कभी नौकरी पर रखने से मना कर देती थी कंपनियां! फिर ऐसे बने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी के बॉस

कभी नौकरी पर रखने से मना कर देती थी कंपनियां! फिर ऐसे बने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी के बॉस
ए एम नाईक

लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने BSE को जानकारी दी है कि नाईक का मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है. इसके साथ ही कंपनी बोर्ड ने दीप किशोर सेन के पूर्णकालिक निदेशक पद पर कार्यकाल के विस्तार की मंजूरी दे दी है.

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नई दिल्ली. इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के निदेशक मंडल ने ए एम नाईक (Anil Manibhai Naik) को और तीन साल के लिए कंपनी के गैर-कार्यकारी चेयरमैन पद पर नियुक्ति को मंजूरी दी है. उनका तीन साल का नया कार्यकाल एक अक्टूबर, 2020 से शुरू होगा.

दीप किशोर सेन बने रहेंगे पूर्णालिक निदेशक
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा है कि नाईक का मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है. इसके साथ ही कंपनी बोर्ड ने दीप किशोर सेन के पूर्णकालिक निदेशक पद पर कार्यकाल के विस्तार की मंजूरी दे दी है.

निदेशक मंडल ने लिया फैसला



L&T ने बयान में कहा कि उसके निदेशक मंडल की पांच जून को हुई बैठक में नामांकन एवं पारितोषिक समिति की सिफारिशों के आधार पर इन नियुक्तियों को मंजूरी दी. इसके लिए अब कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.



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2023 तक बढ़ा कार्यकाल
नाईक को एक अक्टूबर, 2020 से 30 सितंबर, 2023 तक फिर से कंपनी का गैर-कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया है. सेन की पूर्णकालिक निदेशक पद पर नियुक्ति एक अक्टूबर, 2020 से सात अप्रैल, 2023 तक बढ़ाई गई है. नाईक के नेतृत्व में कंपनी चुनौतियों से उबरते हुए और मजबूत हुई है. समूह ने कहा कि मीडिया सर्वे में नाईक को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले दिग्गजों में शामिल किया गया है.

1965 में L&T से जुड़े थे नाईक
नाईक 1965 में कंपनी से कनिष्ठ इंजीनियर के रूप में जुड़े थे. वह महाप्रबंधक से प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर पहुंचे. 29 दिसंबर, 2003 को उन्हें कंपनी का चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया. वह 2012 से 2017 तक समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद पर है. अक्टूबर, 2017 में उन्होंने कार्यकारी जिम्मेदारियों को छोड़ दिया और उन्हें समूह का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया.

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670 रुपये प्रति महीने था पहला वेतन
अनिल मनिभाई नाईक ने जब पहली बार एलएंडटी में नौकरी के लिये आवेदन किया था, तब उन्हें यहां नौकरी नहीं मिली थी. गुजरात के बिड़ला विश्वकर्मा माहविद्यालय से ग्रेजुएट के बाद उन्होंने L&T में नौकरी के लिये आवेदन किया है, लेकिन एलएंडटी उस समय IIT के स्टूडेंट्स को अधिक वरीयता देती थी. इसके बाद नाईक ने नेस्टर बॉयलर्स में नौकरी शुरू की. एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि एक विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने अगली नौकरी के लिए आवेदन ​आया है. यहां उन्हें ​कनिष्ठ इंजीनियर की नौकरी मिली. एलएंडटी में नाईक ने जब 15 मार्च 1965 में नौकरी शुरू की, तब उनका वेतन 670 रुपये प्रति महीने था.

(भाषा इनपुट के साथ)

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