ऑटो सेक्टर की सुस्ती पर इस दिग्गज ने कही बड़ी बात, GST घटाने के लिए बच्चों की तरह न रोएं कंपनियां

ऑटो सेक्टर की सुस्ती पर बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज के बाद अब इंडिया सीमेंट्स के एन श्रीनिवासन ने दिया बयान. श्रीनिवासन ने कहा कि सुस्ती की आहट के बाद भी कंपनियों ने ओवरप्रोडक्शन किया. जीएसटी घटाने से मांग में बढ़ोतरी की कोई गारंटी नहीं है.

News18Hindi
Updated: September 13, 2019, 6:17 PM IST
ऑटो सेक्टर की सुस्ती पर इस दिग्गज ने कही बड़ी बात, GST घटाने के लिए बच्चों की तरह न रोएं कंपनियां
ऑटो सेक्टर की सुस्ती पर बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज के बाद अब इंडिया सीमेंट्स के एन श्रीनिवासन ने दिया बयान. श्रीनिवासन ने कहा कि सुस्ती की आहट के बाद भी कंपनियों ने ओवरप्रोडक्शन किया. जीएसटी घटाने से मांग में बढ़ोतरी की कोई गारंटी नहीं है.
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Updated: September 13, 2019, 6:17 PM IST
नई दिल्ली. इंडिया सीमेंट्स (Indian Cements) के प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवासन (N Srinivasan) ने बीते गुरुवार को कहा कि ऑटोमोबाइल्स पर वस्तु एवं सेवा यानी जीएसटी घटाने की जरूरत नहीं है. एन श्रीनिवासन से पहले बजाज ऑटो के प्रबंध निदेशक (MD) राजीव बजाज (Rajiv bajaj) ने भी कहा था कि ऑटोमोबाइल्स (Automobiles) पर GST नहीं घटाया जाना चाहिए. आगामी 20 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होनी है. जीएसटी काउंसिल (GST Council) की इस बैठक से पहले ही ऑटो इंडस्ट्री (Auto Industry) के कई लोग इस बात की मांग कर चुके हैं कि ऑटोमोबाइल्स पर मौजूदा 28 फीसदी की जीएसटी को घटाकर 18 फीसदी किया जाए. इसके पीछे उन्होंने दलील दी है कि ऑटो सेक्टर में सुस्ती से निपटने में इससे मदद मिलेगी.

टैक्स कटौती से नहीं बढ़ेगी मांग
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एन श्रीनिवासन ने अपने बयान में कहा, 'ड्यूटी घटाने से डिमांड में बढ़ोतरी नहीं होने वाली है. यह स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम नहीं है. हमें ही देख लीजिए, इस समस्या से निपटने के लिए हम बीते 4 साल से हर दो दिन में एक दिन अपना प्लांट चला रहे हैं. सीमेंट पर 28 फीसदी टैक्स लगता है. हमें इनके साथ ही काम करने सीखना होगा. इसके उलट, ऑटो इंडस्ट्री कुछ माह की सुस्ती के बाद ही टैक्स दरों को घटाने की बात कर रहा है.' उन्होंने आगे कहा, 'मौजूदा समय में हमारी फैक्ट्री अपनी क्षमता का 80 फीसदी ही काम कर रही है.'

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श्रीनिवासन ने कहा कि ऑटोमेकर्स को सस्ते प्रोडक्ट्स बनाने चाहिए थे ताकि मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर के बावजूद भी बाजार में मांग की कमी न हो. उन्हें टैक्स कटौती की मांग नहीं करनी चाहिए. ऑटोमेकर्स को पता था कि मंदी का दौर आने वाला है, इसके बावजूद भी उन्होंने अपने इन्वेन्टरी में लगातार इजाफा किया.

कंपनियों के पास नकदी
श्रीनिवासान ने कहा, 'सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना ​चाहिए कि कंपनियों की बैलेंसशीट क्या है और उनके पास​ कितनी नकदी बची है. मारुति को ही देख लीजिए, तिमाही आधार पर उनका कुल मुनाफा 1,400 करोड़ रुपये से अधिक है और कंपनी के पास बड़ी मात्रा में नकदी है.'
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क्यों इस स्थिति में पहुंची कंपनियां
उन्होंने आगे यह भी कहा कि आखिर जीएसटी क्यों कम होना चाहिए? टैक्स में कटौती करके मांग को बढ़ाना एक बेहतर विकल्प नहीं है. आप तब क्या करेंगे, जब टैक्स में कटौती के बाद भी मांग में इजाफा नहीं हुआ? इस खराब स्थिति तक पहुंचने के लिए खराब प्लानिंग और रणनीति जिम्मेदार है.

कंपनियों के पास होना चाहिए वैश्विक बाजार का विकल्प
हाल ही में राजीव बजाज के हवाले से कहा गया था कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में सुस्ती का सबसे बड़ा कारण कंपनियों द्वारा ओवरप्रोडक्शन और स्टॉकिंग है. हालांकि, कुछ हद तक आर्थिक सुस्ती के इसके लिए जिम्मेदार है. जीएसटी में कटौती की कोई जरूरत नहीं है. ऐसी कोई इंंडस्ट्री नहीं है जो केवल आगे बढ़ती ही रहती है. अगर वैश्विक स्तर पर कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं तो उन्हें एक मार्केट में गिरावट से कुछ खास असर नहीं पड़ेगा.

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First published: September 13, 2019, 5:07 PM IST
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