Amrapali मामले में बड़ा खुलासा, घर खरीदारों के पैसों से खरीदा था करोड़ों का सोना

आम्रपाली ग्रुप ने नोएडा के एक ज्वैलर याशिका डायमंड (Yashika Diamonds) से 5.88 करोड़ रुपये की कीमत के सोने के बिस्किट (Gold Bars) खरीदे थे.

News18Hindi
Updated: July 26, 2019, 9:45 AM IST
Amrapali मामले में बड़ा खुलासा, घर खरीदारों के पैसों से खरीदा था करोड़ों का सोना
Amrapali का बड़ा खुलासा
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Updated: July 26, 2019, 9:45 AM IST
आम्रपाली ग्रुप (Amrapali Group) में एक और घोटाला सामने आया है. आम्रपाली ग्रुप ने नोएडा के एक ज्वैलर याशिका डायमंड (Yashika Diamonds) से 5.88 करोड़ रुपये की कीमत के सोने के बिस्किट (Gold Bars) खरीदे थे. ग्रुप ने ये सोने के बिस्किट निजी इस्तेमाल के लिए खरीदे थे, लेकिन बहीखाते में इसे त्योहारी खर्च के तौर पर दिखाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये पैसे कंपनी के मैनेजमेंट से रिकवर किए जाएं.

ग्रुप की सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होगा रद
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को ग्रुप के केस में सुनवाई करते हुए ग्रुप की सभी कंपनियों के RERA रजिस्ट्रेशन को रद करने का आदेश दिया था. कोर्ट का कहना था कि ग्रुप ने होमबायर्स के साथ धोखाधड़ी की है. कोर्ट ने सरकारी नेशनल बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को इन अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का आदेश दिया. कोर्ट के इस आदेश से 40,000 होमबायर्स को मदद मिलेगी.

2002 में बनी है याशिका डायमंड्स

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में हुए रजिस्ट्रेशन के मुताबिक नोएडा के याशिका डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर विनय गर्ग, हिमांशु गर्ग, रजनी गर्ग और यश गर्ग हैं. ये कंपनी 20 मार्च, 2002 को बनाई गई थी. पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी के मुताबिक इसका ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल 30,000,000 है, वहीं पेड अप कैपिटल 27,429,500 है.



मैनेजमेंट से रिकवर की जाए गोल्ड बार्स की कीमत
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फॉरेंसिक ऑडिट में गोल्ड बार्स की खरीदारी की बात सामने आने पर कोर्ट ने कहा कि ये खरीदारी बिजनेस ट्रांजैक्शन से ज्यादा निजी इस्तेमाल के लिए की गई लगती है इसलिए इसकी कीमत कंपनी के मैनेजमेंट से रिकवर की जानी चाहिए.

कोर्ट के ऑर्डर पर हुई फोरेंसिक रिपोर्ट में पाया गया है कि ये रियल एस्टेट कंपनी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए फंड्स को डमी कंपनीज, फेक बिल्स और अपार्टमेंट्स के दाम गिराकर डायवर्ट कर रही थी. कोर्ट के 270 पेजों के आदेश में ये भी कहा गया है कि 2015-16 के दौरान, जब अभी सुप्रीम कोर्ट में केस चल ही रहा था, तभी ग्रुप ने आपराधिक मंशा के साथ संपत्तियों का हस्तांतरण शुरू कर दिया था. ग्रुप के फंड को एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर किया जा रहा था और प्रॉपर्टीज की बेनामी रजिस्ट्री कराई जा रही थी.

कोर्ट के आदेश में प्रॉपर्टीज को A, B और C कैटेगरी में बांटकर लिस्ट बनाई गई है. A कैटेगरी की प्रॉपर्टीज को होमबायर्स के पैसे चुकाने के लिए बेचा जाएगा. B कैटेगरी की संपत्तियां जब्त रहेंगी और C कैटेगरीज की संपत्तियों को रिलीज कर दिया जाएगा.

(सोर्स- मनीकंट्रोल डॉट कॉम)

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First published: July 26, 2019, 9:30 AM IST
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