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इस बार इलाहाबादी अमरूद महंगा मिलेगा, जानिए इसकी बड़ी वजह

2006 में  इलाहाबादी सुरखा अमरूद को जीआई टैग प्रदान किया गया था.
2006 में इलाहाबादी सुरखा अमरूद को जीआई टैग प्रदान किया गया था.

प्रयागराज और कौशांबी (Prayagraj and Kaushambi) जिले में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद (Guava) की खेती होती थी. जो अब घटकर 2700 हेक्टेयर में रह गई है. इसमें इलाहाबादी अमरूद (Allahabad Guava) के रूप में प्रसिद्ध सुरखा की खेती 85-100 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 4:56 PM IST
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प्रयागराज. इस बार इलाहाबाद का मशहूर अमरूद आपको महंगा मिल सकता है. इसकी बड़ी वजह है कि अमरूद की 90 प्रतिशत से अधिक फसल को पीली मक्खी कीट ने बर्बाद कर दिया है. ऐसे में इलाहाबादी अमरूद सफेदा और सुरखा बाजार में महंगा बिकेगा. प्रयागराज के कृषि उपनिदेशक विनोद कुमार ने बताया कि पिछले दो साल से अमरूद पर कीटों का प्रकोप है, लेकिन इस बार तो 90 प्रतिशत तक फसल पीली मक्खी ने बर्बाद कर दी है.

उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले तक प्रयागराज और कौशांबी जिले में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद की खेती होती थी. जो अब घटकर 2700 हेक्टेयर में रह गई है. इसमें इलाहाबादी अमरूद के रूप में प्रसिद्ध सुरखा की खेती 85-100 हेक्टेयर क्षेत्र में होती है. सुरखा अमरूद देखने में सुर्ख लाल होता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है. आपको बता दें 2006 में इलाहाबादी सुरखा अमरूद को जीआई टैग प्रदान किया गया था.

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80 प्रतिशत आमदनी का हुआ नुकसान- सुरखा अमरूद की खेती का गढ़ कहे जाने वाले बाकराबाद गांव के किसान ने बताया कि जिस बाग में एक मौसम में 50,000 रुपये की आमदनी होती थी, उस बाग से 10,000 रुपये की भी आय होने की उम्मीद नहीं है. उन्होंने बताया कि पीली मक्खी ने अमरूद के फल में अंडे दे दिए हैं. जिससे पूरी फसल में कीड़े लग गए और पेड़ों पर 5 प्रतिशत भी फसल खाने लायक नहीं रही. नवंबर से लेकर जनवरी तक आमतौर पर एक बाग से 10,000-15,000 पेटी अमरूद निकलता था. लेकिन आज स्थिति यह है कि 100-150 पेटी भी अमरूद नहीं निकल रहा है.
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प्रशासन ने नहीं की कोई मदद- बाकराबाद गांव के किसानों के मुताबिक उन्होंने जिलाधिकारी, उद्यान अधिकारी, कृषि रक्षा अधिकारी से बात की, लेकिन अधिकारियों ने इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया. बाकराबाद में 500 बीघे में लाल अमरूद की खेती होती है. ऐसे मेंपूरी फसल चौपट हो चुकी है.
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