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पंजाब-हरियाणा सहित इन 4 राज्यों ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, मिलेंगे एक्सट्रा 5,034 करोड़ रुपये

कुछ अलाउंस ऐसे होते हैं जिसके लिए आपको प्रूफ जमा करना होता है. उसके अभाव में एंप्लॉयर को इसे टैक्सेबल इनकम की कैटिगरी में डालना होता है. 31 मार्च से पहले लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और HRA के लिए डॉक्युमेंट जमा कर दें. ऐसा नहीं करने पर ये अलाउंस टैक्सेबल हो जाएंगे. अभी जमा नहीं करने पर रिटर्न फाइलिंग के दौरान इसे क्लेम करना होगा फिर टैक्स विभाग रिटर्न देगा.

कुछ अलाउंस ऐसे होते हैं जिसके लिए आपको प्रूफ जमा करना होता है. उसके अभाव में एंप्लॉयर को इसे टैक्सेबल इनकम की कैटिगरी में डालना होता है. 31 मार्च से पहले लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) और HRA के लिए डॉक्युमेंट जमा कर दें. ऐसा नहीं करने पर ये अलाउंस टैक्सेबल हो जाएंगे. अभी जमा नहीं करने पर रिटर्न फाइलिंग के दौरान इसे क्लेम करना होगा फिर टैक्स विभाग रिटर्न देगा.

असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease Of Doing Business) रिफॉर्म करने वाले राज्यों की कतार म ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. कोरोना काल में राज्यों की वित्तीय मांग और जरूरतें पूरी करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा. राज्यों को वित्तीय मांगों और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कई असरदार कदम उठाए. इस वैश्विक महामारी काल में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि जो भी राज्य नागरिकों के हितों में 4 मापदंडों पर सुधार करेगा उन्हें ओपन मार्केट से अतिरिक्त फंड जुटाने की अनुमति दी जाएगी. इसी आधार पर केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के व्यय विभाग ने ऐलान किया है कि चार और राज्यों असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease Of Doing Business) मापदंड में उल्लेखनीय सुधार करने पर 5034 करोड़ रुपये ओपन मार्केट से फंड जुटाने की अनुमति दी गई है.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म करने करने वाले ये हैं 12 राज्य 
राज्य अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार निर्धारित मापदंड़ों पर सुधार कर रहे हैं. असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मापदंड में सुधार करने वाले राज्यों की कतार में खड़े हो चुके हैं. इन चार राज्यों के अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ही वे राज्य है जिसने इस उपलब्धि को हासिल किया है. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार करने की वजह से ही इन राज्यों को 28183 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी गई है.

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राज्य                                    मंंजूर कर्ज राशि

आंध्र प्रदेश                             2,525 करोड़ रुपये
असम                                    934 करोड़ रुपये
हरियाणा                                2,146 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश                        438 करोड़ रुपये
कर्नाटक                                4,509 करोड़ रुपये
केरल                                     2,261 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश                             2,373 करोड़ रुपये
ओडिशा                               1,429 करोड़ रुपये
पंजाब                                   1,516 करोड़ रुपये
राजस्थान                               2,731 करोड़ रुपये
तमिलनाडु                             4,813 करोड़ रुपये
तेलंगाना                                2,508 करोड़ रुपये

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कोरोना काल में मोदी सरकार ने इस व्यवस्था की शुरूआत की थी
कोविड-19 और लॉक डाउन की वजह से चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में देश के सभी राज्यों के पास अपने प्रशासनिक खर्च तक उठाने के लिए वित्त की कमी पड़ गई थी. इन परिस्थितियों को देखते हुए मोदी सरकार ने 17 मई 2020 को इस व्यवस्था की शुरूआत की थी. जिसके तहत ईज ऑफ डुइंग बिजनेस सुधार प्रक्रिया को पूरा करने वाले राज्यों को ओपन मार्किट से अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति होगी. प्रावधान किया गया था कि राज्यों को अपने जीएसटी का 2 फीसदी तक कर्ज लेने की अनुमति होगी. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रिफॉर्म के अलावा वन नेशन वन राशन कार्ड को लागू करना, अर्बन लोकल बॉडी या यूटिलिटी रिफॉर्म और ऊर्जा क्षेत्र में रिफॉर्म करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित किया गया. अब तक 17 राज्य वैसे है जिसने कम से कम एक रिफॉर्म प्रक्रिया को पूरा करने में सफलता हासिल की है, जबकि 12 वैसे राज्य है जिसने वन नेशन वन राशन कार्ड सिस्टम को लागू करने में और 5 राज्य ऐसे है जिन्होंने लोकल बॉडी रिफॉर्म करने में उपलब्धि पाई है. रिफॉर्म लिंक्ड अतिरिक्त कर्ज अनुमति के तहत अब तक राज्यों को 74,773 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं.

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इन मापदंडों पर राज्यों को आंका जा रहा है
केंद्र सरकार द्वारा दी गई इस व्यवस्था के तहत राज्यों के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं. राज्यों को सबसे पहले जिला स्तर पर बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान को पूरा करना होगा. विभिन्न एक्ट के तहत कारोबार करने के लिए जरूरी लाइसेंस, मंजूरी, पंजीकरण प्रमाण-पत्र का रिन्यूएबल जैसे व्यवस्था को समाप्त करना होगा. कानून के तहत कंप्यूटराइज्ड सेंट्रल रेंडम इंस्पेक्शन सिस्टम को लागू करना होगा. साल में एक ही इंस्पेक्टर को जांच के लिए बार-बार एसाईन नहीं किया जाएगा. इंस्पेक्शन से पहले कारोबारियों को इंस्पेक्शन नोटिस दिया जाएगा. 48 घंटों के भीतर इंस्पेक्शन रिपोर्ट्स को अपलोड करना होगा.

Tags: Business news in hindi, Ease of doing business

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