Monetary Policy: एक्सपर्ट्स का अनुमान, मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों को जस का तस रख सकता है RBI

5 फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था.

5 फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था.

आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy Review) में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को जस का तस रख सकता है. आरबीआई (RBI) 7 अप्रैल को 2021-22 के वित्त वर्ष के लिए पहली मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा.

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मुंबई. कोरोना वायरस महामारी को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच आरबीआई (RBI) द्वारा आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखे जाने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई वृद्धि को प्रोत्साहन के उपाय करने से पहले अभी कुछ समय और इंतजार करेगा.

5 फरवरी को रेपो रेट में नहीं हुआ था कोई बदलाव

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की बैठक के बाद केंद्रीय बैंक 7 अप्रैल को 2021-22 के वित्त वर्ष के लिए पहली मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy Review) की घोषणा करेगा. इससे पहले 5 फरवरी को पिछली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था.

अपने नरम रुख को जारी रखेगा आरबीआई
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक अपने नरम रुख को जारी रखेगा और किसी मौद्रिक कार्रवाई के लिए उचित अवसर का इंतजार करेगा, जिससे मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के मुख्य लक्ष्य के साथ वृद्धि को प्रोत्साहन के उपाय भी किए जा सकें.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने से कई राज्यों ने नए अंकुश लगाए हैं जिससे औद्योगिक उत्पादन में पुनरुद्धार को लेकर आशंका पैदा हो गई है. डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के वैश्विक मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि दीर्घावधि की प्राप्ति सख्त हो रही है जिससे कर्ज की लागत बढ़ी है. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में रिजर्व बैंक के समक्ष मुद्रास्फीति दबाव का प्रबंधन करने के साथ कर्ज की लागत में बढ़ोतरी को रोकने की मुश्किल चुनौती है.

मुद्रास्फीति और आर्थिक पुनरुद्धार पर रहेगी RBI की निगाह



एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि उपभोक्ता मुद्रास्फीति अभी स्थिर नहीं हो पाई है. फरवरी, 2020 से रेपो रेट में भी 1.15 फीसदी की उल्लेखनीय कटौती की गई है. ऐसे में रिजर्व बैंक संभवत: नीतिगत दरों को यथावत रखेगा. पुरी ने कहा कि केंद्रीय बैंक की निगाह मुद्रास्फीति और आर्थिक पुनरुद्धार पर रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत में महामारी का दूसरा दौर शुरू हो गया है. कई राज्यों और शहरों में आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। ऐसे में इस बात की संभावना अधिक बनती है कि रिजर्व बैंक यथास्थिति कायम रखेगा.

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यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया की अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने उम्मीद जताई कि रिजर्व बैंक निकट भविष्य के लिए तरलता को संतोषजनक स्तर पर रखेगा, जिससे सरकार के उधारी कार्यक्रम में किसी तरह की अड़चन नहीं आए. साथ ही केंद्रीय बैंक कोविड-19 के मामले बढ़ने के बीच आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने का प्रयास करेगा.

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इस बीच, आनंद राठी की रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा मुद्रास्फीति का नरम रुख हाल के समय में पलटा है, जिससे रिजर्व बैंक पर दबाव बढ़ेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य मुद्रास्फीति बढ़ने से रिजर्व बैंक के लिए मुश्किल होगी. इसके बावजूद वृद्धि की चिंता के बीच केंद्रीय बैंक नरम मौद्रिक रुख को जारी रखेगा.
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