अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में किया था आम आदमी पर टैक्स बोझ कम, जानें 9 बड़े बदलावों के बारे में

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Updated: August 24, 2019, 2:44 PM IST
अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में किया था आम आदमी पर टैक्स बोझ कम, जानें 9 बड़े बदलावों के बारे में
अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में किया था आम आदमी पर टैक्स बोझ कम, जानें 9 बड़े बदलावों के बारे में

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (Former Finance Minister Arun Jailtey Passes Away) का 66 साल की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने अपने पहले बजट में ही टैक्सपेयर्स को खुश करने की कोशिश की. इस बजट में इनकम टैक्स में छूट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई थी.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली (Former Finance Minister Arun Jaitley) थे. उन्होंने 5 साल में टैक्स को लेकर कई बड़े बदलाव किए. अरुण जेटली के ही कार्यकाल में 12 साल बाद सैंटडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की वापसी हुई थी. साथ ही, टैक्स स्लैब में भी बड़ा बदलाव हुआ. आपको बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley Dies)  का 66 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनको बीते 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया था. उस समय उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. कुछ साल पहले ही उनकी बैरियाट्रिक सर्जरी की गई थी. बता दें कि पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) की हालत बीते शुक्रवार को ही बिगड़ गई थी. अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ को लेकर नौ अगस्त को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था.

आइए जानें अरुण जेटली के टैक्स को लेकर किए गए बड़े फैसलों के बारे में...

(1) पहले बजट में ही किया टैक्स बोझ कम- आम बजट 2014-15- वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में ही टैक्सपेयर्स को खुश करने की कोशिश की. इस बजट में इनकम टैक्स में छूट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई थी. वहीं, 60 वर्ष से ज्यादा और 80 वर्ष से कम उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स छूट की सीमा 3 लाख कर दी गई थी.

>> इसके साथ ही, इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80C के तहत निवेश पर टैक्स छूट की सीमा भी तब 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई थी.

>> साथ ही, मध्य वर्ग के लोगों को सेक्शन 24 के तहत हाउसिंग लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई थी.

अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में ही टैक्सपेयर्स को खुश करने की कोशिश की. इस बजट में इनकम टैक्स में छूट की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख कर दी गई थी.


(2) शुरू की पेंशन योजना- आम बजट 2015-16 -अपना दूसरा बजट पेश करते हुए जेटली ने पर्सनल इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया. हालांकि, कुछ ऐसे ऐलान किए जिनसे सैलरीड क्लास को निवेश पर ज्यादा टैक्स बचाने में मदद मिली.
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>> साल 2015-16 के बजट में सरकार ने नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए सेक्शन 80CCD(1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर अतिरिक्त 50 हजार रुपये की टैक्स छूट की घोषणा की गई थी.

>> यह सेक्शन 80C के तहत मिल रही 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट से अलग थी. यानी, अब लोगों को कुल 2 लाख रुपये के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिल रहा है.

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(3) नौकरी करने वालों को मिला ये तोहफा- सैलरीड क्लास के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस लिमिट को दोगुना कर 800 रुपये से 1600 रुपये प्रति माह कर दिया गया. एक और बड़ा बदलाव हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट बढ़ाकर किया गया.

>> इसके तहत, इंडिविजुअल्स के लिए यह सीमा 15 हजार रु. से बढ़ाकर 25 हजार रु. कर दी गई जबकि सीनियर सिटिजंस के लिए यह 20 हजार रु. से बढ़ाकर 30 हजार रु. कर दी गई.



(4) सुकन्या योजना की हुई शुरुआत- सुकन्या समृद्धि योजना को भी पीपीएफ के समान ही टैक्स छूट के दायरे में ला दिया गया. बजट घोषणा से पहले सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश की रकम पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिल रही थी, लेकिन इससे हुई आमदनी और निकासी पर टैक्स का प्रावधान था.

>> उस बजट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स के लिए सरचार्ज 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया था. हालांकि, तत्कालीन वित्त मंत्री ने वेल्थ टैक्स खत्म करने का ऐलान किया था.

(5) बढ़ गया अमीरों पर टैक्स का बोझ- आम बजट 2016-17 में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) यानी 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई वाले इंडिविजुअल्स के लिए सरचार्ज में फिर से 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई और यह 15 प्रतिशत पर पहुंच गया था.

(6) किराए पर रहने वालों को मिली बड़ी राहत- किराए के मकान में रह रहे ऐसे लोगों को जिनकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) पार्ट नहीं होता है, उन्हें सेक्शन 80GG के तहत किराए की रकम पर टैक्स छूट की सीमा 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई थी.



>> 5 लाख रुपये से कम की सालाना आमदनी वाले छोटे और सीमांत करदाताओं को इनकम टैक्स पर 2 हजार रुपये 5 हजार रुपये तक की राहत दी गई. उधर, प्रॉपर्टी खरीदने वालों को सेक्शन 80EE के तहत कुछ शर्तों के साथ 50 हजार रुपये के अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन की सुविधा दी गई.

(7) फिर कम हुआ टैक्स का बोझ- आम बजट 2017-18 में 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक के सालाना इनकम पर टैक्स की दर 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी थी. इससे टैक्सपेयरों की जेब में 12,500 रुपये ज्यादा बचने लगे. वहीं 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच सालाना कमाई कर रहे लोगों के लिए टैक्स पर 10 प्रतिशत सरचार्ज का नया प्रावधान कर दिया गया.

(8) 12 साल बाद फिर लागू हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन- आम बजट 2018-19 में अरुण जेटली ने सैलरीड क्लास और पेंशनभोगियों के लिए 40 हजार रु. के स्टैंडर्ड डिडक्शन की वापसी का ऐलान किया, लेकिन बदले में मेडिकल रीइंबर्समेंट्स और ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर टैक्स छूट खत्म कर दी. इससे टैक्सपेयरों को 5,800 रुपये की अतिरिक्त टैक्स बचत हो रही है.

(9) फिर आया एक और नया टैक्स- वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में टैक्स पर 1 प्रतिशत सेस बढ़ा दिया गया. इस तर पिछले वर्ष से सेस 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत हो गया. इसी बजट में एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये से ज्यादा कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 10 प्रतिशत का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स लागू कर दिया गया.

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First published: August 24, 2019, 2:35 PM IST
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