इकॉनमी पर PM मोदी का दो दिन का मंथन खत्म, लिए गए ये फैसले

पीएम नरेंद्र मोदी की वित्त मंत्री अरुण जेटली और आर्थिक मामलों के सचिव के साथ जारी बैठक खत्म हो गई है. बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि महंगाई काबू में है और देश की आर्थिक ग्रोथ में तेजी बरकरार रहेगी.

News18Hindi
Updated: September 15, 2018, 8:27 PM IST
इकॉनमी पर PM मोदी का दो दिन का मंथन खत्म, लिए गए ये फैसले
पीएम नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो
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Updated: September 15, 2018, 8:27 PM IST
पीएम नरेंद्र मोदी की वित्त मंत्री अरुण जेटली और आर्थिक मामलों के सचिव के साथ दो दिनों से जारी बैठक खत्म हो गई है. बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर प्रेजेंटेशन दी. इस बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि पीएम मोदी ने वित्त मंत्रालय के विभाग के कामों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि देश की जीडीपी ग्रोथ में तेजी बरकरार रहेगी.

वित्त मंत्री ने बताया कि महंगाई पूरी तरह से काबू में है. वहीं, उन्होंने जीएसटी और नोटबंदी को लेकर कहा कि इनका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है. चालू वित्त वर्ष में सरकार राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत के बजटीय लक्ष्य में रखने को प्रतिबद्ध है.

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सीएनबीसी आवाज के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि पेट्रोल-डीज़ल को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है. लेकिन सूत्रों की मानें तो अर्थव्यवस्था की समीक्षा करते वक्त पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का मुद्दा भी बैठक में उठा था.




शुक्रवार को हुए ये फैसले
सरकार ने विदेशों से कर्ज लेने के नियमों में ढील देने तथा गैर-जरूरी आयातों पर पाबंदी लगाने का शुक्रवार को निर्णय किया. रुपये में गिरावट और बढ़ते चालू खाते के घाटे पर अंकुश लगाने के इरादे से यह कदम उठाया गया है.  आपको बता दें कि शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने बैठक के दौरान एक प्रजेंटेशन भी दी. इसमें बताया गया कि वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के हालात कैसे हैं और भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर बाहरी तत्‍वों का असर कैसे पड़ सकता है. हमारे देश की विकास दर बाकी देशों से काफी ज्‍यादा है. देश में महंगाई स्थिर है और वह काबू में है.

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बताया कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया. रिजर्व बैंक के गवर्नर और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें स्थिति से अवगत कराया. सरकार गैर-जरूरी आयात में कटौती करेगी, निर्यात बढ़ायेगी. साथ ही सरकार चालू खाता घाटा नियंत्रित करने के लिए ईसीबी, मसाला बॉन्ड से प्रतिबंधों को हटाएगी.

जेटली ने कहा कि इस निर्णय का मकसद चालू खाते के घाटे (कैड) पर अंकुश लगाना तथा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार ने निर्यात को प्रोत्साहित करने तथा गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने का भी फैसला किया है. हालांकि, जेटली ने यह नहीं बताया कि किन जिंसों के आयात पर पाबंदी लगायी जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘बढ़ते कैड के मामले के समाधान के लिये सरकार जरूरी कदम उठाएगी. इसके तहत गैर-जरूरी आयात में कटौती तथा निर्यात बढ़ाने के उपाय किये जाएंगे. जिन जिंसों के आयात पर अंकुश लगाया जाएगा, उसके बारे में निर्णय संबंधित मंत्रालयों से विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा. वह डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) के नियमों के अनुरूप होगा.’

क्या है फिस्कल डेफिसिट या वित्तीय घाटा?
सरकार की आय से ज्यादा खर्च होने पर फिस्कल डेफिसिट या वित्तीय घाटे की स्थिति आती है. वित्तीय घाटा बजट खर्च का वो हिस्सा है जो कर्जा लेकर पूरा किया जाता है. वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में सरकार का खर्च 17 लाख करोड़ रुपये था और वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में सरकार की आय 12 लाख करोड़ रुपये थी. इस तरह वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट करीब 5 लाख करोड़ रुपये रहा था. जीडीपी के प्रतिशत में फिस्कल डेफिसिट की तुलना की जाती है. इकॉनमी की स्थिरता के लिए फिस्कल डेफिसिट पर काबू जरूरी है.
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