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बैंकिंग रिफॉर्म थोड़ा पहले होता तो बैंकों की हालत बेहतर होती: अरुण जेटली

उन्होंने कहा कि योजना के तहत अब तक 32.41 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं और इनमें अब तक 81,200 करोड़ रुपए की राशि जमा है. जनधन खाते खोलने वालों में 53 फीसदी महिलाएं हैं जबकि इनमें 83 फीसदी खाते आधार से जुड़े हुए हैं.
उन्होंने कहा कि योजना के तहत अब तक 32.41 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं और इनमें अब तक 81,200 करोड़ रुपए की राशि जमा है. जनधन खाते खोलने वालों में 53 फीसदी महिलाएं हैं जबकि इनमें 83 फीसदी खाते आधार से जुड़े हुए हैं.

नेटवर्क 18 के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि एनपीए संकट के हल के लिए बैंकिंग रिफॉर्म्‍स और पहले होने चाहिए थे. जेटली ने बताया कि 8.5 लाख करोड़ रुपए के एनपीए से जूझ रहे बैंकों की बैलेंस शीट क्‍लीन करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार दोनों ताबड़तोड़ कोशिश कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2018, 8:22 PM IST
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नेटवर्क 18 के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि एनपीए संकट के हल के लिए बैंकिंग रिफॉर्म्‍स और पहले होने चाहिए थे. जेटली ने बताया कि 8.5 लाख करोड़ रुपए के एनपीए से जूझ रहे बैंकों की बैलेंस शीट क्‍लीन करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार दोनों ताबड़तोड़ कोशिश कर रहे हैं.

जेटली ने कहा कि हम बैंकिंग सेक्‍टर को पटरी पर लाने के लिए ईमानदार कोशिश कर रहे हैं. विभिन्‍न स्‍कीम्‍स और उपायों के जरिए हम कोशिश कर रहे हैं कि बैंक की माली हालत बेहतर हो. गौरतलब है कि एनपीए की समस्‍या को दूर करने के मद्देनजर सरकार ने इन्‍सॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड लागू किया.

जेटली ने कहा कि पिछले दो साल के दौरान केंद्रीय बैंक ने भी कॉरपोरेट रीस्‍ट्रक्‍चरिंग, स्‍ट्रैटेजिक डेट रीस्‍ट्रक्‍चरिंग जैसे कई स्‍कीम और उपाय किए हैं, लेकिन ये उपाय करने में कुछ देर हो गई. अधिकांश स्‍कीम से बैंकों को अधिक फायदा नहीं मिला है.



2017 के मार्च और सितंबर के बीच ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स का प्रतिशत कुल लोन के हिस्‍से के रूप में 9.6 फीसदी से बढ़कर 10.2 फीसदी हो गया.
इंटरव्‍यू में जेटली ने कहा कि किसानों की खरीफ एमएसपी बढ़ाने का असर महंगाई पर हो सकता है. बजट में एमएसपी को फसलों की कीमत का डेढ़ गुना करने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि हमारी नजर उसपर है और महंगाई पर पड़ने वाले इसके असर को कंट्रोल किया जा सकता है. हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि महंगाई से जुड़ी टेंशन की इससे बड़ी वजह क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत है.

उन्‍होंने कहा कि अगर क्रूड ऑयल की कीमत मैनेज करने लायक स्थिति में रही और मानसून इस साल भी नॉर्मल रहता है तो हम 8 फीसदी से अधिक ग्रोथ रेट हासिल कर सकते हैं.

जेटली ने कहा कि कृषि के लिए मानसून एक बड़ा फैक्‍टर है. इसी तरह मैं चाहता हूं कि क्रूड ऑयल की कीमतें वर्तमान स्‍तर से ऊपर नहीं जाएं. अगर हम 8 फीसदी ग्रोथ हासिल कर लेते हैं तो यह एक अच्‍छी उपलब्धि होगी, क्‍योंकि दुनिया में कोई भी देश 7 फीसदी ग्रोथ रेट हासिल करने की स्थिति में भी नहीं है. उनके अनुसार, भारत की जीडीपी ग्रोथ को वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्‍य में देखा जाना चाहिए.

जेटली ने कहा कि वर्ल्‍ड इकोनॉमी में रिकवरी के पर्याप्‍त लक्षण हैं और 2018 में इसके 3.9 फीसदी ग्रोथ की उम्‍मीद है. अगर वर्ल्‍ड इकोनॉमी की ग्रोथ 3.9 फीसदी रहती है तो भारत सबसे अधिक ग्रोथ करने वाला देश होगा.

जेटली ने कहा कि चूंकि इस साल हमने नोटबंदी और जीएसटी जैसे रिफॉर्म्‍स किए हैं, ऐसे में हमारी ग्रोथ 6.7 से लेकर 6.8 फीसदी तक रह सकती है.

हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार इजाफा सरकार के लिए चिंता का सबब है. महज तीन महीनों में 50 डॉलर से 70 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुकीं कीमतें हमारे कम्‍फर्ट लेवल से लगभग बाहर हो चुकी हैं. इससे करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने और इकोनॉमिक ग्रोथ कम होने के साथ ही महंगाई भी बढ़ सकती है.

जेटली ने कहा कि अगर क्रूड ऑयल (कच्‍चे तेल) की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती हैं और इस साल भी मानसून सामान्य रहा तो देश की विकास दर दोहरे डिजिट में रह सकती है.

जेटली ने कहा कि चूंकि हम बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल आयात करते हैं. ऐसे में इसकी लगातार बढ़ रही कीमतों का असर महंगाई पर भी हो सकता है. क्रूड कीमतें बढ़ने से चीजों की आवाजाही महंगी हो जाती है, जिसका असर उपयोग की वस्‍तुओं की कीमतों पर पड़ता है. हालांकि जेटली ने यह भी कहा कि हमें देखना होगा कि क्रूड ऑयल की कीमतों में किस हद तक इजाफा होता है. हमारे ऊपर असर भी उसी के अनुरूप होगा.

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