Budget 2018: पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं और महंगे, सरकार ने दिए संकेत!

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यम ने लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया.

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यम ने इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर में क्रूड की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता हो सकती है.

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    पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें आम आदमी के साथ-साथ अब सरकार की चिंता भी बढ़ाने लगी हैं. मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यम ने लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर में क्रूड की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता हो सकती हैं. मौजूदा स्तर से क्रूड की कीमतें 12 फीसदी बढ़ सकती हैं. ऐसे में घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगी हो जाएंगी. हालांकि, एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि बजट से पहले या फिर बजट में सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए इस पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी घटा सकती है.

    महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल
    मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट और इंडियन बास्केट में क्रूड की बढ़ती कीमतें प्रमुख चिंता की बात है. मुख्य आर्थिक सलाहकार  के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2019 में क्रूड 12 फीसदी और महंगा हो सकता है. आपको बता दें कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 से 71 डॉलर के बीच बनी हुई हैं. ऐसे में अगर 12 फीसदी कीमतें और बढ़ती हैं तो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा. जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा और बढ़ जाएगा.

    पेट्रोल-डीजल के रेट्स इन आधार पर होते हैं तय
    एनर्जी एक्सपर्ट्स नरेंद्र तनेजा ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तीन आधार पर पेट्रोल और डीजल के रेट्स तय करती हैं. पहला इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड (कच्चे तेल का भाव). दूसरा देश में इंपोर्ट (आयात) करते वक्त भारतीय रुपए की डॉलर के मुकाबले कीमत. इसके अलावा तीसरा आधार इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल-डीजल के क्या भाव हैं.

    महंगाई से बिगड़ सकता सरकार का खेल
    सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल के लिए रिटेल महंगाई दर 3.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. वहीं, अगले साल भी इसपर कंट्रोल करने का लक्ष्‍य रखा गया है. लेकिन अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो सरकार का यह अनुमान फेल हो सकता है. अभी पेट्रोल 3 साल के हाई पर और डीजल अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है.

    सरकार भर ही पेट्रोल-डीजल से अपनी जेब
    > मोदी सरकार के कार्यकाल में डीजल पर उत्पाद शुल्क 380 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया गया है.
    > इस दौरान यह 3.56 रुपए से बढ़कर 17.33 रुपए प्रति लीटर हो गया है.
    > पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
    > मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के समय इस पर उत्पाद शुल्क 9.48 पैसे था जो फिलहाल 21.48 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुका है.

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