फ्यूचर रिटेल केस में कोर्ट को जानबूझकर भ्रमित कर रहा अमेजन: हरीश साल्वे

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अमेजन-फ्यूचर रिटेल मामले में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे (Harish Salve) ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अपना तर्क रखा. इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में साल्वे ने अमेजन के दावों को तर्क और तथ्यों के साथ खारिज किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:43 PM IST
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नई दिल्ली. वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे (Harish Salve) ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि अमेजन (Amazon) ने कोर्ट को भ्रमित करने के लिए फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) को जानबूझकर गलत रोशनी में पेश किया है. फ्यूचर रिटेल-अमेजन केस की सुनवाई के दौरान साल्वे ने अपने जवाब में यह बात कही. साल्वे ने कई ऐसी बातों और तथ्यों को कोर्ट के सामने रखा, जिससे स्थापित हो सके कि अमेजन अब फ्यूचर रिटेल के मौजूदा संकट से उबरने के प्रयासों को कमजोर कर रहा है.

साल्वे ने कोर्ट में कहा कि इमरजेंसी मध्यस्थ अंतरिम अवॉर्ड (Emergency Arbitration Interim Award) की आड़ में प्राधिकरणों को विभिन्न तरह का लेटर लिखना अपने आप में यह सिद्ध करता है कि उसने यह कार्रवाई क्यों की है. साल्वे ने कोर्ट में तर्क दिया कि ऐसी ​परिस्थिति में, फ्यूचर रिटेल आदेशानुसार राहत प्राप्त करने का हकदार है.

रिलायंस के साथ लेनदेन से पहले डीमर्जर का प्लान
रिलायंस के साथ लेनदेन की बात है तो इसके लिए एक स्कीम है, जिसमें प्रस्ताव है कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की कुछ ईकाईयों का डीमर्जर किया जाएगा. रिलायंस को बेचने से पहले इस काम को किया जाएगा. इसके बाद ही इस डील के बारे में विस्तृत जानकारी देना पर्याप्त होगा. फिलहाल इसके लिए कोई बहस करने की जरूरत नहीं दिख रही.
एफडीआई के जरिए अमेजन ने निवेश नहीं किया


यह अमेजन का अपना मामला है, जहां वो FRL के साथ लेनदेन में एक पार्टी है और यह FCPL SHA का उल्लंघन है. इसके लिए उनके पास गैर-कानूनी मध्यस्थता शुरू करने का अधिकार है. अमेजन के लिए FPI/FDI नीतियों को लेकर साल्वे ने तर्क दिया कि सबसे पहली बात तो यह है कि अमेजन ने FPI/FDI के जरिए निवेश का रास्ता नहीं चुना था. FPI के जरिए निवेश पैसिव निवेशकों से संबंधित है.

अमेजन के पास नहीं है ​फैसले लेने का अधिकार
फ्यूचर रिटेल में FDI का मतलब है कि इसके लिए सरकार से मंजूरी ली जाये. चूंकि, FRL का संबंध MBRT से है, इसलिए इसमें 10 फीसदी तक ही FDI की अनुमति है. अब FRL में अमेजन द्वारा माइनॉरिटी राइट्स यानी 5 फीसदी से कम निवेश का दावा मान भी लिया जाये तो वह किसी भी तरीके से कंपनी के फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकती है. इसमें वोटिंग राइट्स भी शामिल है, जोकि बहुमत वाले शेयरधारकों के पास ही होता है.

दूसरी बात यह है कि FRL में अमेजन शेयरधारक नहीं है. लेकिन, अब वो प्रोमोटर/शेयरधारक से ज्यादा अधिकार का दावा करती है. FCPL के जरिए अमेजन का फैसला उसका अपना स्वैच्छिक फैसला था.



FRL को दिवालिया प्रक्रिया में धकेलना चाहती है अमेजन
साल्वे ने कहा कि अमेजन का यह दावा उसके निहित स्वार्थ के लिए है. वह ​कथित रूप से अपने निवेश को सुरक्षित करना चाहती है, लेकिन पूरी प्रक्रिया का मकसद है कि FRL को दिवालिया प्रक्रिया में धकेल दिया जाए.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के सामने FCPL SHA को लेकर अमेजन के प्रतिनिधित्व पर साल्वे ने कहा कि यह अमेजन के दावे के बिल्कुल उलट है. FCPL SHA का खण्ड 15.17 पूरी तरह से स्पष्ट करता है कि अमेजन ने FRL में निवेश नहीं किया है. वो FRL में कोई नियंत्रण नहीं चाहती है. यह सच नहीं है. यह केवल नियामकों को ट्रिक करने के लिए महज एक छल है. CCI के सामने अमेजन के प्रतिनिधि ने खुद इसका सपोर्ट किया है. उन्हें स्पष्ट्र रूप से दावा किया है कि उन्होंने FCPL में निवेश किया है. FCPL लॉयल्टी कार्ड्स आदि का काम करती है.

FRL SHA और FCPL SHA में स्वतंत्र स्टेटस की बात है तो व्यक्तिगत स्तर पर भी FRL ने इस लिस्ट को रिव्यू करने और इसपर फैसले लेने का अधिकार अपने पास रखा है. सालाना आधार पर FCPL के साथ इसपर स​हमति बनती है. रिलायंस के साथ लेनदेन का फैसला FRL ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर लिया है. FCPL ने इसपर सहमति भी जताई है. साल्वे ने यह भी कहा कि अगर FCPL के साथ अमेजन सहमत भी नहीं होता है तो वह FCPL के सामने ही राहत की मांग करता है.


(डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)


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