व्यापारी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से दो जुलाई को जारी एक अधिसूचना से खासे नाराज हैं और इसका विरोध जता रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि देश भर के खाद्यान थोक विक्रेताओं के लिए दालों की स्टॉक सीमा 200 टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए 5 टन निर्धारित की गई है जो कि ठीक नहीं है.

    विरोध जता रही कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स का कहना है कि यह अधिसूचना सरकार की अपनी खुद की नीति का उल्लंघन है. इस संबंध कैट की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल को पत्र भेजकर इसे वापस लेने की भी मांग की गई है. कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि अधिसूचना जारी करते समय, संबंधित अधिकारियों द्वारा हितधारकों के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया जो कि किसी भी नीतिगत मुद्दे को उठाने से पहले हितधारकों को विश्वास में लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह का सीधा उल्लंघन है.

    कैट की ओर से कहा गया कि देश भर में लगभग 5 लाख व्यापारी खाद्यान्न का व्यवसाय करते हैं और 23 लाख से अधिक लोगों को जिनमें मुख्य रूप से अशिक्षित वर्ग के लोग हैं, को सामान लदान और उतारने के लिए रोजगार देते हैं. लगभग 5 लाख लोग अप्रत्यक्ष रूप से खाद्यान्न व्यापार से अपनी आजीविका चलाते हैं. देश में विभिन्न दालों का वार्षिक उत्पादन लगभग 256 लाख टन है, और लगभग 20 लाख टन की दाल आयात होती है. देश में दाल का कारोबार लगभग रु. 140 लाख करोड़ का है.

    2017 में एक अधिसूचना के माध्यम से सरकार ने यह अनिवार्य कर दिया था कि सरकार के पोर्टल पर 6 प्रकार की दालों, मसूर, चना, तूर, उड़द, मूंग और काबली चना की स्टॉक सीमा अपलोड की जाएगी, जिसका व्यापारियों ने विधिवत पालन भी किया. उस वक्‍त सरकार ने स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि आवश्यक वस्तु अधिनियम या स्टॉक सीमा तभी लागू होगी जब दालों की कीमत या तो एमएसपी से 50% अधिक होगी या देश में कोई आपातकालीन स्थिति होगी.

    सरकार की इस घोषणा की अवहेलना करते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने दो जुलाई 2021 को एक अधिसूचना जारी करके थोक व्यापारियों के लिए 200 टन तक दाल का स्टॉक करने की लिमिट लगा दी है. इसमें एक प्रकार की दाल का 100 टन तक स्टॉक किया जा सकता है. ऐसे में अन्य दालों के लिए स्टॉक बचे 100 टन में ही करना होगा. यह अन्‍याय पूर्ण है.

    आठ प्रकार की होती हैं दालें, बन जाती हैं 30 प्रकार की

    कैट ने कहा कि दालें मूल रूप से आठ प्रकार की होती हैं और इन 8 प्रकार की दालों को मिलाने या साफ करने के बाद 30 से अधिक प्रकार की दालों में बदला जाता है. यह कल्पना से परे है कि थोक विक्रेता कैसे सिर्फ 100 टन में 30 से अधिक प्रकार की दालों को स्टॉक कर सकते है.

    45 दिन का क्लियरेंस स्‍टॉक भी है समस्‍या

    कैट की ओर से कहा गया कि सरकार ने इस अधिसूचना में यह भी कहा है कि मिलर्स को 15 मई के बाद प्राप्त माल के लिए कस्टम क्लीयरेंस की तिथि से 45 दिनों के भीतर अपने स्टॉक को समाप्त करना होगा. अन्यथा उन्हें थोक विक्रेताओं के लिए निर्धारित स्टॉक सीमा का पालन करना होगा. जबकि 15 मई, 2021 से पहले मिलर्स पर ऐसी कोई सीमा नहीं थी.  देश भर में 50 हजार से अधिक मिलर्स हैं. जो दालों के प्रसंस्करण और परिष्करण गतिविधियों में लगे हुए हैं. आमतौर पर एक मिलर 3 हजार से 5 हजार टन तक कच्ची दालों का स्टॉक रखता है.

    कारोबारियों की यह है मांग

    कैट की मांग है कि स्टॉक सीमा निर्धारित करने वाली अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया जाए क्योंकि 200 टन की स्टॉक सीमा 1955 में तय की गई थी जब देश की जनसंख्या केवल 25 करोड़ थी.  वर्तमान आबादी के लिए यह सीमा काफी तर्कहीन और अनुचित है. अगर सरकार को लगता है कि स्टॉक की सीमा लागू करना जरूरी  है तो देश की मौजूदा आबादी के अनुपात में 2000 टन की स्टॉक सीमा वो भी किसी विशेष दाल के लिए कोई स्टॉक सीमा निर्दिष्ट किए बिना थोक व्यापारियों के लिए निर्धारित की जा सकती है.

    साथ ही दालों का आयात भारी मात्रा में किया जाता है, इसलिए आयातकों या मिलर्स के लिए कोई स्टॉक सीमा निर्धारित नहीं की जानी चाहिए. पोर्टल पर स्टॉक लिमिट का अपडेशन केवल 6 प्रकार की दालों तक सीमित था जो एमएसपी श्रेणी के अंतर्गत हैं जबकि 2 जुलाई की वर्तमान अधिसूचना के खंड 2 (i) के तहत "मूंग को छोड़कर सभी दालों को एक साथ रखने" को अद्यतन करने का प्रावधान करती है. कैट ने आग्रह किया है कि उक्त अधिसूचना के खंड 2 (i) को वापस लिया जाए और स्टॉक के अद्यतन की पूर्व स्थिति को बनाए रखा जाना चाहिए.

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