देश के इस बड़े बैंक ने दिया ग्राहकों को तोहफा! इतनी सस्ती हुई होम-ऑटो-पर्सनल लोन की EMI

देश के इस बड़े बैंक ने दिया ग्राहकों को तोहफा! इतनी सस्ती हुई होम-ऑटो-पर्सनल लोन की EMI
देश के इस बड़े बैंक ने दिया ग्राहकों को तोहफा! इतनी सस्ती हुई होम-ऑटो-पर्सनल लोन की EMI

देश के बड़े प्राइवेट बैंक एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया है. बैंक ने एमसीएलआर (MCLR) में 0.10 फीसदी तक की कटौती की है. ये कटौती सभी टेन्योर के लोन पर लागू होगी.

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  • Last Updated: April 18, 2019, 11:19 AM IST
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देश के बड़े प्राइवेट बैंक एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने ब्याज दरों में कटौती का ऐलान किया है. बैंक ने एमसीएलआर (MCLR) में 0.10 फीसदी तक की कटौती की है. ये कटौती सभी टेन्योर के लोन पर लागू होगी. नई दरें 18 अप्रैल से लागू हो गई है. इसके बाद बैंक का होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ता हो जाएगा.एमसीएलआर घटने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.

आपको बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पिछली पॉलिसी में रेपो रेट 0.25 फीसदी तक घटा दिया है. इस कटौती के बाद दरें 6 फीसदी पर आ गई है. RBI के इस फैसले के बाद एसबीआई समेत कई बड़े बैंकों ने लोन पर ब्याज दरें घटा दी है.





क्या होता है MCLR-MCLR का को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं. इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं. ये बैंचमार्क दर होती है. इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं.

एमसीएलआर कम होने से फायदा- एमसीएलआर कम होने से आम आदमी को सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसका मौजूदा लोन सस्ता हो जाता है और उसे पहले की तुलना में कम ईएमआई देनी पड़ती है.



क्या होता है रेपो रेट-रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है. दरअसल, जब भी बैंकों के पास फंड की कमी होती है, तो वे इसकी भरपाई करने के लिए केंद्रीय बैंक यानी आरबीआई से पैसे लेते हैं. आरबीआई की तरफ से दिया जाने वाला यह लोन एक फिक्स्ड रेट पर मिलता है. यही रेट रेपो रेट कहलाता है. इसे भारतीय रिजर्व बैंक हर तिमाही के आधार पर तय करता है.

आम आदमी पर क्या होता है असर-रेपो रेट घटाने का मतलब है कि अब बैंक जब भी आरबीआई से फंड लेंगे, उन्हें नई दर पर फंड मिलेगा. सस्ती दर पर बैंकों को मिलने वाले फंड का फायदा बैंक अपने उपभोक्ता को भी देंगे. यह राहत आपके साथ सस्ते कर्ज और कम हुई ईएमआई के तौर पर बांटा जाता है. इसी वजह से जब भी रेपो रेट घटता है तो आपके लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है. साथ ही जो कर्ज फ्लोटिंग हैं उनकी ईएमआई भी घट जाती है.

 
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