आर्टिकल 370 और 35A हटने से जम्‍मू-कश्‍मीर में कम होगी बेरोज़गारी, ऐसे बदलेंगे आर्थिक हालात

जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय योजनाओं के करीब दस प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम इसको 2000-2016 के बीच मिलती रही है, यद्यपि इसकी जनसंख्या पूरे देश की जनसंख्या की करीब एक प्रतिशत है.

News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 5:08 PM IST
आर्टिकल 370 और 35A हटने से जम्‍मू-कश्‍मीर में कम होगी बेरोज़गारी, ऐसे बदलेंगे आर्थिक हालात
आर्टिकल 370 निष्प्रभावी: मोदी सरकार के इस कदम से खुश हैं कश्मीरी पंडित
News18Hindi
Updated: August 6, 2019, 5:08 PM IST
आलोक पुराणिक

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने की प्रक्रिया चालू है. आर्टिकल 370 और इसके साथ 35 ए के हटाने की प्रक्रिया से जुड़े भाषण में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जो भाषण राज्यसभा में दिया, उसमें आर्थिक मुद्दों को भी रेखांकित किया. मोटे तौर पर अमित शाह ने बताया कि 35 ए की वजह से प्रापर्टी खरीदने की इजाजत नहीं है. बाहर के लोग यहां बस नहीं सकते तो आखिर कोई यहां क्यों आकर निवेश करना चाहेगा. कौन उद्योग धंधे लगाना चाहेगा. तकनीकी तौर पर अगर किसी को मिल्कियत नहीं मिलेगी, तो कोई क्यों यहां की संपत्ति में निवेश करेगा. यह मुद्दा रखते हुए अमित शाह ने रेखांकित किया कि यहां पर संपत्ति के रेट बहुत ज्यादा नहीं बढ़ते इसलिए कि यहां खरीदार नहीं हैं. खरीदार इसलिए नहीं है कि बाहर के खरीदारों को आने की इजाजत नहीं है. इसलिए कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर का हाल खऱाब है.

बढ़ेगा रोज़गार- 35 ए हटेगा, तो बाहर से लोग आएंगे, बाहर से निवेश आएगा, यहां के नौजवान की बेरोजगारी दूर होगी. यह बात अमित शाह ने तब कही जब वह आर्टिकल 370 और 35 ए को हटाने की पुरजोर वकालत कर रहे थे.

>> जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय योजनाओं की करीब दस प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम इसको 2000-2016 के बीच मिलती रही है, जबकि इसकी जनसंख्या पूरे देश की जनसंख्या की करीब एक प्रतिशत है. बाहर के लोग निवेश नहीं कर सकते.

आर्टिकल 370 और 35A में बदलाव से जम्‍मू-कश्‍मीर में कम होगी बेरोज़गारी (फाइल फोटो)


>> बाहर के लोग उद्योग नहीं लगा सकते. तो नया रोजगार कहां से आएगा. सेंटर फार इंडियन इकॉनमी यानी सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से जुलाई 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर ने बेरोजगारी के चार्ट में टॉप किया है. मासिक औसत बेरोजगारी दर जम्मू-कश्मीर में इस अवधि में 15 प्रतिशत रही है.

>> इस अवधि में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत रही है. पूरे देश के मुकाबले दोगुने से ज्यादा बेरोजगार हैं जम्मू-कश्मीर में. पर बाहर का निवेश नहीं आ सकता. बाहर के लोग नहीं आ सकते. जमीन की नई मांग ना पैदा होने की वजह से वहां प्रापर्टी के रेट भी सुस्ती के साथ बढ़ते हैं.
Loading...

>> ये सारी स्थितियां जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए तो ठीक नहीं हैं, साथ में जम्मू-कश्मीर की स्थितियों का सीधा असर समग्र अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. यह अनायास नहीं है कि जब आर्टिकल  370 हटाने के और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के दस्तावेज जब राज्यसभा में पेश किये जा रहे थे, तब बहुत तरह की आशंकाओं के चलते शेयर बाजार में सूचकांक गिर रहे थे.

जम्मू-कश्मीर की हालत सिर्फ जम्मू-कश्मीर का मसला नहीं है, समग्र अर्थव्यवस्था का मसला है. (फाइल फोटो)


देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ेगा सहयोग- जम्मू-कश्मीर की हालत सिर्फ जम्मू कश्मीर का मसला नहीं है, समग्र अर्थव्यवस्था का मसला है. जम्मू-कश्मीर में अगर नया निवेश हो, नई परियोजनाएं आएं तो वहां के नौजवानों को कुछ नए मौके मिल सकते हैं.

>> औद्योगिक निवेश, औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सबसे पहले जरूरी है कि शांति एक न्यूनतम स्तर पर कायम रहे. हाल के घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए एक उद्योगपति हर्ष गोयनका ने साफ किया कि कश्मीर में उनकी दो फैक्टरियां हुआ करती थीं. पर आतंकवाद के चलते ये बंद हो गईं. अब नए निवेश की उम्मीद वहां की जा सकती है.

कारोबार को मिलेगा बढ़ावा->> जम्मू-कश्मीर जनसंख्या के लिहाज से छोटा राज्य है. करीब एक करोड़ तीस लाख की जनसंख्या वाला राज्य जनसंख्या के लिहाज से छोटा है, पर पर्यटन से लेकर तमाम दूसरे कारोबारों की अपार संभावनाएं हैं वहां. इन संभावनाओं को दोहन कैसे किया जाएगा यह देखना होगा.

एकदम सब कुछ बदलेगा ये सोचना गलत- आर्टिकल 370 और 35 ए के हटने के बाद स्थितियां एकदम बदल जाएंगी, ऐसा मानना भी बहुत आशावादी होना होगा. पाकिस्तान इतनी आसानी से कश्मीर का पीछा नहीं छोड़नेवाला है. पाकिस्तान में फौज की सत्ता कश्मीर पर टिकी है. कश्मीर सुलगता रहे. कश्मीर के बहाने पाकिस्तान की जनता को लगातार बहकाया जाता रहे. इसी में पाकिस्तान के हुक्मरानों के स्वार्थ हैं.

>> हाफिज सईद जैसे आतंकियों को कश्मीर के नाम पर चंदा खाने का मौका मिलता रहे, यह सब एकदम बंद नहीं हो जाएगा. दरअसल कश्मीर अपने आप में बड़ा धंधा बन गया है. पाकिस्तानी फौज इसके बहाने पाकिस्तान में सत्ता में बने रहने की वैधता चाहती है.

ये भी पढ़ें-जब जम्मू-कश्मीर में हर आदमी पर खर्च हो रहे थे 92 हजार, तब यूपी में सिर्फ 4300 रुपये!

>> तमाम अलगाववादियों को इस बहाने चंदा खाने का मौका मिलता है. उमर अब्दुल्ला को पीढ़ी दर पीढ़ी सीएम की कुर्सी यहां दिखाई पड़ती है. यही हाल महबूबा मुफ्ती का है. मुफ्ती-अब्दुल्ला दोनों ही यह चाहते हैं कि ना तो हालत इतने खराब हों कि उन्हे सत्ता चलाने में दिक्कत आए ना ही इतने ठीक हो जाएं कि दिल्ली की सरकार उन्हें पूछे ही नहीं.

>> यह अनायास नहीं है अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार दोनों ही भाजपा के साथ सत्ता में सहयोगी रहे हैं. इन्हें कश्मीर में अपनी जागीरदारी दिखाई पड़ती है. जागीरदारी जाने से उनकी परेशानी स्वाभाविक है. इनका एक सीमित जनाधार है. तो कश्मीर में बवाल एकदम खत्म नहीं हो जाएंगे. कश्मीर में ऐसे इस्लामिक आतंकी समूह हैं जिन्हे कश्मीर में सीरिया दिखाई पड़ता है. पाकिस्तान से अलगाववादियों को भी समर्थन है, आतंकियों को भी समर्थन है.



>> कश्मीर एक विकट धंधा बना हुआ है, जिसमें मुफ्ती, अब्दुल्ला, आतंकवादी , पाकिस्तान जाने कितनों के हित हैं. इन स्वार्थों के प्रगाढ़ होने में बहुत लंबा वक्त लगा है, इन्हे तोड़ना आसान ना होगा.

>> जम्मू- कश्मीर में सिर्फ दो मुख्य राजनीतिक दल ऐसे हैं, जिनकी निष्ठा भारतीय संविधान के प्रति असंदिग्ध है-भाजपा और कांग्रेस. बाकी सब पाकिस्तान के हाथों में भी खेलने में कोई गुरेज नहीं करेंगे. यह कश्मीर की राजनीतिक सचाई है, एक नई आर्थिक सचाई को इस परिप्रेक्ष्य में समझना होगा.

>> अगर नए उद्योग धंधे वहां लगे और नौजवानों के हित नए धंधों, नए रोजगारों में बने, तो आतंक के प्रति एक लगाव जुड़ाव यूं भी कम होगा. पर यह एक लंबी प्रक्रिया है. इसलिए देखने की बात यह है कि कितनी बड़ी कंपनियां, कितने बड़े उद्योग वहां निवेश करते हैं.

> अब सरकार के पास तो खुली छूट है. रियायतों के जरिये केंद्र सरकार उद्यमियों को जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए प्रेरित कर सकती है. पब्लिक सेक्टर कंपनियों के जरिये वहां निवेश की नई धारा शुरू की जा सकती है.

(लेखक आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 6, 2019, 3:07 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...