बाबा रामदेव का बड़ा ऐलान! पतंजलि आयुर्वेद की खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया लाएगी पब्लिक ऑफर

बाबा रामदेव ने बताया कि अगले साल पतंजलि आयुर्वेद की कंपनी रुचि सोया में प्रवर्तकों की हिस्‍सेदारी कम की जाएगी.
बाबा रामदेव ने बताया कि अगले साल पतंजलि आयुर्वेद की कंपनी रुचि सोया में प्रवर्तकों की हिस्‍सेदारी कम की जाएगी.

पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurveda) की खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया (Ruchi Soya) में प्रवर्तकों की हिस्‍सेदारी घटाने के लिए अगले साल फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) पेश किया जाएगा. बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने इस घोषणा के दौरान एफपीओ के आकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2020, 6:07 PM IST
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नई दिल्‍ली. पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurveda) की खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया (Ruchi Soya) अगले साल फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) पेश करेगी. बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने बताया कि कंपनी में प्रवर्तकों की हिस्‍सेदारी कम करने के लिए पब्लिक ऑफर लाने का फैसला लिया गया है. बता दें कि पतंजलि आयुर्वेद ने पिछले साल रुचि सोया का अधिग्रहण किया था. बाबा रामदेव को उम्‍मीद है कि कंपनी चालू वित्‍त वर्ष के दौरान तेजी से बढ़ोतरी दर्ज करेगी.

रुचि सोया में प्रवर्तकों की हिस्‍सेदारी है 99 फीसदी
पतंजलि ने पिछले साल इनसॉल्‍वेंसी प्रॉसेस (Insolvency Process) के जरिये 4,350 करोड़ रुपये में रुचि सोया का अधिग्रहण किया था. रुचि सोया शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनी (Listed Company) है. इस समय कंपनी में प्रवर्तकों (Promotors) की हिस्‍सेदारी तकरीब 99 फीसदी है. उन्‍हें नियमों के मुताबिक कंपनी में सार्वजनिक हिस्‍सेदारी (Public Shareholding) 25 फीसदी करने के लिए अपनी हिस्‍सेदारी घटानी होगी. रामदेव ने कहा कि हम अपनी हिस्‍सेदारी घटाने के लिए अगले साल एफपीओ पेश कर रहे हैं.

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ऐसे दो बार में प्रवर्तक घटाएंगे अपनी हिस्‍सेदारी


पतंजलि के एक अधिकारी ने बताया कि प्रवर्तकों को जून 2021 तक रुचि सोया में अपनी हिस्‍सेदारी 10 फीसदी कम करनी है. वहीं, इसके बाद 36 महीनों के भीतर अपनी हिस्‍सेदारी कुल 25 फीसदी घटानी होगी. इस बारे में कंपनी बोर्ड ने प्रस्‍ताव पारित कर दिया है. हालांकि, बाबा रामदेव ने अगले साल पेश किए जाने वाले पब्लिक ऑफर के आकार की कोई जानकारी नहीं दी. इस समय कंपनी की 98.90 फीसदी हिस्‍सेदारी प्रवर्तकों व प्रवर्तक समूह और 1.10 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है, जिसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (NCLT) ने मंजूरी दी हुई है. एफपीओ से कंपनी में आम निवेशकों की हिस्‍सेदारी 25 फीसदी हो जाएगी.
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