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नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन ने कहा, 1 साल में 7.5 फीसदी पर वापस पहुंच सकती है आर्थिक ग्रोथ

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 6:40 PM IST
नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन ने कहा, 1 साल में 7.5 फीसदी पर वापस पहुंच सकती है आर्थिक ग्रोथ
नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया

नीति आयोग (NITI Aayog) के पूर्व चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया (Arvind Pangariya) ने कहा कि 6 से 12 महीने में आर्थिक ग्रोथ 7.5 फीसदी की दर पर वापस पहुंच सकती है. उन्होंने क​हा कि मोदी सरकार ने बेह​तर रिफॉर्म किया है. आगे भी कई रिफॉर्म की जरूरत.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 6:40 PM IST
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नई दिल्ली. नीति आयोग (NITI Aayog) के पूर्व वाइस-चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया (Arvind Parngariya) ने कहा कि भारत को रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) ज्वाइन कर लेना चाहिए. पनगढ़िया ने CNBC-TV18 से खास बातचीत में कहा कि इससे देश को व्यापार नीति व्यवस्था (Trade Policy Regime) और भी उदार होगी और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा ग्रुप है और इन 15 देशों में निर्यात करने से देश को अधिक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है.

अरविंद पनगढ़िया ने कहा, 'RCEP एक बड़ा समूह है, ऐसे में अगर हम इससे बाहर रहते हैं तो इसका खामियाजा हमें इन देशों में नियार्त पर अधिक टैरिफ के रूप में भुगतान पड़ सकता है. साथ ही यह हमारे लिए पहले से अधिक उदार व्यापार नीति को फिर से अपनाने का मौका होगा.'

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बताया सुस्त ग्रोथ का कारण
इस दौरान बातचीत में पनगढ़िया ने बताया कि आर्थिक ग्रोथ (Economic Growth) में इस गिरावट के कई कारण हैं. उन्होंने कहा, 'इसमें सबसे पहला तो यह है कि बैंकों में फंसे कर्ज और इनकी सफाई के लिए जो प्रक्रिया चल रही है, इससे वित्तीय बाजार (Financial Market) पर बुरा असर पड़ा है. इस वजह से क्रेडिट को जितना बढ़ना चाहिए, उसमें उतनी तेजी नहीं देखने को मिल रही है. कॉरपोरेट्स का भी बैलेंसशीट डगमगाया हुआ है और बैंक पहले की तुलना में अब लोन देने को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं. उन्हें पता है कि अब वे वैसे बिजनेस नहीं कर सकते, जैसे वे पहले किया करते थे. अब वो जो भी कर्ज दे रहे हैं, उसके लिए जिम्मेदार होना पड़ रहा है.'

कॉरपोरेट के काम करने का तरीका बदला
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उन्होंने कहा, 'आर्थिक ग्रोथ में गिरावट का दूसरा कारण है कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाया जाने वाला भ्रष्टाचार रोधी ड्राइव (Anit-Corruption Drive) है. जिसकी वजह से देश में बिजनेस करने के तौर-तरीके बदल रहे हैं. यह एक ऐसी बात है जिसे लोग अभी समझ नहीं रहे हैं. लेकिन, बहुत से ऐसे काम थे जिसे आप अपनी मर्जी से करते थे, अब ऐसा नहीं है. ऐसे में कॉरपोरेट जैसे पहले काम करते थे, उसमें अब बदलाव होने लगा है.'

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2020-21 तक 7.5 फीसदी के करीब होगी ग्रोथ
पनगढ़िया ने कहा, 'अर्थव्यवस्था को लेकर व्यक्गित तौर पर मैं आशावादी हूं. भले ही इसमें 6 माह से लेकर 1 साल लग जाए. लेकिन, एक साल बाद, जब आप साल 2020-21 में होंगे तब भारत का आर्थिक ग्रोथ 7.5 फीसदी के करीब होगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के पहले पांच साल में हमने यही अनुभव किया है.'

भूमि अधिग्रहण के क्षेत्र में ​बड़े रिफॉर्म की जरूरत
वैश्विक सुस्ती (Global Slowdown) को लेकर उन्होंने कहा कि देश को बोल्ड रिफॉर्म्स पर प्रतिक्रिया देना होगा. लोग सरकार को उसके बड़े कदम जैस इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), वस्तु एवं सेवा कर (GST), कॉरपोरेट के लिए क्रेडिट नहीं देते. हालांकि, हमें श्रम कानून (Labour Law) से जुड़े क्षेत्र में बड़े ​बदलाव की जरूरत है. हमें उदार व्यापार की तरफ फिर से मुड़ना चाहिए. और हमें भूमि अधिग्रहण के मसले को भी बेहतर ढंग से निपटन होगा.

भूमि अधिग्रहण को लेकर उन्होंने कहा कि बेहतर बहुमत के साथ सरकार मजबूत स्थिति में है. ऐसे में उसे भूमि अधिग्रहण से जुड़े रिफॉर्म करना चाहिए. हमें तटीय क्षेत्रों में रोजगार के बारे में भी सोचना चाहिए.

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(CNBC-TV18)

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First published: November 11, 2019, 6:23 PM IST
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