व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई पर विचार करें बैंक: सरकार

व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई पर विचार करें बैंक: सरकार
कॉरपोरेट कर्जदार के आंकड़े जमा करने के लिए बैंकों को एक आईटी सिस्टम तैयार करने की भी सलाह

वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के वित्तीय सेवा विभाग ने सरकारी बैंकों को सलाह दी है कि उन मामलों पर विचार करें, जिनमें कॉरपोरेट देनदारों की व्यक्तिगत गारंटी लेने वालों पर दिवालिया कार्रवाई शुरू हो सकती है. यह सलाह 26 अगस्त को जारी की गई.

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नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने (Ministry of Finance) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उन मामलों को देखने को कहा है, जहां कर्ज नहीं चुकाने वाले कॉरपोरेट देनदारों की व्यक्तिगत गारंटी लेने वालों पर दिवालिया कार्रवाई शुरू की जा सकती है. इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC- Insolvency and Bankruptcy Code) तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए समयबद्ध और बाजार से जुड़ा समाधान मुहैया कराता है. संहिता के तहत कॉरपोरेट देनदारों के मामले में व्यक्तिगत तौर पर गारंटी देने वालों के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू करने का प्रावधान भी है, हालांकि बकाया राशि वसूलने के लिए ऋणदाताओं ने इस प्रावधान का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है.

वित्त सेवा विभाग ने सरकारी बैंकों को दी सलाह
वित्तीय सेवा विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) को एक सलाह में उन मामलों की निगरानी पर विचार करने को कहा है, जिनमें राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के समक्ष व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत पड़ सकती है. सलाह में कहा गया कि बैंक ऐसे मामलों में व्यक्तिगत गारंटर से लेकर कॉरपोरेट कर्जदार के आंकड़े जमा करने के लिए एक आईटी प्रणाली की स्थापना पर विचार कर सकते हैं. यह सलाह 26 अगस्त को जारी की गई.

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NCLT के आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने लगाई रोक


कॉरपोरेट कर्जदारों के व्यक्तिगत गारंटर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का नियम पिछले साल दिसंबर से लागू हुआ. हाल में एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी, जो 1,200 करोड़ रुपये की वसूली के मामले में व्यक्तिगत गारंटर हैं.

यह शायद किसी व्यवसाय के प्रमुख के खिलाफ पहली दिवालिया कार्रवाई थी, जिन्होंने कर्ज लेने के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनसीएलटी के इस आदेश पर गुरुवार को रोक लगा दी.
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