आत्‍मनिर्भर भारत: देश में पहली बार अब मेडिकल उपकरणों की क्‍वालिटी होगी तय, जानें आम लोगों को क्‍या होगा लाभ  

भारत में अब मेडिकल डिवाइसों की क्‍वालिटी बताएगी आईसीएमईडी प्‍लस स्‍कीम. 6000 उपकरणों की क्‍वालिटी होगी तय.

भारत सरकार की क्‍वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैन्‍यूफैक्‍चरर्स ऑफ मेडिकल डिवाइसेज (AIMED) ने मिलकर इस स्‍कीम को लांच किया है. जिसका फायदा कोरोना के इस दौर में न केवल भारत में बनने वाली मेडिकल क्षेत्र में जरूरतों की चीजों और आयटमों के निर्माताओं को होगा बल्कि इससे भी बड़ा फायदा इन्‍हें इस्‍तेमाल करने वाले आम लोगों को होगा.

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नई दिल्‍ली. कोरोना के चलते जहां मेडिकल क्षेत्र में तमाम चुनौतियां सामने आई हैं वहीं अब आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक प्रभावी कदम उठाया गया है. देश में पहली बार अब अस्पताल और घरों में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल डिवाइसों (Medical Device) को मेड इन इंडिया यानी इंडियन सर्टिफिकेशन ऑफ मेडिकल डिवाइसेज प्‍लस स्‍कीम (ICMED प्लस) के तहत सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इसके लिए आज ही देश में पहली बार आईसीएमईडी प्‍लस स्‍कीम को लांच किया गया है.

भारत सरकार की क्‍वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैन्‍यूफैक्‍चरर्स ऑफ मेडिकल डिवाइसेज (AIMED) ने मिलकर इस स्‍कीम को लांच किया है. जिसका फायदा कोरोना के इस दौर में न केवल भारत में बनने वाली मेडिकल क्षेत्र में जरूरतों की चीजों और आयटमों के निर्माताओं को होगा बल्कि इससे भी बड़ा फायदा इन्‍हें इस्‍तेमाल करने वाले आम लोगों को होगा.

आज ही लांच हुई इस स्‍कीम के बाद अब मेडिकल डिवाइसों जैसे थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर मास्क और सेनेटाइजर सहित कुल 6000 डिवाइसों की क्वालिटी की पहचान कर पाना आसान होगा. ये सभी मेडिकल डिवाइसें अस्‍पतालों के साथ ही घरों में भी इस्‍तेमाल की जाती हैं. वहीं कोरोना महामारी के बाद से ऐसे कई प्रोडक्‍ट और डिवाइसें हैं जिन्‍हें आम लोग इस्‍तेमाल कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका बड़ा लाभ भविष्‍य में दिखाई देगा.

क्‍या है आईसीएमईडी प्‍लस स्‍कीम (What is ICMED Plus Scheme)

भारत में मेडिकल उपकरणों पर यह रहेगा लोगा जो बताएगा उसकी क्‍वालिटी.
भारत में मेडिकल उपकरणों पर यह रहेगा लोगा जो बताएगा उसकी क्‍वालिटी.


इंडियन सर्टिफिकेशन ऑफ मेडिकल डिवाइसेज प्‍लस स्‍कीम (ICMED Plus Scheme) के तहत भारत में बनने वाली सभी मेडिकल डिवाइसों (Medical Devices) को प्रमाणपत्र दिया जाएगा. जिसका सीधा-सीधा अर्थ होगा कि आईसीएमईडी प्‍लस के लोगो वाली जो भी मेडिकल डिवाइस खरीदकर घर या अस्‍पताल में इस्‍तेमाल की जा रही है वह राष्‍ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्‍ट्रीय मानकों पर भी खरी है.

इस स्‍कीम को क्‍वालिटी मैनेजमेंट सिस्‍टम से जोड़ते हुए डिजाइन किया गया है. इसके तहत न केवल प्रोडक्‍ट और डिवाइस की क्‍वालिटी चेक की जाएगी बल्कि गुणवत्‍ता के वेरिफिकेशन के साथ ही उसका वेलिडेशन और विटनेस टेस्टिंग  भी की जाएगी. इसके बाद तय होगा कि ये प्रोडक्‍ट और डिवाइस मानकों पर कितनी खरी है. उम्‍दा क्‍वालिटी होने पर ही उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा. जिसका अर्थ हुआ कि भारत में बनने वाली और उपयोग में लाई जाने वाली ये मेडिकल डिवाइसें उच्‍च गुणवत्‍ता की होंगी.

यह विश्‍व में अपने आप की पहली ऐसी स्‍कीम है जिसमें क्‍वालिटी मैनेजमेंट सिस्‍टम को प्रोडक्‍ट सर्टिफिकेशन स्‍टेंडर्ड के साथ रेगुलेटरी जरूरतों से जोड़ा जाएगा. यह भारत के मेडिकल डिवाइस सेक्‍टर में अंत तक क्‍वालिटी का भरोसा दिलाने वाली स्‍कीम होगी.

उपभोक्‍ताओं यानि आम लोगों को यह होगा लाभ

द एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैन्‍यूफैक्‍चरर्स ऑफ मेडिकल डिवाइसेज के फॉरम कॉडिनेटर राजीव नाथ बताते हैं कि यह स्‍कीम न केवल देश के मैन्‍यूफैक्‍चरर्स को बल्कि उपभोक्‍ताओं को सबसे ज्‍यादा लाभ पहुंचाएगी. पहली बार आत्‍मनिर्भर भारत की दिशा में मेडिकल डिवाइसों के क्षेत्र में यह काम किया गया है. इससे देश में बनने वाली सभी मेडिकल डिवाइसों की क्‍वालिटी तय हो पाएगी. यह स्‍टेंडर्ड मानकों के प्रोडक्‍ट होंगे.

नाथ कहते हैं कि इसका पहला लाभ तो यही है कि भारत के लोगों को उच्‍च गुणवत्‍ता की मेडिकल डिवाइसें मिल पाएंगी. थर्मामीटर, ऑक्‍सीमीटर, नेब्‍यूलाइजर, ईसीजी मशीन, ग्‍लूकोमीटर, स्‍टेथोस्‍कोप, ग्‍लव्‍स, ऑक्‍सीजन कंसेंट्रेटर, मास्‍‍क आदि चीजें जिन्‍हें कोरोना के कारण आज एक आम यूजर भी जानता है, ऐसी कुल 6000 चीजों की की क्‍वालिटी सुनिश्चित होगी.

जब ये वस्‍तुएं और डिवाइसें बाजार में आएंगी और इनके मैन्‍यूफैक्‍चरर के पास आईसीएमईडी प्‍लस का सर्टिफिकेट होगा या इन डिवाइसों पर यह लोगो होगा तो लोग आसानी से यह पहचान कर पाएंगे कि एक तो यह भारत में बनी हुई है दूसरा क्‍वालिटी में उम्‍दा है सभी मानकों पर खरी है.

राजीव नाथ कहते हैं कि इसका एक और फायदा मैन्‍यूफैक्‍चरर को होगा. वह यह होगा कि जो भी सामान वे बनाएंगे उसकी क्‍वालिटी को लेकर कोई फर्जीवाड़ा नहीं होगा. साथ ही विश्‍व में चल रहे मानकों के अनुसार बनाई गई चीजों को ग्‍लोबली स्‍वीकृति मिलेगी. इससे एक निगरानी तंत्र भी बनेगा जो समय समय पर कंपनियों और फैक्ट्रियों के ऑडिट उनकी रिपोर्ट जांचेगा और उच्‍च गुणवत्‍ता के उत्‍पादन में सहयोगी होगा.

वे कहते हैं कि कोरोना के कारण अब जबकि मेडिकल उपकरणों की सबसे ज्‍यादा जरूरत पड़ रही है ऐसे में भारत में अगर इनका स्‍टेंडर्ड तय करने के लिए स्‍कीम बनाई जा रही है तो यह भारत को वैश्विक रूप से मजबूती प्रदान करने में सहायता करेगा.

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