भारत और उसके 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के बीच में खड़ी है ये दीवार

सितंबर 2018 में एक आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि दिंसबर 2017 में भारत के सार्वजनिक बैंको पर एनपीए का बोझ 30 जून 2014 के मुकाबले तीन गुना हो गया था.

News18Hindi
Updated: October 13, 2018, 3:04 PM IST
भारत और उसके 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने के बीच में खड़ी है ये दीवार
सांकेतिक
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Updated: October 13, 2018, 3:04 PM IST
भारत ने खुद के सामने अपनी जीडीपी को 2025 तक 5 ट्रिलयन डॉलर के पार पहुंचाने का महत्वकांक्षी लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग द्वारा गठित एक कार्यकारी समूह ने सरकार और उद्योग के साथ मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वत्तीय सारक्षरता बढ़ाने और एनपीए को शून्य करने का सुझाव दिया है.

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार द्वारा त्वरित प्रयासों की जरूरत है और सार्वजनिक हितधारकों को इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय समावेश और समान रूप से वित्तीय साक्षरता को बढ़ाना है क्योंकि सुधार के अन्य उपकरण पॉलिसी फ्रंट पर लगभग पूरे हो गए हैं.

सभी हिस्सेधारकों को रिपोर्ट सौंप दी गई है जिसमें  'इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) और राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के जरिए एनपीए में हुई गड़बड़ी सुधारने के लिए कहा गया, जिसके सकारात्मक परिणाम कई गुना तेज होंगे.

इस बीच सितंबर 2018 में एक आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि दिंसबर 2017 में भारत के सार्वजनिक बैंको पर एनपीए का बोझ 30 जून 2014 के मुकाबले तीन गुना हो गया था.

यह कार्य अब और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि वर्तमान में 6.5 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग 2.6 ट्रिलियन डॉलर है. वित्तीय साक्षरता भारत के लिए हमेशा रोडब्लॉक की तरह रही है.

स्टेंडर्ड एंड पुअर फाइनेंशियल सर्विस एलएलसी (एसएंडपी) के वैश्विक सर्वे के अनुसार दक्षिण एशियाई देशों में 25 प्रतिशत व्यस्कों में भी वित्तीय साक्षरता नहीं है. अब भी एक आम भारतीय के लिए वित्तीय साक्षरता प्राथमिकता नहीं है. भारत में विश्व की 17.5 प्रतिशत जनता निवास करती है लेकिन यहां की 76 प्रतिशत जनसंख्या बुनियादी वित्तीय अवधारणाओं को भी नहीं समझती है.

ध्यान देने वाले मार्गों के अलावा, रिपोर्ट ने उन क्षेत्रों की भी पहचान की है जो विकास को बढ़ावा देंगे. रिपोर्ट में लिखा गया है, "आधारभूत ताकत 2025 तक 5 ट्रिलयन डॉ़लर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की क्षमता का संकेत देती है. अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और उभरती गतिशीलता हमें कृषि और संबद्ध गतिविधियों से एक ट्रिलियन डॉलर को लक्षित करने, विनिर्माण से एक ट्रिलियन और सेवाओं से तीन ट्रिलियन लक्ष्य प्रदान करने के लिए आधार प्रदान करती है."
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार नीतियों को उत्पादन केंद्रित से आय केंद्रित बनाना चाहती है. प्रस्तावित इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2018 भविष्य के उद्यमों के लिए एक व्यापक, सेक्टर ऐग्नास्टिक एजेंडा प्रदान करती है और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय उद्योग बनने का अनुमान है जो आधुनिक, टिकाऊ और समावेशी है.

चुनिंदा सेवा क्षेत्रों के विस्तार में तेजी लाने के लिए सेवा क्षेत्र की पहल भी चल रही है. कार्यकारी समूह ने इन पहलुओं को जिम्मेदार ठहराया है और पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक नया उत्साह प्रोत्साहित किया है.

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