• Home
  • »
  • News
  • »
  • business
  • »
  • अरविंद सुब्रमण्यन: वो CEA जिन्होंने इकोनॉमिक सर्वे में किया बदलाव

अरविंद सुब्रमण्यन: वो CEA जिन्होंने इकोनॉमिक सर्वे में किया बदलाव

मोदी सरकार के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

मोदी सरकार के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

अरविंद सुब्रमण्यन ने 16 अक्टूबर, 2014 को मुख्य आर्थिक सलाहकार का पदभार संभाला था. दरअसल, सुब्रमण्यन ने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे.

  • Share this:
    (रौनक कुमार गुंजन)

    मोदी सरकार के मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को ये जानकारी दी. नॉर्थ ब्लॉक के ऑफिस में चार साल के कार्यकाल के दौरान सुब्रमण्यन कई मजबूत और दूरगामी फैसलों के गवाह रहे हैं.

    अरविंद सुब्रमण्यन ने 16 अक्टूबर, 2014 को मुख्य आर्थिक सलाहकार का पदभार संभाला था. सुब्रमण्यन ने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे.

    वैसे तो अरविंद सुब्रमण्यन का कार्यकाल तीन साल का था. अक्टूबर 2017 में वो पदमुक्त होने वाले थे, लेकिन बाद में सितंबर 2017 में उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया, जो इस इस साल अक्टूबर में खत्म हो रहा था.

    59 साल के सुब्रमण्यन ने आर्थिक सर्वेक्षण (इकोनॉमिक सर्वे) की ड्राफ्टिंग में कई अहम बदलाव किए थे. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो चार आर्थिक सर्वेक्षण लिखी. उनके सभी आर्थिक सर्वेक्षण शंकर आचार्य, विमल जालान, अशोक लाहिड़ी और यहां तक की रघुराम राजन द्वारा ड्राफ्ट किए गए आर्थिक सर्वेक्षणों से काफी छोटी और फोकस्ड थीं.


    2014-15 में उन्होंने पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण लिखा. इसके पहले चैप्टर में उन्होंने लिखा- 'जैसा कि नई सरकार अपना पहला बजट पेश करने जा रही है. एक महत्वपूर्ण अवसर इंतजार कर रहा है. भारत राष्ट्रों के इतिहास में एक अच्छा स्थान हासिल करने जा रहा है. अब तक दो अंकों की मध्यम अवधि के विकास दर को पा सकते हैं.'

    एक आर्थिक सलाहकार के रूप में अरविंद सुब्रमण्यन अर्थव्यवस्था के गहन विश्लेषण को अच्छी तरह से समझते थे. उन्होंने अपने आर्थिक सर्वेक्षण में महिलाओं, बच्चों, पानी और अन्य चीजों को जगह दी थी.

    साल 2017-18 के आर्थिक सर्वेक्षण में अरविंद सुब्रमण्यन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं पर फोकस किया था. तब उन्होंने बताया था कि सरकार 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ग्रामीण विकास और किसानों की हालत सुधारने पर फोकस कर सकती है. पिछले दो सालों से मोदी सरकार कृषि के क्षेत्र की चुनौतियां से जूझ रही है. खराब मौसम और कम न्यूनतम समर्थन मूल्य की वजह से किसानों के लिए जीवनयापन करना काफी मुश्क‍िल हो गया है. ऐसे में इस बार के बजट में सरकार का फोकस इनकी हालत सुधारने पर है.


    सुब्रमण्यन ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन की थी. उन्होंने एनबीए की डिग्री इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद से ली थी. इसके बाद उन्होंने एम.फिल और डी.फिल की डिग्री यूके की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हासिल की.

    कौन हैं अरविंद सुब्रमण्यन, मोदी सरकार में क्या है उनका रोल?

    सुब्रमण्यम पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में डेनिस वेदरस्टोन सीनियर फेलो रहे. उन्होंने वॉशिंगटन डीसी में स्थित ग्लोबल डेवलपमेंट सेंटर से एक सीनियर फेलो के रूप में भी काम किया. वह इसके पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं.


    अरविंद सुब्रमण्यन ने दो किताबें भी लिखी हैं- पहली, इंडियाज़ टर्न: अंडरस्टैंडिंग द इकोनॉमी ट्रांसफॉर्मेशन, जो 2008 में पब्लिश हुई थी. दूसरी, एक्लिप्स: लिविंग इन द शैडो ऑफ चाइनाज इकोनॉमिक डोमिनेंस, जो सितंबर 2011 में पब्लिश हुई. इसके अलावा वह 'हू नीड्स टू ओपन द कैपिटल अकाउंट' के सह-लेखक भी रहे. ये किताब 2012 में लॉन्च हुई थी.

    सुब्रमण्यन ने बड़े भाई वीएस कृष्णन (रिटायर्ड) इंडियन रेवेन्यू सर्विस ऑफिसर हैं. कृष्णन सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज और कस्टम के मेंबर भी रह चुके हैं. गुड्स एंड सर्विस टैक्स बिल की ड्राफ्टिंग में उनका अहम रोल रहा है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज