फ्यूचर रिटेल ने कोर्ट से कहा- अमेजन शेयरधारक नहीं है, कंपनी के मामले में दखल नहीं दे सकती

सांकेतिक तस्वीर
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सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) ने बीते 25 अक्टूबर को अमेजन के पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें FRL द्वारा अपनी संपत्ति या सिक्योरिटीज के जरिए किसी भी पार्टी से फंडिंग पर रोक लगा दी गई थी. अब FRL ने कहा है कि अमेजन उसकी शेयरधारक नहीं है.

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नई दिल्ली. किशोर बियानी (Kishore Biyani) की अगुवाई वाली फ्युचर रिटेल लिमिटेड (FRL) ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि अमेजन उसकी शेयरधारक नहीं है और सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) द्वारा जारी किए गए आदेश की कोई वैल्यू नहीं है. बता दें कि अमेजन ने FRL पर कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन करने का अरोप लगाते हुए मामले को आपातकालीन मध्यस्थता (Emergency Arbitration) की मांग की है. इसके बाद से दोनों कंपनियों के बीच लड़ाई चल रही है. SIAC ने बीते 25 अक्टूबर को अमेजन के पक्ष में एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें FRL द्वारा अपनी संपत्ति या सिक्योरिटीज के जरिए किसी भी पार्टी से फंडिंग पर रोक लगा दी गई थी.

इसके बाद अमेजन ने बाजार नियामक SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को इस संबंध में एक लेटर भी लिखा. अमेजन ने इन सभी से SIAC के आदेश पर ध्यान देने को कहा था. न्यायधीश मुक्ता गुप्ता को वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे (Harish Salve) ने बताया कि आपातकालीन मध्यस्थता के आदेश की कोई वैल्यू नहीं और न ही कानून में इसकी कोई प्रभावोत्पादकता नहीं है. हरीश साल्वे इस केस में FRL का पक्ष रख रहे हैं.

साल्वे ने क्या कहा?
साल्वे ने कहा, 'मैं इसे नज़रअंदाज करने के लिए हकदार हूं. मैं भारतीय अदालतों के अधीन हूं. अगर कोई व्यक्कित सिंगापुर में बैठे हुए कुछ कहे तो मैं उस आदेश को नकार सकता हूं. यह किसी तरह का अनादर व्य​क्त करने के लिए नहीं है. मैं इसे कानून के नज़रिए से कह रहा हूं.'
उन्होंने कहा, अमेजन के पास केवल फ्यूचर कूपन्स लिमिटेड (FCL) में ही शेयर है, जोकि खुद फ्यूचर रिटेल में एक शेयरधारक है और इस प्रकार वो FRL के मामले में कुछ कहने का अधिकार नहीं रखती है.



साल्वे ने कहा कि अमेजन तो FRL में अल्पसंख्यक शेयरधारक भी नहीं है. ऐसे में उसे कैसे कोई भी अधिकार दिया जाए. उन्होंने आगे कहा कि FRL में एक भी शेयर नहीं रखने के बाद अमेजन अल्पसंख्यक शेयरधारकों को दिए जाने वाले अधिकार की मांग कर रही है.

उन्होंने कहा, '...हजारों लोगों की नौकरी चली जाए, FRL दिवालिया हो जाए लेकिन इस महान अमेरिकी कंपनी को परेशानी न हो! आप अमेजन द्वारा निवेश की रकम और रिलायंस द्वारा ऑफर की गई रकम की तुलना करें. FRL को दिवालिया होने से बचाने के लिए इतनी बड़ी रकम की ही आवश्यकता है.'

19 नवंबर को भी अपनी बात रखेगी एफआरएल
FRL की तरफ से इस मामले पर 19 नवंबर को भी अपनी बात रखी जाएगी. कोर्ट ने अमेजन, FCL और रिलायंस रिटेल लिमिटेड (RRL) को समन भेजकर कहा है कि वो 30 दिन के अंदर लिखित जवाब दें.

10 नवंबर को कोर्ट ने अमेजन से FRL की याचिका पर जवाब मांगा था. FRL ने कोर्ट से कहा कि यह ई-कॉमर्स कंपनी रिलायंस रिटेल के साथ उसके 24,713 करोड़ रुपये की डील के आड़े आ रही है. इसके पीछे उसका तर्क बस यह है कि उसके पास सिंगापुर मध्यस्थता का एक अंतरिम आदेश है.



अमेजन की बात मानने पर एफडीआई कानून का उल्लंघन होगा
एफसीएल और उसके प्रोमोटर्स ने भी FRL के दावों का समर्थन किया है. FRL, FCL और रिलायंस रिटेल - तीनों का कहना है कि अगर FCL के जरिए FRL में निवेश करने का अमेजन का दावा मान लिया जाता है तो इससे भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कानून (Foreign Direct Investment Law) का उल्लंघन होगा. इसके कानून के तहत भारत के किसी मल्टी ब्रांड रिटेल सेक्टर में कोई विदेशी कंपनी अधिकतम 10 फीसदी तक ही निवेश कर सकती है.

अमेजन के वकील ने क्या कहा?
वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमणियम (Gopal Subramaium) ने अमेजन की तरफ से अपनी दलील रखते हुए FRL के तर्क का विरोध किया. उन्होंने कहा कि आज पेश की गई सभी तर्क व दलीलें EA के समक्ष भी पेश की गईं थी, जहां इनपर विचार करके खारिज कर दिया गया.

उन्होंने कहा कि FRL फ्युचर ग्रुप की एक कंपनी है और इसपर FCL और अमेजन के बीच मध्यस्थता सहमति लागू होती है. सुब्रमणियम ने आगे कहा कि एफआरएल में एफसीएल का 9.82 फीसदी हिस्सेदारी है. चूंकिं, अमेजन के पास FCL में 49 फीसदी की हिस्सेदारी है और इस प्रकार उसके पास 9.82 फीसदी का आधी हिस्सेदारी उसके पक्ष में होनी चाहिए.

इसी साल अगस्त में, फ्यूचर ग्रुप ने अपनी रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग यूनिट्स को रिलायंस के हाथों बेचने का ऐलान किया था. SIAC की अंतरिम आदेश के अनुसार, 90 दिनों के अंदर 3 सदस्यीय मध्यस्थता पैनल बनाना होगा. इसमें अमेजन और फ्यूचर ग्रुप के एक जज और एक न्यूट्रल जज होंगे. 10 नवंबर को अमेजन ने कोर्ट में जानकारी दी कि उसने और एफसीएल ने अपने-अपने मध्यस्थ को चुन लिया है.

(डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)
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