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इन तीन बैंकों में है अकाउंट तो हो जाएं खुश, इस दिन से कम हो चुकी है आपकी EMI

News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 5:33 PM IST
इन तीन बैंकों में है अकाउंट तो हो जाएं खुश, इस दिन से कम हो चुकी है आपकी EMI
RBI की बैठक के बाद 3 बैंकों ने MCLR घटाया

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद देश के 3 प्रमुख बैंकों ने MCLR में कटौती करने का फैसला लिया है. ये कटौती 14 फरवरी 2020 यानी आज से लागू हो गई है, जिसके बाद इन तीन बैंकों से लिए हुए कर्ज पर EMI घट जाएगी.

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  • Last Updated: February 22, 2020, 5:33 PM IST
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नई दिल्ली. इलाहाबाद बैंक (Allahabad Bank) ने विभिन्न मैच्योरिटी पीरियड वाले सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (MCLR) में 0.05 फीसदी की कटौती की है. संशोधित दरें 14 फरवरी से प्रभावी हो चुकी हैं. बैंक ने BSE से कहा कि उसकी संपत्ति उत्तरदायित्व प्रबंधन समिति ने मौजूदा MCLR की समीक्षा की और सभी परिपक्वता अवधि के कर्जों के लिए इसमें 0.05 फीसदी की कटौती करने का निर्णय लिया.

क्या हैं नई दरें
बैंक ने कहा कि एक साल की मैच्योरिटी पीरियड वाले कर्ज का MCLR अब 8.30 फीसदी से कम होकर 8.25 फीसदी पर आ गया है. इसी तरह एक दिन, तीन महीने और छह महीने का MCLR कम होकर 7.75 फीसदी से 8.10 फीसदी के बीच आ गया है. एक महीने की परिपक्वता अवधि वाले कर्ज का MCLR अपरिवर्तित है.

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SBI ने भी 10 फरवरी से की है कटौती
इसके पहले भारतीय स्टेट बैंक ने भी MCLR में 0.05 फीसदी की कटौती कर दी है. एसबीआई ने रिवाइज्ड MCLR को 10 फरवरी से ही लागू कर दिया है. एसबीआई ने लगातार नौवीं बार MCLR में कटौती की है. इस कटौती के बाद विभि​न्न मैच्योरिटी पीरियड वाले कर्ज का MCLR घटकर 7.85 फीसदी पर आ गया है.

 

बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी कटौती
एसबीआई के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी जानकारी दी है कि अलग-अलग मैच्योरिटी वाले कर्ज पर MCLR को 7.65 फीसदी से घटाकर 7.60 फीसदी कर दिया है. स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग (Stock Exchange Filling) में बैंक ने यह भी बताया है कि MCLR में इस नए रि​वीजन को 12 जनवरी 2020 से लागू भी कर दिया जाएगा. इसी के साथ इस बैंक में एक रात के लिए MCLR टेन्योर के लिए 7.65 फीसदी, एक महीने के ​लिए 7.60 फीसदी, तीन महीने के लिए 7.80 फीसदी, छह महीने के लिए 8.10 फीसदी और एक साल के ​लिए 8.25 फीसदी हो गया है.



 

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कैसे तय होता है MCLR?
मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त. जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं. बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दी जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है. MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है. इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है. निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है. साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट और टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है.

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First published: February 13, 2020, 6:31 PM IST
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