वित्त मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाये ये 7 बड़े कदम

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Updated: August 24, 2019, 3:17 PM IST
वित्त मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाये ये 7 बड़े कदम
वित्त मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाये ये कदम

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी (BJP) के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली.

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पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी (BJP) के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली. अरुण जेटली (Arun Jaitley) काफी समय से गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे. इसी के चलते उन्‍होंने लोकसभा चुनाव, 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने का आग्रह किया था. लेकिन पहले कार्यकाल में बतौर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 5 बजट पेश किए. इन बजट में कई बड़ी घोषणाएं हुईं, जिनका फायदा देश के करोड़ों लोग उठा रहे हैं.

आपको बता दें कि बतौर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी (GST)  जैसा सबसे बड़ा टैक्स सुधार किया. वहीं, जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में या DBT) लॉन्च करने के लिए कड़े आर्थिक सुधारों की घोषणा उस समय अरुण जेटली ने ही की थी.



इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना को भी देश में बेहतर तरीके से लागू करने में वित्त मंत्री अरुण जेटली का ही योगदान रहा है.

आइए जानें उनके पांच साल के कार्यकाल के बारे में...

(1) साल 2014- मई 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद जुलाई में इस सरकार ने अपना पहला बजट (Budget) पेश किया. पहले Budget को पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि देश की जनता ने तेज आर्थिक विकास के लिए भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया है. मोदी सरकार ने अपने पहले Budget के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को 7-8 फीसदी GDP ग्रोथ के साथ 'सबका साथ-सबका विकास' का नारा दिया.

(2) साल 2015- वित्त मंत्री अरुण जेटली ने Budget पेश करते हुए दावा किया कि मोदी सरकार के सिर्फ 9 महीने के कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी है. वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार है.
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>> जेटली ने Union Budget पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन चुकी है. उस समय जेटली ने जीडीपी (GDP) की नई सीरीज के हिसाब से 7.4 फीसदी विकास दर होने की उम्मीद जताई.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने Budget पेश करते हुए दावा किया कि मोदी सरकार के सिर्फ 9 महीने के कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी है


(3) हुई ये बड़ी घोषणाएं-  जीएसटी (GST) और जनधन, आधार और मोबाइल के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में या DBT) लॉन्च करने के लिए कड़े आर्थिक सुधारों की घोषणा उस समय अरुण जेटली ने ही की थी.

(4) साल 2016- इस Budget से पहले दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं कई चुनौतियों का सामना कर रही थीं. ऐसे में भारत के लिए भी रास्ता आसान नहीं था. सरकार के सामने GDP ग्रोथ के बेहतर आंकड़े थे.

>> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को सुस्त पड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच एक बेहतर भविष्य वाली इकनॉमी घोषित किया.



>> Union Budget में सरकार के सामने वैश्विक सुस्ती के अलावा बड़े घरेलू खर्च चुनौती बने. Budget में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा कर्मचारियों तक पहुंचाने में काफी रकम खर्च होनी थी. वहीं देश में लगातार दो बार मानसून कमजोर रहने से कृषि उपज घटने का खतरा था.

(5) सरकार ने लागू की फसल बीमा योजना- सरकार के सामने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू करना भी बड़े खर्च में से एक था. Budget में सरकार के पास खर्च करने के लिए राजस्व की कड़ी चुनौती नहीं थी क्योंकि सरकारी खजाने को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कमजोर कीमतों से मदद मिल रही थी.

(6) साल 2017- मोदी सरकार के कार्यकाल में चौथा बजट (Budget) पेश करने से ठीक पहले देशभर में कालेधन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया गया. सालाना बजट (Budget) में कमजोर मांग बड़ी चुनौती बनकर उभरी. इससे पिछले दो बजट (Budget) के दौरान देश में GDP ग्रोथ में तेजी देखी गई थी.



>> बजट (Budget)में सरकार को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के भाव एक बार फिर परेशान कर रहे थे. जुलाई 2017 से जीएसटी (GST) लागू करने से GDP ग्रोथ को झटका लगने के संकेत मिल रहे थे.

>> भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जहां ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहा था वहीं अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से विदेशी निवेशकों का रुख भी बदलने के संकेत मिल रहे थे.

(7) साल 2018- केंद्र सरकार के आखिरी पूर्ण बजट (Budget) से उम्मीद की जा रही थी कि आगामी लोकसभा और आठ राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले सरकार कुछ लुभावनी घोषणा करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.साल 2018 के बजट (Budget) में मध्यवर्ग को कुछ खास हाथ नहीं लगा. इनकम टैक्स (Income Tax) स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया.

>> इसकी जगह एजुकेशन सेस 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया गया. इसके साथ ही मेडिकल री इम्बर्समेंट और कनवेंस एलोयेन्स को खत्म कर 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू कर दिया गया.

>> किसानों की आय दोगुनी करने के लिए Budget में फसलों पर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने की घोषणा की गई. मोदी सरकार ने ग्रामीण इलाकों में एक करोड़ और शहरी इलाकों में 37 लाख घर बनाने में मदद करने की घोषणा की.

>> इस बजट (Budget) की मुख्य बात राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा (PM-JAY) रही.आयुष्मान भारत योजना (ABY) के तहत 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा के तहत लाने की बात की गयी थी.

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First published: August 24, 2019, 2:00 PM IST
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