इतिहास का हिस्सा बन चुकी है Atlas साइकिल, अब अंतिम फैक्ट्री भी हुई बंद

इतिहास का हिस्सा बन चुकी है Atlas साइकिल, अब अंतिम फैक्ट्री भी हुई बंद
लॉकडाउन में सरकार ने राज्यों से साइकिल पर जोर देने को कहा है.

साइकिल निर्माता कंपनी एटलस (Atlas Cycles) ने साहिबाबाद स्थिति अपनी अंतिम फैक्ट्री को भी बंद कर दिया है. इसके पहले ही कंपनी ने मध्य प्रदेश और सोनीपत स्थित फैक्ट्रियों को बंद कर दिया था. Atlas Cycles को सुनिल शेट्टी, सानिया मिर्ज़ा और अभिनव बिंद्रा भी एंडॉर्स कर चुके हैं.

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नई दिल्ली. करीब 70 साल पहले राजधानी ​नई दिल्ली से 40 किलोमीटर दूर ​हरियाणा के सोनीपत में भारत के जिस भरोसे की शुरुआत हुई थी, वो अब खत्म हो चुकी है. साइकिल निर्माता कंपनी एटलस (Atlas Cycles) ने 3 जून को साहिबाबाद में अपनी अं​तिम फैक्ट्री को भी बंद कर दिया है. स्टॉकहोम के नोबेल म्यूजियम (Nobel Museum Stockholm, Sweden) के दिवारों पर भी चमकने वाली एटलस अब उस ​इतिहास का पन्ना बन गई है. एटलस साइकिल करोड़ों भारतीयों के लिए किसी नोस्टेल्जिया से कम नहीं है.

पिछले साल ही दिसंबर में एक भारतीय पत्रकार से स्वीडेन के स्टॉकहोम स्थि​त नोबेल म्यूजियम में काली रंग की साइकिल को लेकर बताया गया कि 'यह आम साइकिल नहीं है.' म्यूजियम के क्यूरेटर ने यह जानकारी एक ऐसे समय पर दी जब इंडियन-अमेरिकन अर्थशास्त्री अभीजित बनर्जी और उनकी पत्नी इस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को 2019 के लिए इकोनॉमिक्स को अवार्ड मिला था.

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन चलाते थे एटलस साइकिल
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, म्यूजियम क्यूरेटर ने बताया कि दीवर पर टंगी ये काले रंग की साइकिल भारत के जाने-माने अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन (Amartya Sen) की है. सेन को 1998 में नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था. बताया जाता है कि अमर्त्य सेन पश्चिम बंगाल में अपने फिल्डवर्क के लिए इसी साइकिल से चलते थे. इस दौरान वो गरीबी, असमानता और पिछड़ेपन को लेकर स्टडी करते थे. हालांकि, इस रिपोर्ट में सेन के हवाले से कुछ नहीं लिखा गया है.



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साहिबाबाद फैक्ट्री के बाहर लगी नोटिस
एटलस साइकिल की शुरुआत हरियाणा के सोनीपत में साल 1951 में की गई थी. अब कंपनी ने साहिबाबाद स्थिति अपने अंतिम फैक्ट्री को भी बंद कर दिया है. फैक्ट्री के गेट पर लगे एक नोटिस पर लिखा गया है, 'हमें अपने हर दिन के संचालन के लिए फंड जुटाने में परेशानी हो रही है. हम कच्चा माल खरीदने में भी असमर्थ हैं. मौजूदा संकट में प्रबंधन फैक्ट्री चलाने की स्थिति में नहीं है.'


कर्मचारी यूनियन के महासचिव महेश कुमार ने कहा, '1 और 2 जून को हम फैक्ट्री पर खुशी-खुशी आये कि लॉकडाउन के बाद पहली बार काम शुरू हो रहा है. प्रबंधन की तरफ से इसका बिल्कुल संकेत नहीं था कि वो फैक्ट्री बंद करने पर विचार कर रहे हैं.' कुमार ने बताया कि बुधवार को जैसे ही हम गेट पर पहुंचे तो हमें गार्ड्स ने अंदर जाने से मना कर दिया.

एटलस कंपनी में 19 साल तक काम करने वाले और अब साइकिल सुत्रा चलाने वाले अशिष नागपाल ने कहा, 'एटलस में ब्रांड हेड के तौर पर काम करने के बाद यह खबर मेरे लिये बेहद दर्दनाक और निराशाजनक है.' नागपाल ने कहा कि मैं पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि गिरिश कपूर और गौतम कपूर बेहतरीन नियोक्ता हैं. वो एटलस ब्रांड के लिये जुनून से काम करते थे.

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पहले साल ही कंपनी को मिली शानदार कामयाबी
1951 में एटलस की शुरुआत जानकी दास कपूर ने की थी. एक टिन शेड से शुरू हुई यह फैक्ट्री महज 12 महीने में ही 25 एकड़ के फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स में तब्दील हो गई. ऑपरेशन शुरू होने के पहले साल ही एटलस ने 12,000 साइकिल बेचा था. साल 1958 में कंपनी ने विदेश में अपना पहल एक्सपोर्ट किया था.

एशियन गेम्स में साइकिल की सप्लाई कर चुकी है एटलस
साल 1978 में इस कंपनी ने भारत की पहली रेसिंग साइकिल को लॉन्च किया था. 1982 में दिल्ली एशियन गेम्स में साइकिल के लिए यह कंपनी आधिकारिक सप्लायर थी. साल 2004 से कंपनी के लिए मुश्किलें शुरू हुई.

ये दिग्गज कर चुके हैं एंडॉर्स
सेल को बढ़ाने के लिए कंपनी ने सुनील शेट्टी और सानिय मिर्ज़ा तक को अपना ब्रांड अम्बेस्डर बनाया. ओलम्पिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने भी इस प्रोडक्ट को एंडॉर्स किया. लेकिन, बाजार में घटते मांग की वजह से कंपनी ने 2014 में मध्य प्रदेश के मलनपुर स्थित अपने फैक्ट्री को बंद कर दिया है. इसके बाद 2018 में सोनीपत यूनिट को भी बंद करना पड़ा.

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First published: June 5, 2020, 8:31 PM IST
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