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बैंक लॉकर में कीमती सामान रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, कभी नहीं पड़ेगा आपको पछताना

Bank locker
Bank locker

Are bank lockers safe: ज्यादातर बैंकों के ब्रांच (bank branches) आपको ज्वेलरी या अन्य महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स जैसे कीमती सामानों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित जमा लॉकर (safe deposit lockers) की सुविधा देती हैं. बैंकिंग व्यवस्था में यह लॉकर (Locker) एक ऐसी सुविधा है, जिसका इस्तेमाल अमूमन मध्यम वर्गीय परिवार करते ही हैं. अधिकतर लोग घर के बजाय बैंक के लॉकर में अपना कीमती सामान रखना पसंद करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 5:45 AM IST
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नई दिल्ली. हम में से अधिकतर लोग घर के बजाय बैंक के लॉकर में अपना कीमती सामान रखना पसंद करते हैं. ज्यादातर बैंकों के ब्रांच (bank branches) आपको ज्वेलरी या अन्य महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स जैसे कीमती सामानों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित जमा लॉकर (safe deposit lockers)की सुविधा देती हैं. बैंकिंग व्यवस्था में यह लॉकर (Locker) एक ऐसी सुविधा है, जिसका इस्तेमाल अमूमन मध्यम वर्गीय परिवार करते ही हैं. कई लोग अपनी कीमती चीजों जैसे ज्‍वेलरी, डॉक्‍युमेंट्स को सुरक्षित रखने के लिए बैंक में लॉकर (Bank locker) लेते हैं. अगर आपको भी Bank locker लेना है, या आपने पहले से ले रखा है तो आपको यह बात जरूर जान लेनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई परेशानी ना हो.

सरकारी और प्राइवेट बैंकों में मिलती है सुविधा
सरकारी और प्राइवेट दोनों बैंक ग्राहकों को लॉकर की सुविधा देते हैं. लॉकर खुलवाने से पहले बेहतर होगा कि आप खुद बैंक की उस ब्रांच में जाए, जहां आपका सेविंग्स अकाउंट है. हालांकि, बैंक की किसी भी ब्रांच से संपर्क किया जा सकता है. लॉकर की संख्या सीमित होने के चलते बैंक आसानी से लॉकर अकाउंट नहीं खोलते. कई बैंक तो सीधे मना कर देते हैं. कुछ वेटिंग पीरियड के बारे में बताते हैं, और यह ज्यादातर सरकारी बैंकों में होता है.
किसे मिल सकती है लॉकर सुविधा?
आमतौर पर बैंक अपने वर्तमान ग्राहकों को लॉकर सुविधा देता है लेकिन आप अगर सेविंग अकाउंट खोले बिना ही लॉकर सुविधा चाहते हैं, तो इसके लिए आपको उस बैंक में एक निश्‍चित राशि का फिक्सड डिपॉज़िट (FD) करना होगा. इसकी राशि लॉकर के साइज पर निर्भर करती है. साथ ही अलग-अलग बैंकों में भी FD की राशि अलग-अलग होती है.



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लॉकर लेने के लिए क्या करें?
लॉकर लेने के लिए निकटतम बैंक ब्रांच सबसे बेहतर रहता है. जहां आपका अकाउंट हो. आमतौर पर लॉकर की काफी डिमांड होती है और इसके लिए बैंक को आवेदन करना पड़ता है. यदि एक लॉकर उपलब्ध है तो बैंक और ग्राहक एक लॉकर रेंटल एग्रीमेंट करते हैं. इसमें बैंक और ग्राहकों में बीच नियमों और शर्तों, देनदारियों और जिम्मेदारियों को को लेकर एग्रीमेंट किया जाता है.

लॉकर मेंटेनेंस (Maintenance)के लिए क्या करें?
सभी बैंक लॉकर सुविधा के लिए ग्राहक से हर महीने एक निश्‍चित किराया वसूलते हैं. हर बैंक की किराये की राशि अलग-अलग होती है. लॉकर को लेकर बैंक और ग्राहक में डील होते समय यह भी तय होता कि लॉकर का किराया (जो कि विभिन्न बैंकों पर निर्भर करता है)कितना होगा. फीस की रकम लॉकर की साइज और लोकेशन पर निर्भर करती है. बड़े लॉकर पर ज्यादा फीस लगती है. ग्राहक को बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस (sufficient balance )रखना चाहिए ताकि डेबिट कार्ड से डायरेक्ट सालाना रेंट भर सके.

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हो सकती है इतनी फीस
सरकारी बैंक एक लॉकर के लिए सालाना लगभग 1,000 से 7,000 रुपए के बीच में फीस लेते हैं. इसके अलावा निजी बैंक सालाना 3000 से 20,000 के बीच में फीस लेते हैं. फीस बैंक के अनुसार कम या ज्यादा भी हो सकती है. यह एक अनुमातिम फीस है.

18 साल से ऊपर होनी चाहिए उम्र
बैंक लॉकर लेने के लिए आपकी उम्र 18 से ऊपर होनी चाहिए और कुछ बैंक आपसे अपने यहां सेविंग अकाउंट खोलने को भी कह सकते हैं. आप अपनी जरूरत के अनुसार लॉकर चुन सकते हैं. इसके साथ ही लॉकर लेने के लिए नॉमिनेशन या ज्वाइंट ओनरशिप होना जरूरी होता है. एक बार नॉमिनी बनाए जाने के बाद भी आप अपना नॉमिनी बदल सकते हैं. खाताधारक की मौत हो जाने पर नॉमिनी को खाताधारक का मृत्यु प्रमाण पत्र व अपना पहचान पत्र उपलब्ध कराने पर लॉकर ऑपरेट करने का अधिकार मिल जाता है. संयुक्त रूप से लॉकर लिए जाने की स्थिति में अगर एक खाता धारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक उसके नॉमिनी व दूसरे लॉकर धारक को संयुक्त रूप से लॉकर ऑपरेट करने का अधिकार दे सकता है.

लॉकर बंद कैसे करवाएं?
अगर आप कोई लॉकर बंद करना चाहते हैं तो वह इसे सरेंडर करने के लिए आवेदन कर सकता है. ग्राहक को लॉकर खाली करना होगा और बैंक की चाबी वापस करनी होगी. समझौता समाप्त हो गया है और वर्ष की शुरुआत में एकत्रित लॉकर किराये को ग्राहक को वापस कर दिया जाता है.

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बैंक लॉकर लेते समय इन बातों पर करें गौर

  •  अगर लॉकर में आपकी मूल्यवान चीजें हैं तो सुनिश्चित करें कि बैंक ने अलार्म सिस्टम, लोहे के दरवाजे वाला कमरे और सीसीटीवी के जरिए इलेक्ट्रानिक सर्विलांस जैसे सुरक्षा के सभी उपाय किए हुए हैं. यह भी जरूरी है कि आप अपने लॉकर का समय-समय पर जायजा लेते रहें.

  • बैंक लॉकर को ऑपरेट करने के लिए पास दो चाबियां होती हैं, जिसमें से एक चाबी बैंक के पास रहती है और दूसरी चाबी ग्राहक के पास रहती है. बैंक आपकी अनुपस्थिति में लॉकर को न तो खोल सकता है और न ही किसी और को खोलने की परमिशन दे सकता है. बता दें कि दोनों चाबियां लगने के बाद ही लॉकर खुलता है. इसका मतलब यह है कि ग्राहक जब भी लॉकर ऑपरेट करना चाहेगा, उसे इसकी जानकारी ब्रांच (बैंक) को देनी होगी.

  • बैंक के साथ ही आपको खुद भी अपने लॉकर की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की जरूरत है. विशेषज्ञों की राय में पूरे सामान की डिटेल लिखकर उसकी एक कॉपी घर में और एक लॉकर में रखनी चाहिए. साथ ही लॉकर में रखे जाने वाले काग़ज़ातों को लैमिनेट कराकर रखें.

  • लॉकर खोलते समय ये देख लें कि आपके आस-पास कोई न हो. आपने कितनी बार लॉकर खोला इसकी डिटेल भी रखें और वहां से निकलने से पहले ये सुनिश्‍चित कर लें कि आपने लॉकर ठीक से बंद किया है या नहीं.

  • जानकारों का कहना है कि लॉकर को साल में कम-से-कम एक बार अवश्य खोलना चाहिए. आरबीआई ने बैकों को ये अधिकार दे रखा है कि हाई-रिस्क वाले लॉकर को अगर एक साल तक नहीं खोला जाता है, तो बैंक ताला तोड़कर लॉकर खोल सकता है.

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