आम्रपाली बिल्डर्स ने डुबो दिए फ्लैट खरीदारों के 2,996 करोड़ रुपए!

आम्रपाली ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने होम बायर्स से लिए गए 2,996 करोड़ रुपए मकान बनाने की जगह दूसरी जगह खर्च कर दिए.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 3:05 PM IST
आम्रपाली बिल्डर्स ने डुबो दिए फ्लैट खरीदारों के 2,996 करोड़ रुपए!
प्रतीकात्मक
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 5, 2018, 3:05 PM IST
आम्रपाली बिल्डर्स ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने माना है कि कंपनी ने फ्लैट देने के एवज में ली गई एडवांस रकम और मार्केट से उठाए गए पैसे का कुछ हिस्सा कारोबार के विस्तार में इस्तेमाल किया है. आम्रपाली ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ये रकम 2,996 करोड़ रुपए के आस-पास है. ग्रुप ने ये भी बताया है कि इस पैसे को बिजनेस के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसके नतीजे उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का काम भी अटक गया.

आम्रपाली ने क्या किया?
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद अनिल शर्मा ने जो जानकारी मुहैया कराई है, उससे पता चलता है कि आम्रपाली ग्रुप ने फ्लैट देने के नाम पर खरीदारों से जो रकम इकठ्ठा की थी, उसे कई अन्य कंपनियों के जरिए इस्तेमाल किया. कोर्ट में दाखिल आम्रपाली के हलफनामे के मुताबिक नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कंपनी के 170 से ज्यादा टावर हैं, जहां 46,000 से ज्यादा लोगों ने घर बुक कराए हैं. ग्रुप की अलग-अलग 15 कंपनियों ने इन्हीं के नाम पर फ्लैट खरीदारों से 11,573 करोड़ रुपए, जबकि मार्केट और एफडीआई से 4,040 करोड़ रुपए हासिल किए थे. इस रकम में से 10,300 करोड़ रुपए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए गए, जबकि करीब 3000 करोड़ रुपए की रकम बिजनेस विस्तार पर खर्च की गई थी. यहां आपको बता दें कि ये हिसाब-किताब साल 2015 तक का ही है.



इन 9 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में हुई हेरफेर!
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच के लिए नियुक्त किए गए फॉरेंसिक एडिटर ने शक जाहिर किया है कि आम्रपाली 200 कंपनियों के जरिए होम बायर्स के पैसे को अपने काम में इस्तेमाल कर रही थी. हालांकि आम्रपाली ने ऐसा सिर्फ 9 कंपनियों के संदर्भ में स्वीकार करते हुए इनकी लिस्ट सौंपी है. इस लिस्ट में स्मार्ट सिटी देव, सेंचुरियन पार्क, ड्रीम वैली, लेजर वैली, सिलिकन वैली और जोडियक देव का नाम शामिल है.

फॉरेंसिक एडिटर का काम कर रहे रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल के मुताबिक आम्रपाली ग्रुप फ्लैट खरीदारों से जो पैसा ले रहा था, उसे अपनी अन्य कंपनियों या रिश्तेदारों की कंपनियों में कंस्ट्रक्शन के काम से इतर भी इन्वेस्ट कर रहा था. इस दौरान कई शेल कंपनियों का भी पता चला है, जिनकी जांच की जा रही है. इनमें से एक कंपनी के नाम पर आम्रपाली ने 1040 करोड़ रुपए खरीदारों से लिए, लेकिन मकान बनाने की जगह 600 करोड़ रुपए दूसरी जगह इन्वेस्ट कर दिए.
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क्या कह रहा है आम्रपाली ग्रुप
सीएमडी अनिल शर्मा ने कोर्ट को दिए अपने एफिडेविट में माना है कि लोन के रूप में या फिर बिजनेस के विस्तार के लिए कुछ पैसे इन्वेस्ट किए गए थे, लेकिन उनकी रिकवरी होती रही है. इस तरह के सभी ट्रांजेक्शन बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स, सीएफओ और स्टेच्युटेरी ऑडिटर की जानकारी के बिना नहीं किए गए हैं. ग्रुप का दावा है कि शॉपिंग मॉल, पार्किंग, रिसॉर्ट, कंस्ट्रक्शन और अन्य कामों पर 5980 करोड़ रुपए खर्च किया गया है, जबकि 667 करोड़ रुपए की रकम कॉन्ट्रैक्टर्स को चुकानी बाकी है.
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