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भारत में चीन विरोधी माहौल ने चाइनीज बिजनेस की तोड़ी कमर, मोदी सरकार ने दिया बड़ा सबूत

मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर चीन को दिया बड़ा झटका

मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर चीन को दिया बड़ा झटका

कोरोना और एलएसी पर बढ़ती टेंशन से चीन का कितना हुआ नुकसान? विस्तार से पढ़िए कैसे टूट रही है चाइना की कमर

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. चीन (China) की चालबाजियों की वजह से पहले ही भारत (India) में उसके खिलाफ धारणा बननी शुरू हो गई थी. लेकिन उसे बल मिला कोरोना वायरस के फैले संक्रमण से. बॉर्डर विवाद (Border Dispute) ने भारत में चीन के खिलाफ गुस्सा और बढ़ा दिया. लोग तेजी से गैर जरूरी चाइनीज चीजों को छोड़ रहे हैं. ताकि उसे आर्थिक तौर पर चोट पहुंच सके. बिजनेस के आंकड़ों में इस माहौल का चीन पर साफ तौर पर नकारात्मक असर पड़ता नजर आ रहा है. पिछले तीन साल से चाइनीज सामान का इंपोर्ट हमने लगातार घटाया है, जिसमें इस साल काफी तेजी आ गई है.

स्वदेशी जागरण मंच सहित कई संगठन लगातार चाइनीज सामान का विरोध (Boycotts of Chinese products) कर रहे हैं. एलएसी (LAC) पर 20 जवानों की शहादत के बाद भारत में उसके खिलाफ लगातार गुस्सा बढ़ रहा है. जनता उसे सबक सिखाने के लिए गैर जरूरी चीजों की खरीदारी कम करके उसकी आर्थिक कमर तोड़ रही है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत ने अप्रैल से जुलाई 2019 में 23.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंपोर्ट किया था. जबकि 2020 में इसी अवधि की बात करें तो यह घटकर सिर्फ 16.60 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया है. दिलचस्प बात है कि हमने चीन को एक्सपोर्ट बढ़ाया है, इससे हमारा व्यापार घाटा पहले से कम हुआ है.

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भारत से क्या-क्या मंगाता है चीन?


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कितना घटा इंपोर्ट?

>>डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ कॅमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टेटिक्स (DGCIS) के मुताबिक 2017-18 में भारत ने 76.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं का चीन से इंपोर्ट किया.

>> साल 2018‐19  हमने चीन पर निभर्रता थोड़ी कम की. यह 70.31 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया. चीन के खिलाफ गुस्सा कायम रहा और 2019-20 में यह घटकर 65.26 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर आ गया.

>>इस साल अप्रैल से जुलाई 2020 की तिमाही में हमने वहां से महज 16.60 बिलियन अमेरिकी डॉलर की चीजें मंगाईं. जबकि हमने इसी दौरान पिछले साल यानी 2019 में 23.45 बिलियन डॉलर के सामान का इंपोर्ट किया था.

भारत से चीन को कितना बढ़ा एक्सपोर्ट?

>>एक तरफ हम चीन से इंपोर्ट कम कर रहे हैं तो दूसरी ओर उसको एक्सपोर्ट बढ़ा रहे हैं. DGCIS के मुताबिक 2017-18 में हमने चीन को 13.33 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एक्सपोर्ट किया था.

>>2019-20 में चीन को भारतीय सामान का एक्सपोर्ट 16.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो गया है.

>>इस साल पहली तिमाही यानी से अप्रैल से जुलाई 2020 के बीच भारत ने चीन को 7.27 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया. जो 2019 में इसी दौरान महज 5.57 बिलियन डॉलर था.

इस मामले में हम चीन पर निर्भर हैं

>>दूरसंचार उपकरण, कंप्यूटर हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और दवाओं के रॉ मैटीरियल को लेकर हमारी निर्भरता चीन पर सबसे ज्यादा है. इसके अलावा डेयरी मशीनरी, बिजली के सामान, खाद, कीटनाशक, एसी, रेफ्रिजरेटर और ऑटो कंपोनेंट मंगाने में भी हम काफी पैसा चीन को देते हैं.

चीन भारत से क्या मंगाता है?

>>चीन हमसे लौह अयस्क, पेट्रोलियम उत्पाद, जैविक रसायन, समुद्री उत्पाद, सूती धागा, तांबा एवं तांबे से बने उत्पाद, मसाले, ग्रेनाइट, पत्थर और अरंडी का तेल आदि खरीदता है.

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क्या मोदी सरकार की नीतियों से कम हुआ चीन से आयात?


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घटते आयात पर विशेषज्ञ ने कही बड़ी बात

इंडिया-चाइना इकोनॉमिक कल्चरल काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल प्रोफेसर मो. साकिब कहते हैं कि चीन से इंपोर्ट कम होने के पीछे मोदी सरकार की नीतियां और बॉर्डर पर बढ़ रही टेंशन प्रमुख है. सरकार का माइंडसेट चीन पर निर्भरता कम करने की है. लेकिन, इंपोर्ट कम होने की एक और भी वजह हो सकती है. वो वजह है भारत में इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic slowdown) की. जिसकी वजह से लोगों की परचेज पावर कम हो गई है. इसलिए हम सामान कम बना रहे हैं. हम चीन से कंपोनेंट मंगाते हैं और उसे असेंबल करके फाइनल प्रोडक्ट बेचते हैं.

जहां तक चाइना को हमारा एक्सपोर्ट बढ़ने का मामला है तो यह बढ़ना ही चाहिए. यह देश के लिए अच्छी बात है. चाइनीज लोग इकोनॉमिक्स पर इमोशन को प्राथमिकता नहीं देते. बिजनेस में भावनाओं से ऊपर उठकर काम करते हैं. वो बस इकोनॉमिकली पावरफुल होना चाहते हैं.

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