अमेरिका ने 44 साल पुरानी इस स्कीम से भारत को हटाया, जानें पूरा मामला

अमेरिका ने भारत को 44 साल पहले मिला कारोबारी वरीयता का दर्जा वापस ले लिया है. भारत को मिलने वाला प्रेफरेंशियल ट्रेड का दर्जा 5 जून से खत्म हो जाएगा.

News18Hindi
Updated: June 2, 2019, 2:04 PM IST
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Updated: June 2, 2019, 2:04 PM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को बड़ा झटका दिया है. अमेरिका ने भारत को 44 साल पहले मिला कारोबारी वरीयता का दर्जा वापस ले लिया है. भारत को मिलने वाला प्रेफरेंशियल ट्रेड का दर्जा 5 जून से खत्म हो जाएगा. इससे करीब 570 करोड़ डॉलर के एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा. दरअसल, जनरल सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस प्रोग्राम (GSP) के तहत अमेरिका एक्सपोर्ट होने वाले प्रोडक्ट्स पर कोई ड्यूटी नहीं लगती थी लेकिन प्रेफरेंशियल ट्रेड स्टेटस खत्म होने के बाद अब करीब 2,000 प्रोडक्ट्स ड्यूटी के दायरे में आ जाएंगे.

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इन सेक्टर्स पर होगा असर
इससे सबसे ज्यादा असर ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ने की आशंका है. डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार तक समान और तर्कपूर्ण पहुंच देने का आश्वासन नहीं दिया है. इसी वजह से उन्होंने प्रेफरेंशियल टैरिफ खत्म करने का फैसला लिया है. ये फैसला मई के पहले हफ्ते में ही लागू होने वाला था लेकिन फिर ट्रंप प्रशासन ने भारत में नई सरकार के आने तक के लिए फैसले को टाल दिया और अब ये 5 जून से लागू हो जाएगा.

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क्या है GSP और क्या है निकाले जाने का नुकसान?
सामान्य तरजीही प्रणाली या Generalized System of Preferences (जीएसपी) अमेरिका की अपनी ऐसी प्रणाली है, जिसमें तय किया जाता है कि वो किस देश को व्यापार में कितनी तरजीह देगा. यह कार्यक्रम चुनिंदा देशों के हजारों उत्पादों को शुल्क से छूट देकर विकासशील देशों की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था. इसके तहत दर्जा प्राप्त देशों को हजारों सामान बिना किसी शुल्क के अमेरिका को निर्यात करने की छूट मिलती है. भारत को 2017 में जीएसपी कार्यक्रम का सबसे ज्यादा लाभ मिला था. उस साल भारत ने इसके तहत अमेरिका को 5.7 अरब डॉलर का निर्यात किया था. जीएसपी ट्रेड प्रोग्राम को विकासशील देशों को 4,800 तक उत्पादों के ड्यूटी-फ्री निर्यात की छूट देकर आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था. जीएसपी को 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत 1 जनवरी, 1976 से लागू किया था.
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क्या होगा अमेरिका के फैसले का असर?
अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत के कुछ उत्पाद अमेरिका में प्रशुल्क लगने के कारण महंगे हो जाएंगे. ऐसे में, भारत के उत्पादों की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ना स्वाभाविक है.

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