आम आदमी के लिए बड़ी खबर: अब दाल और सब्जी में हींग का तड़का लगाना पड़ेगा महंगा? जानिए क्यों

विदेशों से आने वाले कच्चे माल से ऐसे बनती है हींग
विदेशों से आने वाले कच्चे माल से ऐसे बनती है हींग

Hing price may rise soon- सरकार अफगानिस्तान (Afghanistan) के रास्ते भारत आने वाली हींग पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) बढ़ा सकती है. यह कदम उज्बेकिस्तान की वजह से उठाया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 9:37 AM IST
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नई दिल्ली. अपवाद के रूप में दो-चार किचन की बात छोड़ दें तो स्वाद की शहंशाह और पेट का हाज़मा ठीक रखने वाली हींग (Asafoetida) पर आफत आने वाली है. कोरोना (Corona) की मार से उबर चुकी हींग एक बार फिर महंगी हो जाएगी. बाज़ार में चर्चा है कि सरकार अफगानिस्तान (Afghanistan) के रास्ते भारत आने वाली हींग पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) बढ़ा सकती है. यह कदम उज्बेकिस्तान की वजह से उठाया जा सकता है. अब ड्यूटी बढ़ने की बात सिर्फ चर्चा हो या पुख्ता जानकारी, लेकिन दिल्ली (Delhi) के खारी बावली बाज़ार से लेकर हाथरस (Hathras) तक में हलचल मची हुई है.

22 फीसद इंपोर्ट डयूटी बढ़ने की है चर्चा- खारी बावली में हींग का थोक कारोबार करने वाले एक कारोबारी ने बताया कि मौजूदा वक्त तक उज्बेकिस्तान से 27 फीसद और अफगानिस्तान से 5 फीसद इंपोर्ट ड्यूटी पर हींग का कच्चा माल भारत आ रहा है. लेकिन सरकार का मानना है कि उज्बेकिस्तान वाला कच्चा माल भी अब अफगानिस्तान के रास्ते ही भारत आ रहा है. इसलिए सरकार की मंशा है कि दोनों देशों से आने वाले हींग के कच्चे माल पर इंपोर्ट ड्यूटी को समान दर पर कर दिया जाए.
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हाथरस के रहने वाले और खारी बावली में थोक कारोबार करने वाले एक और व्यापारी ने बताया कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने की चर्चा से कारोबार पर बहुत असर पड़ रहा है. साढ़े आठ से नौ हज़ार रुपये प्रति किलो आने वाला कच्चा माल इस वक्त 10 हज़ार रुपये किलो तक बिक रहा है. ड्यूटी बढ़ने की चर्चा के बीच कच्चा माल जमा करने की होड़ लग गई है.
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जानकारों की मानें तो हींग बनाने के लिए कच्चा माल ईरान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से आता है. एक साल में करीब 600 करोड़ का कच्चा माल भारत में खरीदा जाता है.

हींग में ऐसे आएगा बदलाव, इतने हो सकते हैं रेट- हाथरस में हींग की ट्रेडिंग करने वाले राज स्वरूप बताते हैं कि अभी बाज़ार में हींग का रेट 12 हज़ार रुपये से लेकर 14 हज़ार तक चल रहा है. कोरोना के दौरान भी यही रेट था जब कच्चा माल कम आ रहा था. हालांकि कहने को तो बाज़ार में हींग का कोई रेट नहीं होता है. क्योंकि बाज़ार में परचून की दुकान पर 30 रुपये में भी हींग की प्लास्टिक की डिब्बी मिल जाती है. मतलब 3 हज़ार रुपये किलो. लेकिन, अगर हींग की इंपोर्ट डयूटी बढ़ी तो यह तय है कि रेट 15 से 16 हज़ार रुपये के पार ही जाएंगे.

विदेशों से आने वाले कच्चे माल से ऐसे बनती है हींग- हाथरस निवासी और हींग के जानकार श्याम प्रसाद बताते हैं, ईरान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से रेज़ीन (दूध) आता है. एक पौधे से यह दूध निकलता है. पहले व्यापारी सीधे हाथरस में दूध लेकर आते थे. लेकिन अब दिल्ली का खारी बाबली इलाका बड़ी मंडी बन गया है. लेकिन प्रोसेस का काम आज भी हाथरस में ही होता है. 15 बड़ी और 45 छोटी यूनिट इस काम को कर रही हैं. मैदा के साथ पौधे से निकल ओलियो-गम राल (दूध) को प्रोसेस किया जाता है. कानपुर में भी अब कुछ यूनिट खुल गई हैं. देश में बनी हींग देश के अलावा खाड़ी देश कुवैत, कतर, सऊदी अरब, बहरीन आदि में एक्सपोर्ट होती है.
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