अज़ीम प्रेमजी और उनकी पत्नी को लगा बड़ा झटका! बेंगलुरु कोर्ट के आदेश के बाद किया SC का रुख

अज़ीम प्रेमजी और उनकी पत्नी को लगा बड़ा झटका! बेंगलुरु कोर्ट के आदेश के बाद किया SC का रुख
आईटी कंपनी विप्रो के संस्थापक है अजीम प्रेमजी

अज़ीम प्रेमजी (Azim Premji) और उनकी पत्नी यासीम (Yaseem) ने बेंगलुरु कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद निराश हो सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 27, 2020, 11:47 AM IST
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नई दिल्ली. भारतीय आईटी उद्योग की बड़ी हस्ती एवं समाज सेवी अज़ीम प्रेमजी और उनकी पत्नी यासीम बेंगलुरु कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद निराश हो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. दरअसल यह आदेश प्रेमजी द्वारा अधिकृत (owned) विद्या, रीगल एवं नेपियन नामक तीन कंपनी का हाशिम इन्वेस्टमेंट एवं ट्रेडिंग कंपनी के साथ विलीनीकरण के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत के आधार पर बैंगलोर कोर्ट द्वारा जारी किया गया था. याचिका कर्नाटक की एक निचली अदालत द्वारा भयावह अपराधिक शिकायतों के आरोप में जारी किए गए सम्मन को रद्द करने के लिए कहा है.

प्रेमजी और उनकी पत्नी ने अपने वकील महेश अग्रवाल के जरिए बताया की यह तीन कंपनी जिसे 1974 में पुनर्गठित किया तथा 1980 में इनका सेरहोल्डिंग (shareholding) इस तरह से लिंक किया गया, जिसके तहत तीनो में से कोई भी दो कंपनी तीसरे का मालिक होगा. प्रेमजी के वकील महेश अग्रवाल ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया 2015 में आरबीआई (RBI) को संज्ञान में लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट की हरी झंडी के बाद किया गया था. इसकी पूरी जानकारी सेबी स्टॉक एक्सचेंज और कंपनी मामलों के मंत्रालय को 2015 में दी गई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार, हसम कंपनी में तीन कंपनी के मर्जर के खिलाफ चेन्नई की एक कंपनी ने अपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया है. उन्होंने संदेह जताया कि इसके पीछे प्रेमजी के पूर्व सहयोगी रहे सुभिक्षा सुब्रमण्यन का हाथ है. प्रेमजी समूह की एक फर्म को सुब्रमण्यम की स्वामित्व वाली कंपनी के खिलाफ 2013 में करोड़ों रुपये के चेक बाउंस करने के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज करनी पड़ी थी, जो अभी भी लंबित है. प्रेमजी के वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले ने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया है.



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एनजीओ की शिकायतों की सत्यता की प्रारंभिक जांच किए बिना कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी दलील पर विचार करने से इनकार कर दिया. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बेंगलुरु ट्रायल कोर्ट के समक्ष आपराधिक शिकायतों की तर्ज पर फरवरी 2018 और सितंबर 2019 के बीच चार बार दिल्ली हाई कोर्ट और NCLAT के समक्ष याचिकाएं दायर की गई थीं.
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