1.3 लाख करोड़ रुपए का बैड लोन बढ़ेगा, फिर भी उछल रहे बैंकों के शेयर, जानिए वजह

सभी उधारकर्ताओं के लिए मोरटोरियम में ब्याज पर ब्याज की छूट की घोषणा से बैंकों को 7000-7500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त जरूरत होगी.

सभी उधारकर्ताओं के लिए मोरटोरियम में ब्याज पर ब्याज की छूट की घोषणा से बैंकों को 7000-7500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त जरूरत होगी.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से एनपीए (NPA) घोषित करने की छूट मिलने से बैंकों की लोन रिकवरी (Loan Recovery) सुधरने की संभावना भी जताई जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 1:04 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गैर-निष्पादित आस्तियों (Non-Performing Assets, NPA) की घोषणा वाली रोक हटा ली है. इसका मतलब है कि अब बैंक ऐसे लोन को एनपीए (NPA) में डाल सकेंगे, जिनकी वसूली नहीं हो पा रही है. इसके चलते बैंकों के बैड लोन (Bad Loans) 1.3 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ सकते हैं. इसके बाद भी बैंकिंग शेयरों में उछाल है.

विशेषज्ञों के मुताबिक बैंकिंग शेयरों में उछाल की मुख्य वजह एनपीए घोषित करने की छूट मिलने से बैंकों की लोन रिकवरी (Loan Recovery) सुधरने की संभावना भी जताई जा रही है. इसके अलावा बैंकों की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हो सकता है. यही वजह है कि मंगलवार को बंधन बैंक के शेयर सबसे ज्यादा 3.36 प्रतिशत, बीओबी के 2.48 प्रतिशत इंडसइंड बैंक के शेयर 2.28 प्रतिशत उछल गए.

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ब्याज पर ब्याज की छूट देने के लिए और चाहिए 7 हजार करोड़


सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों से कहा कि वे ऋण राशि के बावजूद सभी उधारकर्ताओं के लिए ब्याज पर ब्याज की छूट दें. सरकार ने पहले ही 2 करोड़ रुपए तक के कर्ज लेने वाले कर्जदारों को राहत देने की घोषणा की थी. इसके लिए लगभग 6500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था. इक्रा के अनुमानों के अनुसार, 2 करोड़ से ज्यादा का उधार लेने वाले लोगों को भी शामिल किया जाए तो चक्रवृद्धि ब्याज का अनुमान 13,500-14,000 करोड़ रुपए होगा. यानी सभी उधारकर्ताओं के लिए छूट की घोषणा के साथ, 7000-7500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त जरूरत होगी.

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कोर्ट बैंकिंग नियमों में हस्तक्षेप नहीं करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में महामारी के बीच उधारकर्ताओं पर तनाव कम करने के लिए एनपीए के वर्गीकरण पर रोक लगा दी थी. मंगलवार को कोर्ट ने यह कहते हुए रोक हटा दी कि अब वह बैंकिंग नियमों में हस्तक्षेप नहीं करेगा. गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक यदि उधारकर्ता 90 दिनों के बाद तक कर्ज की किस्त नहीं चुकाता है तो बैंक ऐसे लोन को एनपीए के रूप में रख देते हैं. लेकिन बीते साल महामारी की वजह से बैंकों को अप्रैल से अगस्त तक मोरटोरियम देना पड़ा था. फिर सितंबर से कोर्ट ने एनपीए की रोक लगा दी थी. यानी बैंक 9 महीने तक एनपीए की कार्रवाई नहीं कर पाए.

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कोर्ट के फैसले की वजह से बैंकों ने सकल एनपीए 7.4 लाख करोड़ रुपए ही बताया

अनुमान के मुताबिक, दिसंबर 2020 तक बैंकों को सकल एनपीए 8.7 लाख करोड़ रुपए  था. लेकिन कोर्ट के फैसले की वजह से बैंकों ने सकल एनपीए 7.4 लाख करोड़ रुपए ही रखा था. यानी अब बची हुई 1.3 करोड़ रुपए की रकम को भी एनपीए घोषित किया जा सकेगा. वहीं, रेटिंग कंपनी इकरा (ICRA) ने कहा कि प्रोफार्मा के आधार पर 31 दिसंबर, 2020 तक बैंकों के लिए शुद्ध NPA 2.7 लाख करोड़ रुपए था. लेकिन बैंक 1.7 लाख करोड़ रुपए का ही एनपीए घोषित कर पाए थे. उच्चतम न्यायालय की रोक की वजह से बैंकों का सकल एनपीए 1.3 लाख करोड़ रुपए (1.2%) और शुद्ध एनपीए 1 लाख करोड़ रुपए (1%) से अधिक हो गया हो गया है.

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निवेशक जुटा सकेंगे बैंकों के बैड लोन की सही जानकारी

इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बैंकों की लोन रिकवरी बढ़ेगी क्योंकि अब वे इस दिशा में जयादा प्रयास करेंगे. निवेशक भी उन बैंकों के बैड लोन की सही जानकारी जुटा पाएंगे, जिसमें उन्होंने पैसा लगाा रखा है. अब तक एनपीए की जो रिपोर्टिंग हो रही है, वह वास्तविकता से कम है.
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