Vodafone-Idea के लिए Amazon का ये कदम बन सकता है संजीवनी, जानिए क्या है प्लान

Vodafone-Idea के लिए Amazon का ये कदम बन सकता है संजीवनी, जानिए क्या है प्लान
वोडाफोन आइडिया को लगातार हो रहा है घाटा

वोडाफोन आइडिया को भारी घाटे का सामना करना पड़ा है. जून तिमाही में कंपनी का घाटा बढ़ कर 25,460 करोड़ रुपये हो गया है. मार्च तिमाही में इसका घाटा 11,643करोड़ रुपये था. ऐसे में कंपनी की मदद के लिए लिए अमेजन और वेरिज़ोन साथ देने की तैयारी कर रही है. आइए जानें पूरा मामला

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2020, 9:08 AM IST
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मुंबई. अमेरिका की दो बड़ी कंपनी Amazon.com और Verizon Communications वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीद सकती है. मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक, ये डील 400 करोड़ डॉलर यानी 29600 करोड़ रुपये में हो सकती है. आपको बता दें कि वोडाफोन आइडिया को भारत में लगातार भारी घाटा हो रहा है. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का घाटा बढ़ कर 25,460 करोड़ रुपये हो गया है. मार्च तिमाही में इसका घाटा 11,643 करोड़ रुपये था.

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक,  वोडाफोन-आइडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने को लेकर Amazon.com और Verizon Communications की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पर सुप्रीम कोर्ट के एजीआर को लेकर फैसले के चलते इस पर बातचीत पर ब्रेक लग गया था. हालांकि, अब फिर से डील पर बातचीत शुरू हो गई है.

क्यों बढ़ रहा है वोडाफोन-आइडिया का घाटा-कंपनी पर लॉकडाउन का असर पड़ा है. स्टोर या दुकानों पर रिचार्जिंग में कमी आई है. इसके साथ लोगों की कमाई घटने की वजह से रिचार्जिंग पर असर पड़ा है. टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर का भारी दबाव है. वोडाफोन आइडिया ने हाल में कहा था अगर सरकार एजीआर वसूलने पर अड़ी रही तो उसे अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा.



सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर भुगतान के लिए दिए 10 साल-सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर के मुद्दे पर टेलीकॉम कंपनियों को बकाया राशि चुकाने के लिए 10 साल दिए हैं. सरकार तो 20 साल भी देने को तैयार थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रुख देखते हुए कंपनियों ने 15 साल मांगे थे. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने न सरकार की सुनी और न ही कंपनियों की और 10 साल में बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दे दिया. भले ही एजीआर एक जटिल मुद्दा है, आगे चलकर इसका खामिजाया हम ग्राहकों को ही भुगतना पड़ेगा.
एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू. यह सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के बीच का फी-शेयरिंग मॉडल है. 1999 में इसे फिक्स लाइसेंस फी मॉडल से रेवेन्यू शेयरिंग फी मॉडल बनाया था. टेलीकॉम कंपनियों को अपनी कुल कमाई का एक हिस्सा सरकार के साथ शेयर करना होता है.



सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों पर 1.69 लाख करोड़ रुपए की वसूली निकली थी. इसमें भी 26 हजार करोड़ रुपए दूरसंचार विभाग को मिल गए हैं. मार्च 2020 में एयरटेल पर करीब 26 हजार करोड़ रुपए बकाया है.

वोडाफोन-आइडिया पर 55 हजार करोड़ और टाटा टेलीसर्विसेस पर करीब 13 हजार करोड़ रुपए बकाया है. जियो पर 195 करोड़ रुपए वसूली निकली थी, अब कुछ बकाया नहीं है.
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