ऑटो सेक्टर में इस वजह से गई 4 महीने में 3.5 लाख से ज्यादा नौकरियां, जानिए कब सुधरेंगे हालात

Ankit Tyagi | News18Hindi
Updated: August 17, 2019, 11:00 AM IST

कार और बाइक की बिक्री (Auto Sales) घटने की वजह से पिछले 4 महीने में ऑटोमेकर्स, पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स और डीलर्स ने 3.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की छुट्टी (Layoff) कर दी है. वहीं, 10 लाख से ज्यादा नौकरियों पर तलवार लटकी हुई है. जानिए ऑटो सेक्टर (Auto Sectors) की असली वजहों के बारे में...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 17, 2019, 11:00 AM IST
  • Share this:
भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की धड़कन कहलाने वाले ऑटो सेक्टर (Auto Sector) की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है. हालात ये है कि कार (Car) और बाइक (Bike) की बिक्री घटने की वजह से पिछले 4 महीने में ऑटोमेकर्स, पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स और डीलर्स ने 3.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों (Layoff) की छुट्टी कर दी है. आलम ये है कि अगले कुछ महीने में 10 लाख से ज्यादा नौकरियों (Jobs) पर तलवार लटकी हुई है. अब सवाल उठता है कि अचानक ऑटो सेक्टर का पहिया कैसे थम गया? कौन से ऐसे हालात पैदा हो गए कि ऑटो सेल्स में 18 साल की सबसे बड़ी गिरावट जुलाई महीने में दर्ज हुई.

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जब अर्थशास्त्रियों से बात की तो उन्होंने बताया कि ऑटो सेक्टर के इन खराब हालातों के पीछे BS VI (भारत स्टेज) नियम है. जो अगले साल एक अप्रैल 2020 से लागू होंगे. इसके अलावा दुनियाभर में आए ग्लोबल स्लोडाउन के चलते भारत पर भी इसका असर दिख रहा है. इसीलिए कई बड़ी विदेशी और घरेलू कंपनियां छंटनी कर रही हैं. इसका असर देश के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस पर दिख रहा है. ऐसे में आम लोगों की प्राथमिकताएं बदल गई है.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ट्रेड वॉर की वजह से दुनियाभर में अर्थव्यवस्था पर दबाव है. इसी का असर भारत पर दिख रहा है. भारत की जीडीपी करीब 2.7 ख़रब अमेरिकी डॉलर की है. देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में पिछले तीन वित्तीय वर्षों से लगातार गिरावट आ रही है. 2016-17 में जीडीपी विकास दर 8.2 फीसदी प्रति वर्ष थी, तो 2017-18 में ये घटकर 7.2 फीसदी रह गई. और, वर्ष 2018-19 में जीडीपी की विकास दर 6.8 फीसदी पर आ गई.

बिक्री में 18 साल की बड़ी गिरावट- ऑटो इंडस्ट्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. ब्रिकी के लिहाज़ से जुलाई का महीना बीते 18 साल में सबसे खराब रहा. इस दौरान बिक्री में 31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.



सोसायटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक जुलाई में बीते नौ महीने के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की बिक्री हुई. सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है. उनका कहना है कि जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है.

इन छोटी कंपनियों पर भी पड़ता असर-इस मंदी का प्रभाव गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है. टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के लिए सस्पेंशन (शॉकर) बनाने वाली जमना ऑटो इंडस्ट्री ने कहा कि कमज़ोर मांग के चलते अगस्त में वो अपने सभी नौ प्रोडक्शन प्लांट को बंद कर रहे हैं.
Loading...

लाखों नौकरियों पर लटकी तलवार- कारों और मोटरसाइकिलों की बिक्री में कमी से ऑटो सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियों की कटौती हो रही है. कई कंपनियां अपने कारखानों को बंद करने के लिए मजबूर हैं. इंडस्ट्री के शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि व्हीकल प्रोडक्शन, ऑटो एंसिलरी और डीलर्स अप्रैल से अब तक करीब 3,50,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुके हैं.



अर्थव्यवस्था और नौकरियों देने में ऑटो सेक्टर का अहम रोल -ऑटो सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह पूरी जीडीपी का 7 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग में 49% हिस्सा रखता है. यह सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जो मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन सेक्टर में मिलने वाली नौकरियों का लगभग आधा हिस्सा है. एक निजी डेटा समूह सीएमआईई के अनुसार जुलाई 2019 में बेरोजगारी की दर बढ़कर 5.66 से बढ़कर 7.51 प्रतिशत हो गई. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के लिए ऑटो सेक्टर में मंदी सबसे ज्यादा बड़ी चुनौती साबित होती नजर आ रही है.

ऑटो सेक्टर की परेशानियां आखिर हैं क्या- मनीकंट्रोल के डिप्टी एडिटर गौरव चौधरी का कहना है कि ऑटो सेक्टर में आए इस स्लोडाउन की कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह अगले साल से लागू होने वाला BS6 नार्म्स है.



उनका कहना है कि ऑटो सेक्टर में ट्रांजेशन का फेस चल रहा है. कंपनियां BS VI पर शिफ्ट हो रही है. ऐसे में कंपनियों की लागत बढ़ रही है. लिहाजा कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव भी है. इसके अलावा कंपनियों के पास पहले से बनी हुईं BS IV कारों को निकालने का भी दबाव है, लिहाजा ऑटो सेक्टर की सभी कंपनियां खुद को अजीब स्थिति में पा रही हैं.



दरअसल अप्रैल 2020 से BS-VI के मानकों के अनुसार बनी कार और बाइक ही बिकेंगी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पॉल्यूशन कम करने के लिए इन नियमों को लागू किया गया है. इन नियमों को पूरा करने के लिए कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लागत 20% तक बढ़ सकती है. ऐसे में बढ़ी कीमतों का बोझ ग्राहकों पर पड़ना तय है, वाहनों की कीमतों में 12% का इजाफा हो सकता है.

BS-VI के साथ बनी कारों में एक और चुनौती यह है कि इसके लिए तेल कंपनियों को भी फ्यूल अपग्रेड करना होगा. इसके लिए तेल कंपनियों पर 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ सकता है. अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाईं तो ऑटो सेक्टर में डिमांड पर इसका सीधा असर पड़ेगा.



ऑटो सेक्टर में हालिया कम बिक्री की एक वजह वो चर्चाएं भी हैं, जो GST से जुड़ी हैं. चौधरी का कहना है कि ऑटो सेक्टर में GST दरें घटाने को लेकर चर्चाएं काफी तेज हैं. इसीलिए आम उपोभक्ता फिलहाल नई कार खरीदने से बच रहा है, क्योंकि GST दरें घटने के बाद कार सस्ती होना तय है.

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के कर्ज में कमी के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी सेल्स घटने से ऑटो सेक्टर पर दबाव है. रिपोर्ट में इंडस्ट्री के खराब प्रदर्शन के कई और कारण गिनाएं गए हैं,  जैसे- सेकेंड हैंड कारों के बाजार में तेजी, इलेक्ट्रिक वाहनों की लॉन्चिंग और सरकार की EV पॉलिसी (इलेक्ट्रिक व्हीलक पॉलिसी) और किराए पर कार लेने के चलन में बढोतरी है. इसके अलावा 2020 में सीधे BS-6 स्टैंडर्स अपनाने का आदेश भी इंडस्ट्री के लिए टेंशन बना हुआ है. ग्राहक फिलहाल कार और बाइक खरीदने से कतरा रहे हैं.

दुनिया के अन्य देशों में भी ठीक नहीं है ऑटो सेक्टर के हालात (फाइल फोटो)


अन्य देशों के हालात भी ठीक नहीं-भारतीय स्टेट बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन, जर्मनी और अमेरिका में भी ऑटो सेक्टर में सुस्ती देखी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन में जुलाई में कारों की बिक्री 3.9 फीसदी गिर गई और यह लगातार 13वें महीने की गिरावट है. एशिया प्रशांत क्षेत्र में पिछले साल वाहनों की बिक्री करीब एक फीसदी कम रही थी और इस साल 2019 में इसके 2-3.5 फीसदी तक कम रहने की आशंका है.

अमेरिका में लंबे समय से बिक्री में कमी देखी जा रही है. अमेरिका और चीन में बिक्री घटने का असर जर्मनी पर भी पड़ा है. जर्मनी में इस साल की पहली छमाही में वाहनों का उत्पादन 12 फीसदी घट गया.

इन सभी हालातों को देखते हुए ऑटो सेक्टर में संकट के बादल साफ तौर पर दिख रहे है. लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अक्टूबर तक सेक्टर की चिंताओं का समाधान होने की उम्मीद लगाई जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो एक साल में फिर से ऑटो सेक्टर टॉप गियर में दौड़ने लगेगा.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 17, 2019, 10:57 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...