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अर्थशास्त्रियों का अनुमान, फेड रिजर्व 1.5 फीसदी तक बढ़ा सकता है ब्याज दर, जानें भारत पर क्या होगा असर

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अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व मई और जून में बैक-टू-बैक दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिका में अभी म ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले हफ्ते मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए भले ही कर्ज के ब्याज की दरों में बढ़ोतरी न की हो लेकिन ऐसा लंबे समय तक करना उसके लिए संभव नहीं है. रिजर्व बैंक ने कर्ज महंगा न करने के पीछे सबसे बड़ी वजह इकोनॉमी को मजबूती देना बताई थी. सस्ते कर्ज का दौर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2022 के बाद खत्म हो सकता है क्योंकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज की दरों में बढ़ोतरी कर सकता है.

अमेरिकी  फेडरल रिजर्व मई और जून में बैक-टू-बैक दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिका में अभी महंगाई 40 साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है. इसे नियंत्रित करने के लिए फेड रिजर्व कर्ज के ब्याज दरों को बढ़ा सकता है. रॉयटर्स द्वारा किए गए एक सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने यह आशंका जताई है. फेडरल रिजर्व के गवर्नर मिशेल बाउमैन (Michelle Bowman) भी पहले ही इस बात के संकेत दे चुके हैं ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी संभव है.

ब्याज दरें बढ़ाने का यह सही समय- इकोनॉमिस्ट
सर्वे में उन्होंने कहा है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर इस समय रिकॉर्ड निचले स्तर पर है जबकि महंगाई चार दशकों में सबसे अधिक है. कमोडिटी की ग्लोबल कीमतों में भी लगातार उछाल जारी है. ऐसे में महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए फेड को तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है. अर्थशास्त्रियों को आशंका है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में 1.25 फीसदी से 1.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इस सर्वे में 100 से अधिक अर्थशास्त्रियों को शामिल किया गया था.

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अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने का असर भारत सहित दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ेगा. मई-जून में अगर बैक-टू-बैक वृद्धि होती है तो भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा आइए यहां समझते हैं-

भारत में कर्ज होगा महंगा
फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर भी रेपो रेट बढ़ाने का दबाव बन जाएगा. इसके अमेरिका और भारत के बॉन्ड के बीच अंतर कम हो जाएगा और विदेशी निवेशक भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों से पैसा निकालने लगेंगे. विदेशी निवेशकों की बिकवाली रोकने के लिए आरबीआई को भी ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ेगी. आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाने पर सरकारी व निजी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और लोन पर ब्याज दरें बढ़ाएंगे. इसका सीधा असर ग्राहकों पर होगा और उन्हें सभी तरह का कर्ज महंगा मिलेगा.

महंगाई और भड़केगी
फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने से भारत में महंगाई और भड़क सकती है. इससे डॉलर मजबूत होगा और रुपया कमजोर पड़ जाएगा. रुपया कमजोर होने पर केंद्र सरकार को क्रूड ऑयल के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी. इससे पहले से महंगा पेट्रोल-डीजल और भी महंगा हो जाएगा. पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सीधे-सीधे ट्रांस्पोर्टेशन पर पड़ता है जिससे सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं.

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स्टॉक मार्केट पर भी पड़ेगा असर
फेड रिजर्व अगर ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी करता है तो यह भारतीय शेयर बाजारों पर भी असर डालेगा. पिछले कुछ वर्षों में यूएस पीई और सस्ते कर्ज के चलते उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारी निवेश देखने को मिला है. घरेलू बाजारों में विदेशी निवेशकों के भारी निवेश का एक कारण यह भी है. निवेशक वहां से सस्ता कर्ज लेते हैं और यहां निवेश करते थे. ब्याज दरें बढ़ने से इस निवेश को झटका लगेगा और बिकवाली बढ़ सकती है.

Tags: Bank interest rate, Bank Loan, Federal Reserve meeting, RBI

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