• Home
  • »
  • News
  • »
  • business
  • »
  • अभी भी खुल रही इकोनॉमिक एक्टिविटी, मांग बढ़ाने के लिए एक और राहत पैकेज की जरूरत: ​अरविंद पनगढ़िया

अभी भी खुल रही इकोनॉमिक एक्टिविटी, मांग बढ़ाने के लिए एक और राहत पैकेज की जरूरत: ​अरविंद पनगढ़िया

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (File Photo/PTI)

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (File Photo/PTI)

अरविंद पनगढ़िया (Arvind Pangariya) ने शनिवार को CII के कार्यक्रम में कहा कि डिमांड साइड पर एक और वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इंपोर्ट लाइसेंसिंग लागू कर विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन होगा.

  • Share this:
    नई दिल्ली. नीति आयोग (NITI Aayog) के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया (Arvind pangariya) ने शनिवार को कहा कि संभवत: एक और प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus Package) की जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि प्रोत्साहन पैकेज मांग बढ़ाने के उद्देश्य से होना चाहिए ताकि आर्थिक गतिविधियों को और बल मिल सके. पनगढ़िया ने यह बात शनिवार को कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) के India@75 टॉपिक पर एक वर्चुअल इवेंट में कहा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इंपोर्ट लाइसेंसिंग (Import Licensing) को लागू कर विश्व व्यापार संगठन (WTO) के उन नियमों को उल्लंघन होगा, जिसपर भारत ने हस्ताक्षर किए हैं.

    इस इवेंट में बात करते हुए पनगढ़िया ने कहा, 'अर्थव्यवस्था अभी भी खुलने की प्रक्रिया में है. अगर हम देखें तो इनवेन्ट्रीज एक बार फिर भरने लगे हैं. इससे यह प्रदर्शि​त होता है कि मांग में कमी की समस्या है.'

    उन्होंने ध्यान दिलाया कि मौजूदा स्थिति में भी जीडीपी और कर्ज का अनुपात (Debt to GDP Ratio) 72 फीसदी से बढ़कर इस वित्त वर्ष के अंत में 85 फीसदी के स्तर पर आ जाएगा. ऐसे में जरूरत है कि डिमांड साइड पर एक प्रोत्सोहन पैकेज आए ताकि अर्थव्यवस्था को बल मिल सके.

    यह भी पढ़ें: महिला कर्मचारियों को 10 दिन की 'पीरियड लीव' देगी जोमैटो, पढ़ें CEO ने ई-मेल में क्या लिखा

    कोरोना काल से पहले ही सुस्त थी अर्थव्यवस्था
    कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने मई में 21 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था. कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पनगढ़िया ने कहा कि कोरोना काल से पहले ही देश की अर्थव्यवस्था सुस्त थी. वित्त वर्ष 2019-20 में आर्थिक विकास दर 4.2 फीसदी थी.

    उन्होंने कहा कि मेरे मतानुसार भारत के लिए एक बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन उतना बेहतर रिजल्ट नहीं देता. अमेरिका और यूरोप में भी ऐसे प्रोत्साहन पैकेज से कुछ खास लाभ नहीं मिला है. उन्होंने कहा, 'बड़ा प्रोत्साहन पैकेज तभी काम करता है जब सप्लाई कर्व साकारात्मक स्लोप की तरफ हो.'

    यह भी पढ़ें: PM किसान स्कीम: रविवार को 8.5 करोड़ किसानों के खाते में आएंगे 2-2 हजार रुपये

    सरकार द्वारा 'आत्मनिर्भर भारत' प्रोग्राम के बारे में बात करते हुए पनगढ़िया ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि आप केवल उसी वस्तु का उत्पादन करेंगे, जिसकी आपको जरूरत है. उन्होंने कहा कि आयात को वैकल्पिक बनाना एक अच्छा आइडिया नहीं. मुझे इस बात की चिंता है कि जिन नीतियों को तीन साल पहले लागू किया गया था उसमें बदला जाए और ट्रेंड में कोई बदलाव न हो. उन्होंने यह भी कहा कि आयात के लिए वै​कल्पिक नीतियों को आत्मनिर्भर भारत की वजह से बढ़ावा नहीं मिला है. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आत्मनिर्भर भारत की वजह से इसे बढ़ावा मिला है...मुझे इंपोर्ट लाइसेंसिंग के बारे में कुछ सुनाई पड़ा है, किसी ने मुझे बताया है कि इंपोर्ट लाइसेंसिंग वापस आ गया है, मैंने अभी तक इसपर कोई रिपोर्ट नहीं पढ़ी है.'

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज